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गूगल काम कर रहा इन भविष्य की तकनीकों पर

आपको शायद इस बात पर यकीन नहीं आए, लेकिन यह सच है। गूगल एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है जिससे आप बिना रॉकेट में बैठे अंतरिक्ष में पहुंच जाएंगे। गूगल के इस प्रोजेक्ट का नाम है एलेवेटर टू स्पेस यानि कि अंतरिक्ष पर जाने की सीढिय़ां। इस प्रोजेक्ट के तहत पृथ्वी से अंतरिक्ष तक एक महाशक्तिशाली केबल लगाई जाएगी। इस केबल के सहारे एक कॉकपिट जैसे बॉक्स में बैठकर अंतरिक्ष तक पहुंचा जा सकेगा। बताया जाता है कि गूगल की एक्स लैब इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। हालांकि इसके निकट भविष्य में आने की उम्मीदें कम ही हैं।

गूगल सर्च इंजन, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन पर ही नहीं, कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है जो निकट भविष्य में आपके काम के साबित होंगे। इनमें से एक गूगल रोबोट्स। न्यूयार्क टाइम्स की खबर के मुताबिक गूगल एक गुप्त स्थान पर एक प्रोजेक्ट चला रहा है जिसका नाम है गूगल एक्स। इस गुप्त स्थान पर एक प्रयोगशाला भी है जिसमें केवल रोबोट्स का ही राज चलता है। गूगल इस प्रयोगशाला में ऐसे रोबोट्स बनाने पर काम रहा है जो आपके घर और ऑफिस का काम कर सकें। चाय बनाने, प्रिंट आउट लाने और फ्रिज में से पानी की बोतल पकड़ाने जैसे काम ये रोबोट्स करेंगे। अगर ऐसा होता है, तो मानव जीवन और भी आसान हो जाएगा।

गूगल का एंड्रायड एट होम प्लेटफार्म पहले से ही लाइट बल्ब चालू/बंद करने, घर के दरवाजे बंद करने/खोलने, ऑटोमैटिक स्विच ऑन और ऑफ जैसे काम स्मार्टफोन के जरिए करने की सेवा दे रहा है। इसके लिए आपको अपने मोबाइल पर एक एप डाउनलोड कर स्मार्टर किट घर में लगाना होता है और आप मोबाइल से कर सकते हैं इन चीजों को कंट्रोल। अब इसके बाद गूगल की नजरें इससे भी आगे है। हाल ही में सम्पन्न गूगल की डवलेपर्स कांफ्रेंस में गूगल ने ओपन एसेसरी डवलेपमेंट किट फॉर एंड्रायॅड को लांच किया। गूगल के इस मिशन का उद्देश्य हर छोटे गैजेट से लेकर बड़ी मशीनों को आपस में कनेक्ट करना है जिससे हर चीज का कंट्रोल आपके हाथों में आ जाए।

गूगल ने दुर्घटनाओं को रोकने और ड्राइवर के बिना कार चलाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। कई देशों मेें गूगल की ड्राइवरलैस कार की टेस्टिंग भी की जा रही है। जल्द ही गूगल की ड्राइवरलैस कार सड़कों पर दौड़ती दिखाई देगी। इस बिना ड्राइवर वाली कार में आप बिना सड़क की रेलमपेल की चिंता किए बिना अपना काम निपटा सकते हैं।

गूगल की रिसर्च टीम ने करीब-करीब एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे आप केवल इशारों से मोबाइल फोन को यूज कर पाएंगे। प्रोजेक्ट शोली सिस्टम नाम से इस मिशन के तहत आपकी अंगुलियों की हलचल को सूक्ष्मचिप्स में लगे राडार से पहचाना जा सकेगा और आपका गैजेट इशारों पर नाचने लगेगा। यह बेहद सूक्ष्म चिप किसी भी डिवाइस में लगाई जा सकेगी। आप इस चिप को अपने कम्प्यूटर, मोबाइल फोन, कार, खिलौनों में लगा सकेंगे। जैसे ही यह चिप जिस किसी डिवाइस में आप लगाएंगे, वह आपके इशारों पर आपकी आज्ञा का पालन करेगा।

गूगल के नॉनप्रोफिट प्रोजेक्ट्स में से एक है क्लिन एनर्जी। गूगल आर्ग के इस प्रोजेक्ट का मकसद कोयले से बनने वाली बिजली पर होने वाले खर्च और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाना है। इसके लिए गूगल वायु, सौरऊर्जा और जियोथर्मल पॉवर से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह एनर्जी पूरी तरह से रिन्यूएबेल होगी।

गूगल इंटरनेट तकनीक के अलावा सस्ती और असरदार दवाईयां बनाने में भी रूचि दिखा रहा है। गूगल ने एडीमेब नाम से एक निवेश किया हुआ है जिसमें नई एंटीबॉडीज दवाईयां खोजने का काम चल रहा है। इसके अलावा गूगल की एक और कम्पनी आईपीरीएन सेलुलर प्रोग्रामिंग नाम से एक तकनीक इजाद करने में लगी है जिसके तहत ऐसी दवा बनाई जाएगी जो बीमारियों का स्वरूप बदलकर उनका खात्मा करेगी।

एंटीबॉयटिक दवाईयां बनाने के अलावा गूगल कैंसर से निजात दिलाने वाली नई प्रभावी एप्रोच विकसित करने में लगा है। फाउंडेशन मेडिसिन नाम के प्रोजेक्ट में गूगल निवेश कर रहा है। इस प्रोजेक्ट मेेें गूगल जियोमिक और मोलिक्यूर डाटा से नई कैंसर केयर प्रणाली विकसित करेगा।

गूगल ने प्रोजेक्ट लून का कुछ देशों में टेस्ट कर लिया है। गूगल के इस हाई-फ्लाइंग बैलून का उद्देश्य 5 बिलियन लोगों तक आसानी से इंटरनेट को पहुंचाना है। गूगल के इस प्रोजेक्ट का नाम ‘लून’ है। गूगल ‘बैलून बेस्ड इंटरनेट सेवा’ जल्द ही भारत में भी आने वाली है। गूगल का ये प्रोजेक्ट 2016 तक शुरू होगा। गूगल प्रोजेक्ट ‘लून’ के बैलून हवा में 20 किमी तक जाकर यूजर्स के एक छोटे से ग्रुप को इंटरनेट उपलब्ध कराएंगे। एलगोरिथ्म साफ्टवेयर के माध्यम से ‘गूगल बैलून’को तूफानी स्थिति में भी एक स्थान पर रोका जा सकता है।

अगर अगली बार गूगल आपको यह बताए कि कुछ दिनों बाद ही साइबर World War छिड़ जाएगा, तो आश्चर्य ना करें। जी हां, गूगल भविष्य बताने वाली तकनीक पर काम कर रहा है। इसके लिए गूगल ने रिकार्डडेड फ्यूचर नाम की कम्पनी में निवेश किया हुआ है। यह कम्पनी लाखों ओपन वेब सोर्सेज से डाटा को अपने आप कलेक्ट करती है और इन्हें सही क्रम में अपने पास सहेज कर रखती है। कम्पनी का डवलेप किया हुआ खास टूल किसी भी भाषा को पढऩे मेें सक्षम है। इस डाटा को पूरी तरह से जांच परख कर निष्कर्ष तैयार किए जाते हैं।

गूगल जिस भी काम में हाथ डालता है उसे परफेक्ट और शानदार बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। इसी क्रम में गूगल ने एक फाइबर केबल वाला इंटरनेट डवलेप किया है। ब्रॉडबैंड श्रेणी का यह इंटरनेट फिलहाल अमरीका में उपलब्ध करवाया जा रहा है। गूगल फाइबर नाम के इस इंटरनेट की स्पीड 1000 एमबीपीएस है।

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