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रंगपंचमी के दिन इन उपायों का करें पालन, भोलेनाथ की कृपा जमकर बरसेगी आप पर

होली के बाद आने वाली पंचमी को रंगपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। पहले के ज़माने में होली के त्यौहार का पालन कई दिनों तक किया जाता था, जिसमें अंतिम दिन को रंगपंचमी के रूप में मनाया जाता था। कई दिनों तक होली का त्यौहार जारी रहता था और अंतिम दिन रंगपंचमी के बाद कोई भी रंग नहीं खेलता था।

रंगपंचमी हर साल चैत्र कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। विभिन्न रंगों के प्रति आकर्षित देवी-देवताओं को उनके पसंद के अनुसार रंगों को चढ़ाया जाता है और इसके साथ ही रंगपंचमी के पर्व पर वायुमंडल में उड़ाए जाने वाले विभिन्न रंगों के रंग कणों की ओर विभिन्न देवताओं के तत्व आकर्षित होते हैं।

यदि कोई व्यक्ति रंगपंचमी के दिन शिव या फिर शक्ति की आराधना करें तो उसे समस्त परेशानियों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शान्ति मिलती है। इस दिन घर की पूर्व दिशा में लाल स्वच्छ वस्त्र बिछाकर शिव और उनके परिवार के चित्र को स्थापित करें और इसके बाद चमेली के तेल का दीपकर जलाकर, लाल फूलों को चढ़ाएं। इसके बाद गुग्गुल के धूप जलाएं और सिंदूर और लाल चंदन, अबीर चित्र पर लगाएं और तत्पश्चात गुड़ से बनी हुई रेवडिय़ों का भोग लगाकर एक माला से ‘ह्रीं हरित्याय नम: शिवाय ह्रीं ॥’ मंत्र का जाप करें।

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