यहां जानें कैसे और क्यों पैदा होते हैं किन्नर

दुनियाभर में थर्ड जेंडर के अधिकारों को लेकर जंग छि​ड़ी हुई है। एलजीबीटी के अधिकारों को जहां कुछ लोग सही मानते हैं, वहीं कुछ लोग इसे ईश्वर के बनाए नियमों के खिलाफ भी मानते हैं। हालांकि यह बहस का​ विषय है, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर किन्नरों का जन्म कैसे और क्यों होता है।

बच्चे का जन्म हो या घर में शादी हो, किन्नर दरवाजे पर आकर अपना हिस्सा लेकर ही जाते हैं। जहां कुछ लोग इन्हें बुरा मानते हैं, तो वहीं कुछ लोग डरते भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर किन्नर की बददुआ लग जाए तो सब खत्म हो जाता है, वहीं अगर ये किसी पर मेहरबान हो जाएं तो उस व्यक्ति की किस्मत का ताला खुल जाता है।

पहले हम आपको धार्मिक दृष्टिकोण से बताते हैं कि आखिर किन्नर का जन्म क्यों और कब होता है। धार्मिकता के अनुसार जन्म के समय कुंडली में शनि छठे या बाहरवें घर में, कुंभ या मीन राशि पर हों और ऐसे में कुई शुभ ग्रह शनि को नहीं देख रहा हो तो ​व्यक्ति में प्रजनन क्षमता की कमी हो जाती है और व्यक्ति किन्नर हो सकता है। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ आदि राशि में मंगल हो और इसकी दृष्टि लग्न स्थान यानी पहले घर या पहले घर के स्वामी पर हो तो व्यक्ति में अविकसित जननांग हो सकता है।

हालांकि विज्ञान कुछ और ही कहता है। वीर्य की अधिकता होने से पुरुष संतान और रक्त की अधिकता से कन्या संतान की प्राप्ति होती है, लेकिन जब गर्भ धारण में रक्त और रज की मात्रा बराबर हो जाती है तो एक किन्नर जन्म लेता है। तो अब आप जान गए होंगे कि आखिर किन्नर कैसे पैदा होते हैं।

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