Times Bull
News in Hindi

महिलाओं के साथ होती हैं छेडख़ानी, बचाएंगे ये टिप्स

महिलाऐं व लड़कियाँ संवेदना रहित इस समाज में स्वयं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकती है । अक्सर महिलाओं को देखा जाता है कि वे अपने आस-पास हो रही हरकतों को नजरअंदाज करती हैं। नजरें बचाकर अनजान बनने की कोशिश करती हैं। खबरदार! अगर आपका भी ऐसा ही रवैया है। ये रवैया मनचलों को हौंसला बुलंद करता है। उनको लगता है कि आपको परेशान करना बेहद आसान है क्योंकि आप विरोध करने वालों में से नहीं हैं। जैसे ही बस में चढ़ें और अपनी जगह पक्की करें, आस-पास के लोगों को पूरी तरह नोटिस करें। उनकी हरकतों को भी ऐसे नोटिस करें जैसे आप को हर हरकत का पता हो। नजरें चुराकर छेडख़ानी को बर्दाश्त बिल्कुल नहीं करे। तुरंत अपना विरोध दिखाएं।

बॉलीवुड एक्टर सन्नी देओल की मूवी ‘जीत’ का एक दृश्य। करिश्मा कपूर बस में सफर के लिए चढ़ती है और पीछे-पीछे कुछ मनचले भी बस में चढ़ते हैं। करिश्मा को छेडऩे के लिए ये बहाना बनाते हैं और बस में ज्यादा भीड़ होने का नाटक करते हुए कहते हैं कि ‘बहुत भीड़ है भाई’ और चिपकने की कोशिश करते हैं। ‘बहुत भीड़ है भाई’ वाला डॉयलाग फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी महिलाओं को परेशान करता है। मनचले युवक भीड़ के बहाने से उनके शरीर पर हाथ रखने और बेहद करीब आ जाते हैं। ऐसी पॉजिशन में डरें नहीं, अपने आप को परिस्थिति का शिकार ना होने दें। सबसे आसान उपाय है कि आप सामान्य लहजे में दूर खड़े रहने या फिर तरीके से खड़े होने को कहें। अगर आपको लगता है कि इससे बात नहीं बनती है, तो कंधों पर टांगने वाला बैग साथ रखें। इसे अपनी पीठ पर से ना उतारें। अगर कोई भी मनचला आपके नजदीक आकर नाजायज फायदा उठाना भी चाहेगा, तो बैग की वजह से हतोत्साहित हो जाएगा। इस बैग में आप अपनी बुक्स, डायरी, काम की सामग्री और शॉपिंग आइटम्स भी रख सकते हैं।

आजकल हर शहर कस्बे की महिलाएं स्कार्फ से मुंह को ढककर बाहर निकलती हैं। कारण चाहे धूप से बचना या फिर कॉम्पलैक्सन को बचाना ही क्यों ना हो। मुंह पर स्कार्फ पहनने से महिलाएं बसों में होने वाली छेड़छाड़ से भी बच सकती हैं। कई छेडख़ानी वाले मामलों में सामने आया है कि महिलाओं के चेहरों को देखकर मनचलों का उत्साह बढ़ता है और वे गलत हरकतों पर उतर आते हैं। जब यह चलन ही बन गया है कि महिलाएं मुंह पर स्कार्फ बांधने लगी हैं, तो बसों में क्यों नहीं। इसकी एक वजह यह भी है कि चेहरे पर व्यक्ति के भाव साफ नजर आते हैं। जैसे कि अमुक व्यक्ति चेहरे से गुस्सैल लगता है, तो कोई चेहरे से भोला। अगर चेहरे पर स्कार्फ हो तो किसी के लिए भी चेहरा पढऩा आसान नहीं होगा और छेडख़ानी के चांस कम हो जाएंगे।

बस चाहे वह लो-फ्लोर हो या फिर मिनी बस, यात्रियों के चढऩे वाले गेट के सामने भीड़ ज्यादा होती है। यहां पर ना केवल अंदर चढऩे वाले लोग जमा रहते हैं, बल्कि उतरने वाले भी लाइन लगाकर इंतजार करते हैं। महिलाओं को चाहिए कि वे पूरी कोशिश करें कि बस के बीचों-बीच ना खड़ी हों, खासकर गेट के सामने तो बिल्कुल नहीं। बीचों-बीच खड़े रहने से हर आने-जाने वाला यात्री छेड़छाड़ करना चाहे, तो आसानी से कर सकता है। इसलिए हमेशा बस की विंडो साइड या फिर कोने में खड़े हों। हालांकि यहां भी छेड़छाड़ होने की पूरी गुंजाइश रहती है, लेकिन बीचों-बीच खड़े होने से बेहद कम।

चोर हो या फिर मनचला, जोरदार विरोध से हर कोई डर जाता है। इस सिद्धांत को याद रखें। बस में हों या फिर किसी और जगह, छेडख़ानी का विरोध प्रार्थना जैसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। गिड़गिड़ाने से तो आपकी परेशानी बड़ सकती है। जैसे ही आपको पता चले कि कोई जानबूझकर आपसे छेडख़ानी कर रहा है, तो पूरी ताकत से आवाज निकालकर मनचले को फटकारें। इससे ना केवल जो छेडख़ानी कर रहा है वह घबरा जाएगा बल्कि दूसरे संभावित मनचले भी अपना-अपना कोना पकड़ लेंगे। ऐसा करते समय चेहरे और बॉडी लैंग्वेज में गुस्सा साफ दिखाई देना चाहिए।

मोबाइल फोन की मदद से छेड़छाड़ और कई मामले होने से बच जाते हैं। बसों में भी इसका पूरा इस्तेमाल कर छेड़छाड़ से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए जब भी महिलाएं भीड़ भरी बस में यात्रा करें, तो कोशिश करें कि मोबाइल पर बिजी दिखाई दें। लोगों को लगे कि अमुक महिला का पूरा ध्यान सिर्फ मोबाइल पर ही है। ऐसे में मनचलों का मनोबल बनने से पहले ही टूट जाएगा। उनको यही लगेगा कि आप का बस में यात्रा कर रहे किसी व्यक्ति में कोई इंटरेस्ट नहीं है और यदि उनके साथ छेड़छाड़ हुई, तो उनका रिएक्शन बेहद खतरनाक होगा।

आजकल देश के सभी शहरों में चलने वाली बसों में महिलाओं के लिए रिजर्व सीट होती हैं। पर अधिकांश जगहों पर इस नियम का कड़ाई से पालन नहीं होता। इसकी भी वजह खुद महिलाएं हैं। वे खुद के लिए रिजर्व सीट मांगने में भी शर्माती हैं और हैडक नहीं लेना चाहती हैं। और इसकी के चलते उन्हें खड़े रहकर यात्रा करनी पड़ती है और छेडख़ानी होती है। छेडख़ानी का शिकार होने से अच्छा है आप अपनी रिजर्व सीट पर कब्जा करें और सुकूनभरी यात्रा करें।

बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं को दोस्त बनाने में फुर्ती करनी चाहिए। या तो आप ग्रुप के साथ ही बस यात्रा करें और अगर अकेले जाना पड़े, तो तुरंत दोस्त बना लें। इससे मनचलों के इरादे कमजोर होंगे। ज्यादा लोगों को देखकर उनकी हिम्मत नहीं होगी। आपकी मित्र आपके साथ नहीं हैं, तो बस में मौजूद महिलाओं के पास जाकर खड़े होने की कोशिश करें। उनसे सामान्य चीजों पर बात कर अस्थाई दोस्ती बनाएं। ऐसे अस्थाई दोस्त आपको छेड़छाड़ से भी बचाएंगे और आपका आत्मविश्वास भी बढ़ा हुआ रहेगा।

नारी की छवि हमेशा से ही छुईमुई जैसी प्रस्तुत की गई है। उसे ताकतवर नहीं दिखाया गया है। यही कारण है कि आज भी कई महिलाएं अपने आप को कमजोर समझती हैं और अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों को बर्दाश्त करती हैं। जहां तक बात बस यात्रा की है, तो छुईमुई के आवरण से बाहर निकलना ही होगा।

अक्सर देखने में आता है कि जब भी महिलाओं से छेडख़ानी होती है, तो पुरुष महिलाओं के बचाव में कम ही आते हैं। यहां तक तो ठीक है, लेकिन अधिकांश मौकों पर एक महिला दूसरी महिला का सपोर्ट नहीं करती है। कभी भी यह ख्याल मन में ना लाएं कि ‘मेरे साथ थोड़े ही हुआ है, तो मैं क्यों बोलूं’। यह सोच ना केवल आपको अकेला कर देती है, बल्कि दूसरी महिलाओं पर छेडख़ानी का रास्ता आसान कर देती है। इस खबर मेंं बताया गया कोई भी तरीका तब ही काम कर सकता है जब आप अपनी ताकत को पहचानें।

बसों के अल्लोव भी आप सुरक्षित रहने के लिए अपनाये ये उपाय

1. एक नारी को तब क्या करना चाहिये जब वह देर रात में किसी उँची इमारत की लिफ़्ट में किसी अजनबी के साथ स्वयं को अकेला पाये ?

विशेषज्ञ का कहना है: जब आप लिफ़्ट में प्रवेश करें और आपको 13 वीं मंज़िल पर जाना हो, तो अपनी मंज़िल तक के सभी बटनों को दबा दें ! कोई भी व्यक्ति उस परिस्थिति में हमला नहीं कर सकता जब लिफ़्ट प्रत्येक मंजिल पर रुकती हो !

2. जब आप घर में अकेली हों और कोई अजनबी आप पर हमला करे तो क्या करें ?
तुरन्त रसोईघर की ओर दौड़ जायें

विशेषज्ञ का कहना है: आप स्वयं ही जानती हैं कि रसोई में पिसी मिर्च या हल्दी कहाँ पर उपलब्ध है ! और कहाँ पर चक्की व प्लेट रखे हैं !यह सभी आपकी सुरक्षा के औज़ार का कार्य कर सकते हैं ! और भी नहीं तो प्लेट व बर्तनों को ज़ोर- जोर से फैंके भले ही टूटे !और चिल्लाना शुरु कर दो !स्मरण रखें कि शोरगुल ऐसे व्यक्तियों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है ! वह अपने आप को पकड़ा जाना कभी भी पसंद नहीं करेगा !

3. रात में आटो या टैक्सी से सफ़र करते समय !

विशेषज्ञ का कहना है: आटो या टैक्सी में बैठते समय उसका नं० नोट करके अपने पारिवारिक सदस्यों या मित्र को मोबाईल पर उस भाषा में विवरण से तुरन्त सूचित करें जिसको कि ड्राइवर जानता हो ! मोबाइल पर यदि कोई बात नहीं हो पा रही हो या उत्तर न भी मिल रहा हो तो भी ऐसा ही प्रदर्शित करें कि आपकी बात हो रही है व गाड़ी का विवरण आपके परिवार/ मित्र को मिल चुका है ! . इससे ड्राईवर को आभास होगा कि उसकी गाड़ी का विवरण कोई व्यक्ति जानता है और यदि कोई दुस्साहस किया गया तो वह अविलम्ब पकड़ में आ जायेगा ! इस परिस्थिति में वह आपको सुरक्षित स्थिति में आपके घर पहुँचायेगा ! जिस व्यक्ति से ख़तरा होने की आशंका थी अब वह आपकी सुरक्षा क्षात्र धान रखेगा !

4. यदि ड्राईवर गाड़ी को उस गली/रास्ते पर मोड़ दे जहाँ जाना न हो और आपको महशूस हो कि आगे ख़तरा हो सकता है – तो क्या करें ?

विशेषज्ञ का कहना है कि आप अपने पर्स के हैंडल या अपने दुपट्टा/ चुनरी का प्रयोग उसकी गर्दन पर लपेट कर अपनी तरफ़ पीछे खींचती हैं तो सैकिण्डो में उस व्यक्ति का असहाय व निर्बल हो जायेगा ! यदि आपके पास पर्स या दुपट्टा न भी हो तो भी आप न घबरायें ! आप उसकी क़मीज़ के काल़र रो पीछे से पकड़ कर खींचेंगी तो शर्ट का जो बटन लगाया हुआा है वह भी वही काम करेगा और आपको अपने बचाव का मौक़ा मिल जायेगा !

5. यदि रात में कोई आपका पीछा करता है !

विशेषज्ञ का कहना है: किसी अभी नज़दीकी खुली दुकान या घर में घुस कर उन्हें अपनी परेशानी बतायें ! यदि रात होने के कारण बन्द हों तो नज़दीक में एटीएम हो तो एटीएम बाक्स में घुस जायें क्योंकि वहाँ पर सीसीटीवी कैमरा सगे होते हैं ! पहचान उजागर होने के भय से किसी की भी आप पर वार करने की हिम्मत नहीं होगी !

आख़िरकार मानसिक रुप से ही जागरुक होना ही आपका आपके पास रहने वाला सबसे बड़ा हथियार सिद्ध होगा !

कृपया समस्त नारी शक्ति जिसका आपको ख़्याल है उन्हें न केवल बतायें बल्कि उन्हें जागरुक भी कीजिए ! अपनी नारी शक्ति की सुरक्षा के लिये ऐसा करना ! न केवल हम सभी का नैतिक उत्तरदायित्व है बल्कि कर्त्तव्य भी है !

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.