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साल बाद लहलहा रहे हैं नील कुरिंजी के फूल 
आजादी के पावन पर्व की आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं। आज देश आत्मविश्वास से भरा हुआ है। सपनों को संकल्प के साथ, परिश्रम की पराकाष्ठा करके देश नई ऊंचाइयों को पार कर रहा है। आज का सूरज नया उमंग, नया उत्साह लेकर आया है। हमारे देश में 12 साल में एक बार नील कुरिंजी का फूल उगता है। इस साल दक्षिण के नीलगिरी पहाड़ियों पर नील कुरुंजी का फूल जैसे मानों तिरंगे झंडे के अशोक चक्र की तरह लहलहा रहा है। 

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बेटियों ने सात समंदर पार किया 
आजादी का यह पर्व हम तब मना रहे हैं जब हमारी बेटियां, उतराखंड, हिमाचल, मणिपुर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश की बेटियों ने सात समंदर पार किया और सातों समंदर को तिरंगे रंग से रंगकर लौट आईं। एवरेस्ट विजयी तो बहुत हुए। हमारे अनेक वीरों और बेटियों ने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया है। आजादी के इस पर्व पर याद करूंगा कि आदिवासी इलाकों के हमारे बच्चों ने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इसकी शान और बढ़ा दी है। 

संसद सत्र में सामाजिक न्याय के लिए काम 
अभी-अभी लोकसभा और राज्यसभा के सत्र पूरे हुए हैं। यह सत्र बहुत अच्छे ढंग से चला और संसद का यह सत्र पूरी तरह सामाजिक न्याय को समर्पित था। सोषित, वंचितों और महिलाओं की हकों की रक्षा के लिए संवेदनशीलता के साथ समाजिक न्याय को मजबूत किया। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर पिछड़ों-अति पिछड़ों के हकों की रक्षा का प्रयास किया। 

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सकारात्मक माहौल 
हमारे देश में उन खबरों ने देश में एक चेतना लाई है कि भारत विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। ऐसे सकारात्मक माहौल में हम आजादी का पर्व मना रहे हैं। देश को आजादी दिलाने के लिए बापू के नेतृत्व में लाखों लोगों ने जवानी जेलों में गुजार दी। बहुत से लोगों ने आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया। मैं उन वीरों को सलाम करता हूं। इस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए सैनिक दिन रात देश की सेवा में लगे रहते हैं। मैं अर्धसैनिक बलों और पुलिसबल को लाल किले की प्राचीर से शत-शत नमन करता हूं। 

इन दिनों देश के कोने-कोने से अच्छी बर्षा के साथ बाढ़ की खबरें आ रही हैं। अतिवर्षा की वजह से जिन्हें मुसीबतें झेलनी पड़ीं उनके लिए देश खड़ा है। जिन्होंने अपनों को खोया है उनके दुख में मैं सहभागी हूं। 

अगले साल जलियावाला बाग की घटना को 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। मैं उन सभी वीरों को नमन करता हूं। 

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संविधान में सभी के लिए समान अवसर 
ये आजादी ऐसे ही नहीं मिली है। पूज्य बापू के नेतृत्व में नौजवानों, सत्याग्रहियों ने जवानी जेलों में काटकर हमें आजादी दिलाई। उन्होंने कुछ सपने भी संजोए थे। आजादी से पहले तमिलनाडु के कवि सुब्रमण्यन भारती ने कहा था ‘भारत दुनिया को सभी बंधनों से मुक्ति पाने का रास्ता दिखाएगा।’ इन महापुरुषों के सपनों को पूरा करने के लिए आजादी के बाद बाबा साहेब आंबेडकर के नेतृत्व में समावेशी संविधान बनाया। इसमें समाज के हर तबके को समान रूप से अवसर दिया गया है। 

दुनिया में भारत की धमक हो 
हमारा संविधान कहता है कि गरीबों को न्याय मिले। जन-जन को आगे बढ़ने का मौका मिले। निम्न मध्य वर्ग, मध्य वर्ग को और उच्च वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिले। हमारे बुजुर्ग हमारे दिव्यांग, महिलाएं, दलित, पिछड़े, सोषित, आदिवासी को आगे बढ़ने का मौका मिले। हम चाहते हैं कि दुनिया में भारत साख और धमक हो। 

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मैंने पहले भी टीम इंडिया का सपना आपके सामने रखा है। जब जन-जन देश को आगे बढ़ाने के लिए जुड़ते हैं, सवा सौ करोड़ सपने, संकल्प और पुरुसार्थ सही दिशा में बढ़ते हैं तो क्या नहीं हो सकता। मैं नम्रता के साथ कहना चाहूंगा कि 2014 में सवा सौ करोड़ देशवासियों ने सिर्फ सरकार नहीं बनाई, देश बनाने के लिए जुटे भी हैं और जुटे रहेंगे। यह हमारे देश की ताकत है। 

आज श्री अरबिंदो का जन्मदिन भी है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्र और मातृभूमि क्या है। यह कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है। ना ही यह सिर्फ संबोधन है। ना ही यह कोई कोरी कल्पना है। राष्ट्र एक विशाल शक्ति है। जो असंख्य छोटी-छोटी इकाइयों को संगठित ऊर्जा का मूर्त रूप देती है। श्री अरबिंद की यह कल्पना ही आज देश को आगे ले जाने में हर नागरिक को जोड़ रही है। 

2013 से तुलना 
हम आगे जा रहे हैं यह तब तक पता नहीं चलता है, जब तक हम यह ना देखें कि कहां से चले थे। 2013 की रफ्तार को यदि हम आधार मान लें तो पिछले चार साल साल में हुए काम का लेखा-जोखा लें तो आपको अचरज होगा। शौचालय को ही लें। 2013 में जो रफ्तार थी उससे 100 फीसदी शौचलय निर्माण दशकों लग जाते। बिजली पहुंचाने में उस गति से 1-2 दशक और लगते। एलपीजी गैस कनेक्शन 2013 की रफ्तार से देते तो काम को पूरा करने में 100 साल भी ज्यादा लगता। यदि हम 2013 की रफ्तार से ऑपटिकल फाइबर बिछाते तो गांवों में पहुंचाने में पीढ़ियां लग जातीं। 

बदल रहा है देश 
देश की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बहुंत हैं। उन्हें पूरा करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और समाज को साथ काम करना है। आज देश में बदलाव आया है। देश वही है, धरती वही है। हवा, आसमान वही हैं। अधिकारी वही हैं, फाइलें वहीं हैं, लेकिन 4 साल में देश बदलाव महसूस कर रहा है। देश में नई चेतना नई ऊंर्जा है। आज देश दोगुने रफ्तार से हाइवे बना रहा है चार गुना नए मकान बना रहा है। देश रेकॉर्ड अन्न के साथ रेकॉर्ड मोबाइल बना रहा है। रेकॉर्ड ट्रैक्टर की बिक्री हो रही है तो आजादी के बाद सर्वाधिक हवाई जहाज खरीदारी हो रही है। देश में नए आईआईटी, नए आईआईएम, नए एम्स बना रहा है। टायर-2 टायर थ्री सिटी में स्टार्टअप्स की बाढ़ है। सरकार एक तरफ डिजिटल इंडिया के लिए काम हो रहा है तो उतने ही लगाव के साथ दिव्यांगों के लिए काम कर रहा ह

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