2 line shayaari : अभिमन्यु की शिकस्त में भी एक बात बड़ी थी …

🔲जिंदगी भी अजीब है, जैसे जैसे कम हो रही है,

वैसे वैसे ज्यादा पसंद आती जा रही है…🔳


🔲झूठे हैं वो जो कहते हैं हम सब मिट्टी से बने हैं,

मैं कई अपनों से वाकिफ़ हूँ जो पत्थर के बने हैं*🔳


🔲बड़ी सादगी पंसद होती है “परेशानियां”,

चुपचाप चली आती हैं,*

*”खुशियों के लिए तो महफिल लगानी पड़ती हैं🔳


🔲पहाड़ो पर बैठाकर तप कर लेना सरल है,

परिवार में रहकर धीरज बनाए रखना कठिन..! 🔳


🔲अभिमन्यु की शिकस्त में भी एक बात बड़ी थी …

“हिम्मत से हारना, पर हिम्मत मत हारना🔳

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