Times Bull
News in Hindi

आज भी चढ़ाई जाती है मासूमों की बलि, देवी को खुश करने के लिए किया जाता है ऐसा खौफनाक काम

दुनिया आज भले ही बहुत आगे बढ़ चुकी है, लेकिन परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर आज भी लोग कुरीतियों का पालन करते आ रहे हैं। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के लोग भी इन्हें मानने से कतराते नहीं है। अब आप इस संदर्भ में कुंबा भरानी नाम के इस त्यौहार को ही देख लीजिए जहां अपनी मनोकामना पूरी करने और भगवान को खुश करने के लिए मासूम बच्चों की बलि चढ़ाई जाती है।

जी हां, केरल के अलाप्पुझा में चेट्टीकुलांगरा देवी मंदिर में हर साल मनाए जाने वाले यहां दी जाती है आज भी नरबलि नामक इस उत्सव में अमीर परिवार के लोग गरीबों को कुछ पैसे देकर उनसे बच्चों को खरीदते हैं और अपने स्वार्थ के लिए इनकी बलि चढ़ाते हैं। करीब 250 साल पुरानी इस परंपरा में पहले लोग अपने ही बच्चों की बलि चढ़ाते थे हालांकि वक्त के साथ अब उच्च वर्ग के लोग निम्न वर्ग के लोगों को पैसे देकर उनके बच्चों की बलि चढ़ाते हैं।

महज 8 से 12 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों को मात्र 50 हजार रुपये में खरीदा जाता है। तत्काल पैसा कमाने के चक्कर में लोग अपने बच्चों को बेचने के लिए तैयार हो जाते है

चूरल मुरियल के नाम से मनाए जाने वाली यह प्रथा कुठियट्टम नामक एक प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। इसमें देवी भद्रकाली की पूजा की जाती है।

सबसे पहले गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को अमीर परिवारों द्वारा अडॉप्ट कर लिया जाता है। इसके बाद अगले 7-10 दिनों तक ये बच्चे पूजा इत्यादि करते हैं।

इस दौरान इन घरों में भोज के साथ-साथ इन लड़कों को काफी बारीकी के साथ नृत्य कला का प्रशिक्षण दिया जाता है।‘भरानी’ के दिन लड़कों को कागज के मुकुट और केले के पत्तों से राजा की तरह सजाया जाता है।

 

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.