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मुंह की समस्‍या से पीड़ि‍त हैं तो ये जानकारी आपके लिए है

भारत में करीब 95 फीसदी लोग मुंह की किसी न किसी बीमारी से ग्रस्‍त हैं। जानने वाली बात यह है कि ओरल कैविटी यानी मुंह और दांतों में होने वाले गड्ढे शरीर की किसी बीमारी से जुड़े हो सकते हैं और शरीर की कोई समस्‍या मुंह की बीमारी को दावत दे सकती है।बैक्‍टीरिया के छिपने की खास जगह ओरल कैविटी ऐसे तत्‍वों, किटाणु, विषाणुओं के छिपने की बेहतरीन जगह होते हैं जो कि दांतों से फैलने वाले खास तरह के संक्रमण का कारण होते हैं। शरीर की ऐसी समस्‍याएं जो मसूढ़ों की बीमारी की वजह हो सकती हैं उनमें डायबिटीज मेलिटस, हेमेटोपोएटिक सिस्‍टम की समस्‍या, न्‍यूट्रोफि‍ल फंक्‍शन को खराब करने वाली बीमारियां और एंटीनियोप्‍लास्‍ट‍िक थेरेपी शामिल हैं।

दांतों का गिरना पेरियोडोंटल बीमारियों में मुख्‍य समस्‍या है।क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ दिल्‍ली स्थित मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज के प्राचार्य और निदेशक डॉक्‍टर महेश वर्मा कहते हैं कि ओरल हेल्‍थ और हार्ट डिजीज आपस में जुड़े हुए हैं। दरअसल खून के बहाव के जरिये बै‍क्‍टीरिया का फैलाव शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों में होता है। ऐसे मरीज जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है उनमें बोन लॉस तथा अन्‍य शारीरिक संक्रमण मसूढ़ों में किसी तरह की समस्‍या को जन्‍म दे सकते हैं या फिर ऐसे मरीजों में ओरोफेसियल स्‍पेस इंफेक्‍शन हो सकता है।दिल संभाल के हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल कहते हैं कि मुंह के माइक्रोबिएल एजेंट्स हृदय के वाल्‍व और एंडोकार्डियम में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। सीधे शब्‍दों में कहें तो मसूढ़ों की समस्‍या से हृदय रोग का खतरा सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे मरीज जो लगातार मसूढ़ों की किसी समस्‍या, मसलन जिंजिविटीज या एडवांस पेरीडोंटल डिजीज से ग्रस्‍त रहते हैं उनमें हृदय रोग का खतरा ज्‍यादा होता है।

खासकर तब जब इस बीमारी का पता नहीं चले और उसका इलाज नहीं किया जाए। मसूढ़ों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्‍टीरिया आसानी से खून में शामिल होकर रक्‍त धमनियों तक पहुंच सकते हैं और हृदय रोग का कारण बन सकते हैं। यहां तक कि अगर आपके मसूढ़ों के संक्रमण की समस्‍या ज्‍यादा गंभीर नहीं है तब भी मुंह की पर्याप्‍त सफाई नहीं करने से आप गंभीर स्थिति में फंस सकते हैं।आपके बिगड़ते ओरल हेल्‍थ के कुछ लक्षण मसूढ़े लाल हो गए हों, उनमें सूजन आ गई हो और छूने से दुखते हों। खाने, ब्रश करने या धोने से मसूढ़ों से खून आ रहा हो। मसूढ़ों और दांतों में पस आ रहा हो या संक्रमण का कोई और लक्षण दिख रहा हो। मसूढ़े दांतों से अलग होते दिख रहे हों। मुंह से लगातार दुर्गंध आ रहा हो या मुंह का स्‍वाद हमेशा खराब लग रहा हो तो समझ लें कि ओरल हेल्‍थ की समस्‍या है। इसके अलावा यदि दांत ढीले लग रहे हों और उनमें सामान्‍य से अधिक गैप दिख रहा हो।क्‍या करें मुंह की सफाई या जिसे अंग्रेजी में हाईजीन कहते हैं उसका ध्‍यान रखना जरूरी है। दो बार ब्रश करने की सलाह सभी डॉक्‍टर देते हैं मगर दांतों की सफाई का तरीका अच्‍छे से जानकर ही दांत साफ करें। अगर ऊपर दिया गया कोई लक्षण है तो दंत चिक‍ित्‍सक से मिलकर किसी अच्‍छे पेस्‍ट की सलाह ले लें। बाजार में बिकने वाले पेस्‍ट के भ्रामक विज्ञापनों पर न जाएं।

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