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राजनेताओं के यह दामाद बने कभी तारणहार कभी चिंता का सबब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े दो दामादों की तुलना की। एक ओर उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली को जम्मू-कश्मीर के प्रख्यात नेता गिरधारी लाल का अच्छा दा माद बताया। वहीं नाम लिए बगैर विपक्षी नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर तंज कसा। मीडिया में ऎसा भी कहा गया है कि पीएम भाजपा के कुछ नेताओं के दामादों पर भी वार कर रहे थे। इस बहाने देश में “राजनीतिक दामादों” का जिक्र फिर ताजा हो गया है। राजनीतिक दामादों का इतिहास देश में बेहद लंबा है, जहां किरदार के तरह-तरह के रंग देखने को मिले हैं। एक नजर ऎसे ही राजनेता-दामाद की जोडियों पर, जो कभी रहे “लो-प्रोफाइल” तो कभी बन गए “सरकार” के लिए ही मुसीबत…

उत्तर प्रदेश के बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने राजीव-सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका से शादी की। जैसे-जैसे सोनिया गांधी का कद और दबदबा बढ़ता गया, वैसे ही वाड्रा का भी विवादों से नाता जुड़ता गया। कांग्रेस सरकार में वाड्रा को गलत तरीकों से लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगता रहा है। वाड्रा के बहाने कांग्रेस के राजनीतिक विरोध भी सोनिया पर निशाना साधते रहे हैं। वाड्रा की आलीशान लाइफस्टाइल भी इन आरोपों को हवा देती रहती है। वहीं दूसरी ओर सोनिया की बिटिया प्रियंका गांधी अपनी सादगी के लिए चर्चा में रहती हैं।

फिरोज गांधी ने सन् 1942 में जवाहरलाल नेहरू की एकलौती बेटी इंदिरा से शादी की। फिरोज पत्रकार थे और सामाजिक राजनीति का हिस्सा भी। एक ओर जहां नेहरू और उनके बाद इंदिरा लगातार सक्रिय राजनीति में बढ़ती रहीं, वहीं फिरोज बेहद सादगी के साथ सामाजिक कार्यो से ही जुड़े रहे। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार में बड़ी अनियमितता को उजागर भी किया, जिसके बाद वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी को इस्तीफा देना पड़ा था।

बिहार के दिग्गज नेता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी राजलक्ष्मी की शादी तेज प्रताप यादव से हुई। तेज समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के पोते होने के साथ ही उप्र के मैनपुरी से सांसद भी हैं। तेज-राजलक्ष्मी की शादी से दोनों घराने करीब आए और राजनीति में नए समीकरण तलाशे जाने लगे। इस शादी के बाद ही राजद ने सपा की अगुवाई में जनता दल में शामिल होने का फैसला लिया।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बेटी परमजीत कौर की शादी आदेश प्रताप सिंह से हुई। आदेश के दादा प्रताप सिंह भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। प्रकाश-आदेश के बीच कभी खटपट की खबरें आती रहीं तो कभी बादल सरकार में आदेश को लाभ पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही।

फारूख अब्दुल्ला कश्मीर की राजनीति का जाना-पहचाना और पुराना चेहरा हैं। वे खुद यहां सीएम रहे, उनके पिता सीएम रहे और उनके बेटे भी सीएम बने। फारूख की बेटी सारा की शादी राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट से हुई, जो खुद समृद्ध राजनीतिक परिवार से हैं। खबरें आई कि सारा ने परिवार की मर्जी के बिना सचिन से शादी की। अब्दुल्ला परिवार से किसी ने भी उनकी शादी में शिरकत नहीं की।

पेशे से वकील गिरधारी लाल डोगरा जम्मू-कश्मीर के सर्वकालिक चेहरों में से एक रहे। वे यहां राज्य वित्त मंत्री होने के बाद संसद तक पहुंचे। डोगरा की बेटी संगीता की शादी वर्ष 1982 में वकील अरूण जेटली से हुई। डोगरा और जेटली दोनों वकील थे, मगर राजनीति में दोनों की दिशा विपरीत रही। जेटली ने भाजपा का दामन थामा और आज बतौर केंद्रीय मंत्री भारतीय राजनीति में बड़ा रसूख रखते हैं। दोनों एक-दूसरे के काम में दखलअंदाजी से हमेशा बचते रहे।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी किसी परिचय के मोहताज नहीं। उनकी मुंहबोली बिटिया नम्रता की शादी व्यावसायी रंजन भट्टाचार्य से हुई। एक ओर जहां वाजपेयी की छवि के मुरीदों में उनके विरोधी भी शामिल रहे, वहीं रंजन के कारण उनकी जमकर फजीहत हुई। रंजन द्वारा गलत तरीकों से एक व्यावसायी वर्ग विशेष को फायदा पहुंचाने, उनके पीएमओ में बढ़ते दखल और रिलायंस से नजदीकियों की आंच वाजपेयी तक भी पहुंची।

कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री और शेर-ए-कश्मीर के नाम से मशहूर शेख अब्दुल्ला का घाटी की राजनीति में बड़ा रूतबा रहा। शेख के दामाद बने लंदन स्कूल से इकोनॉमिक्स से पढ़े जीएम शाह। शाह छात्र राजनीति क े सहारे आगे बढ़े और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। आगे चलकर अब्दुल्ला के बेटे और राजनेता फारूक अब्दुल्ला और शाह के हित टकराए और दोनों परिवारों में दूरियां आ गई। शाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से अलग होकर आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस नाम से पार्टी बनाई, जिसने 2008 में चुनाव भी लड़ा।

एनटीआर के नाम से मशहूर तेलुगू अभिनेता से नेता बने एनटी रामाराव ने तेलगू देशम पार्टी बनाई और तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनकी छवि भी रौबदार राजनेता की रही। एनटीआर के दोनों दामाद एन. चंद्रबाबू नायडू और डी वेंकटेश्वर राव भी प्रदेश की राजनीति में चमके। पेशे से डॉक्टर वेंकटेश्वर राव संसद सदस्य रहे। वहीं चंद्रबाबू नायडू वर्तमान में भी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। हालांकि चंद्रबाबू पर एनटीआर को धोखा देकर आगे बढ़ने का आरोप लगा।

दक्षिण भारत के सबसे बड़े राजनीतिक घराने के मुखिया एम करूणानिधि का राजनीति में बड़ा नाम है। करूणानिधि को अपनी बेटी के कारण जितनी फजीहत झेलनी पड़ी, उनके दामाद उतने ही लाइमलाइट से दूर रहे हैं।

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