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इसलिए जीवन में आते हैं दुख, आप भी जान लें क्यों

इंसान की यह फितरत है कि वह सुख में ईश्वर को भूल जाता है और दुख आने पर ईश्वर को कोसने लगता है। वैसे देखा जाए तो सुख में जहां इंसान भगवान को बिसारा देता है, वहीं दुख उसे परमात्मा के करीब भी लाता है। कई लोग यह सवाल करते हैं कि हम तो जीवन में सब कुछ अच्छा ही करते हैं, फिर हमारे जीवन में दुख क्यों आते हैं। इस सवाल का जवाब समझने के लिए आपको इस पोस्ट को पूरा पढ़ना होगा।

ईश्वर के करीब लाता है दुख

जीवन में सुख दुख का चक्र चलता रहता है। आज सुख है तो कल दुख भी होगा और आज दुख है तो कल सुख अवश्य आएगा। अगर जीवन में पीड़ा न हो तो सुख के आनंत की अनुभूति लेना भी कठिन हो जाएगा। अंधेरी रातों के बिना सुबह की किरण बेमतलब है, मौत के अंधेरे के बिना जीवन का प्रकाश कहां? दुख के समय हम ईश्वर से प्राथना करते हैं और इस तरह हम उनके थोड़ा करीब आ जाते हैं।

न करें फल की इच्छा

गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि निष्काम कर्म योग। यानी कि इंसान को कर्म करना चाहिए, लेकिन अपने उद्देश्य के अनुरूम फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। इस तरह कर्म किया जाए तो पीड़ा नहीं होगी, लेकिन अगर कर्म करते वक्त आप दुखी होते हैं तो इसका कारण आपका कर्म नहीं, बल्कि कर्म के साथ जुड़ी कामना है।

सुख का अभिमान मिटाता है दुख

दुखी इंसान छोटी परेशानियों को भी बड़ा समझने लगता है और खुदको दुनिया का सबसे दुखी और अभागा मानने लगता है। यह केवल उसका भ्रम होता है। उससे भी अधिक परेशान लेकिन दुनिया में हैं। सुख और दुख दोनों के लिए अपनी दृष्टि को बड़ा बनाना जरूरी है। इससे जहां सुख का अभिमान मिट जाता है, वहीं पीड़ा का भार और तनाव भी खत्म हो जाता है।

चुनौती और अवसर

दुख न केवल चुनौती है बल्कि एक अवसर भी है। यह न केवल हमें हमारी परेशानियों से लड़ने की चुनौती देता है, बल्कि हमें खुद को निखारने और बेहतर इंसान बनने का अवसर भी देता है। विद्वान कहते हैं कि दुख को चुनौती की तरह लेना चाहिए। दुख को देखो और जागो। इसे खुद को पीड़ा देने दो, तभी तो परमात्मा की याद आएगी। जब आपको परमात्मा का सान्निध्य मिलने लगेगा तो ही आपको दुख के सुख का एहसास होने लगेगा।