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डॉक्‍टरों को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका

भारतीय चिकित्सक परिषद के संशोधित नियमों के मुताबिक ही सेवारत डॉक्टरों को स्नात्कोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश मिलेगा
उच्चतम न्यायालय ने सरकारी डॉक्टरों की एक एसोसिएशन को किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार को भारतीय चिकित्सक परिषद के संशोधित नियमों के मुताबिक सेवारत डॉक्टरों को स्नात्कोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश देना होगा। तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन और अन्य ने एमसीआई के स्नात्तकोत्तर के चिकित्सा शिक्षा नियमों के दो संशोधित प्रावधानों पर निशाना साधते हुए याचिका दायर की है। इन प्रावधानों के तहत स्नात्तकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सरकारी डॉक्टरों को आरक्षण या प्रोत्साहन अंक हासिल करने के लिए या तो सेवारत होना चाहिये या फिर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में काम करने वाला होना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि स्नात्तकोत्तर में प्रवेश के लिए सेवारत सरकारी डॉक्टरों और सुदूरवर्ती या दुर्गम ग्रामीण इलाकों में काम कर रहे डॉक्टरों को प्रोत्साहन अंक देने के बजाए प्रदेश सरकार को अपनी खुद की आरक्षण नीति जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा , ‘हम इस अनुरोध को सहमति देने में असमर्थ हैं।’ बेंच ने स्‍पष्‍ट किया कि सेवारत डॉक्टरों को स्नात्कोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भारतीय चिकित्सक परिषद के संशोधित नियमों का पालन करना ही होगा।

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