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Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। ,ताज़िया का जुलूस क्यों निकला जाता हैं।

Happy Muharram 2017 : मुहर्रम क्या हैं कब मनाया जाता हैं। क्या है ताजिया जुलूस का महत्व

मुहर्रम का इस्लामी महीना यानि इस्लामी नया साल की शुरुआत है। यह पैगंबर मुहम्मद, हज़रत इमाम हुसैन के युवा पोते की शहादत की याद उनके अनुयायियों को दिलाता है। मुहर्रम चार पवित्र महीनों में से एक है, जिनमे लड़ना कड़ाई से निषिद्ध है। इस पवित्र महीने के पहले दस दिनों में उपवास और अत्यधिक पवित्र रखा जाता है।

शिया मुस्लिम लोगों में विशेष रूप से, इन दिनों ‘दुःख के दिन’ माने जाते है। मुहर्रम माह के दसवें दिन आश्रुरा हो सकते हैं, जहां शिया मुसलमान लोगो के द्वारा रंगीन ढंग से तज़ियाओं को सजाए जाता है ( बांस और पेपर की शहीद की कब्र के प्रतिकृतियां ) और सारे शहर में ताजिए का जुलूस निकला जाता हैं। अंत में इस ताजिए को कब्रिस्तान में दफ़न किया जाता है।

क्या है ताज़िया का जुलूस 

ताज़िया मुहर्रम के दिनों में मुसलमान/ शिया लोग अपने पैगंबर मुहम्मद के पोते हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है। ताज़िया बाँस की कमाचिय़ों पर रंग-बिरंगे कागज, पन्नी आदि चिपका कर बनाया जाता है यह मकबरे के आकार का वह मंडप जिसके आगे बैठकर मुसलमान लोगो द्वारा मातम करते और मर्सिये पढ़ते हैं। ग्यारहवें दिन जलूस के साथ ले जाकर इसे ताज़िया को दफन किया जाता है।

भारत में सबसे अच्छी ताजियादारी जावरा में होती है जो की मध्यप्रदेश प्रदेश मे है । यहां ताजिये बांस से नहीं बनते है बल्कि शीशम और साग्वान कि लकड़ी से बनाते है जिस पर कांच और माइका का काम होता है । मध्यप्रदेश प्रदेश के जावरा मे 300 से ज्यादा (12 फिट) के ताज़िया बनते है।।

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