ईरान ने परमाणु समझौते के प्रति जताई प्रतिबद्धता

Iran's commitment to the nuclear deal

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने गुरुवार को कहा कि उनका देश साल 2015 में विश्व के कुछ प्रमुख देशों के साथ हुए परमाणु समझौते को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिका के हटने के बावजूद उनका देश इसे लेकर प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को अस्वीकार्य बताया।

जापान के राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके की रिपोर्ट के अनुसार जरीफ ने अपने जापानी समकक्ष तारो कोनो के साथ टोक्यो में हुई बैठक के दौरान कहा कि तेहरान तनाव को बढ़ाना नहीं चाहता मगर उनके देश को अगर कोई खतरा होता है तो उसकी ओर से भी प्रतिक्रिया कर अपना बचाव किया जाएगा।

ईरान ने ज्वाइंट कंपरिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय यूनियन के भी दस्तखत हैं। अमेरिका इस समझौते से मई 2018 में अलग हो गया था।

समाचार एजेंसी क्योडो की रिपोर्ट के अनुसार जरीफ ने इस समझौते में शामिल देशों से आग्रह किया कि अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस ऐतिहासिक समझौते का फायदा उठा सकता है तो निश्चित तौर पर इसके खिलाफ अमेरिका द्वारा फैलाए जा रहे गैर कानूनी व अराजक होने के प्रोपेगेंडा के विरोध में काम करना चाहिए।

कोनो ने जरीफ के साथ हुई अपनी बैठक के दौरान कहा कि इस समझौते को बनाए रखना न केवल द्विपक्षीय रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि मध्य पूर्व में शांति व स्थिरता तथा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु अप्रसार के लिए भी काफी आवश्यक है।

जरीफ ने बाद में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाकात की जिन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ रहे तनाव पर अपनी चिता जाहिर की और टोक्यो द्वारा भविष्य में ईरान के साथ बेहतर द्विपक्षीय रिश्ते कायम करने का भरोसा भी जताया।

जरीफ का दौरा जापान व ईरान के द्विपक्षीय रिश्तों के 90 साल पूरा होने के अवसर पर हुआ।