एक बटन से खत्म हो जाएगी दुनिया, जानिए एटम बमों की रेस में कौन है आगे

उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने शनिवार को ही अमरीका से दो-दो हाथ करने की ताल ठोकी है। उत्तर कोरिया 9 अक्टूबर, 2006 को अपना पहला परमाणु परीक्षण कर अब तक जुटाए एटमी हथियारों के जखीरे के बूते ही अमरीका को आंखें दिखा रहा है। आज इतने परमाणु हथियार हैं कि दुनिया एक नहीं कई बार तबाह हो सकती है। हाल में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि हमले की स्थिति में वे परमाणु विकल्प का बेधड़क इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ भी धमकी दे चुके हैं कि उनके परमाणु हथियार शोपीस नहीं हैं। इशारा भारत पर था। जबकि दुनिया को पता है कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। आज दुनिया परमाणु हथियारों के ट्रिगर लाल बटन के तले है।

किसके पास रहता है ये लाल बटन परमाणु हथियारों को दागने की शक्ति राष्ट्राध्यक्षों, सेना प्रमुखों अथवा सम्मिलित रूप से होती है। आम प्रचलन में इस लाल बटन यानी खतरे का बटन क हते हैं। जो तबाही का कारण बन सकता है।

रूस का परमाणु बम

राष्ट्रपति स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर फोर्स (एसएनएफ ) से जुड़े रहते हैं। 1980 में यूरी आंद्रापोव के शासनकाल में इस सिस्टम की शुरुआत हुई। गोर्बाचोव ने इसे सीक्रेट कम्युनिकेशन कोड सिस्टम कैवकाज से जोड़ा था। क हते हैं वर्ष 1995 के नार्वे रॉकेट प्रकरण के समय पहली बार शेगेट को गलती से एक्टिवेट कि या गया था। शेगेट रूसी राष्ट्रपति के पास रहने वाले इस न्यूक्लियर ब्रीफकेस में ऑटोमैटिक सिस्टम होते हैं। इसके जरिए कैवकाज कोड से आला अफ सरों को ऑर्डर देते हैं।

चाइना का परमाणु बम

पूर्वी यूरोप से मध्य एशिया तक परमाणु ब्लैक मार्केट फैला हुआ है। इसका मुख्य कारण है 90 के दशक में सोवियत संघ का विघटन। पूर्व सोवियत गणराज्यों में क्रेमलिन ने परमाणु ठिकाने बनाए हुए थे। विघटन के बाद परमाणु तकनीक का ट्रांसफर रूस को हो गया। लेकिन तस्करों ने परमाणु तकनीक में तब तक सेंध लगा ली थी। चोरी-छिपे ये तकनीक पाकिस्तान सरीखे देशों के हाथ भी लग गई। अब भी परमाणु सामग्री को तस्करों ने अलग-अलग ठिकानों पर छिपा रखा है। ऊंचे दामों पर बेचते हैं।

काला सागर है अड्डा

रूस में काला सागर का क्षेत्र परमाणु सामग्री की तस्करी का अड्डा है। यहां की भौगोलिक स्थिति तस्करों के लिए मुफीद है। हथियारों में इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम और प्लूटोनियम यहां उपलब्ध है।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम

अक्सर परमाणु सामग्री का सौदा पूर्वी यूरोप के देशों में होता है। मोटी रकम के लालच में कई माफिया इसमें सक्रिय हैं। हाल में एफबीआई ने पूर्वी यूरोप के माल्डोवा में ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश किया है।

आतंकी हैं खरीदार

परमाणु सामग्री के खरीदार आतंकी संगठन हैं। पहले अलकायदा और अब आईएस इसकी जुगाड़ में है। जानकार कहते हैं आतंकी भले ही उन्नत बम न बना पाएं, लेकिन वे क्रूड परमाणु बम बना सकते हैं।

पाकिस्तान का परमाणु बम

पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन के पास हमसे ज्यादा परमाणु अथवा एटमी हथियार हैं। ये हमारे लिए चिंता का कारण बन सकता है। बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट डेटा की वर्ष 2015 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत और पाकिस्तान के पास वर्ष 1997 तक एक भी परमाणु हथियार नहीं था। वर्ष 1998 में जब दोनों देशों ने परमाणु परीक्षण किया तो भारत के पास 3 और पाकिस्तान के पास 1 परमाणु हथियार था। वर्ष 1999 में दोनों देशों के पास 8-8 परमाणु हथियार थे। वर्ष 2000 में पाकिस्तान हमसे आगे निकल गया। उस समय भारत के पास 13 तो पाक के पास 14 परमाणु हथियार हो गए। चीन के पास भी वर्तमान में हमसे ज्यादा यानी 250 परमाणु हथियार हैं।

अमरीका का परमाणु बम

अमरीकी राष्ट्रपति जॉन.एफ कैनेडी ने 1962 में परमिसिव एक्शन लिंक (पीएएल) विक सित किया। इसके द्वारा सभी परमाणु हथियारों को पीएएल से जोड़ा गया। जिससे अनाधिकृत रूप से हथियार दागे नहीं जा सकें। कहते हैं वर्ष 1977 तक अमरीका का पीएएल कोड बहुत ही आसान था। ये कोड मात्र 00000000 था। राष्ट्रपति के साथ-साथ राष्ट्रपति के सैन्य सहायक के पास हमेशा रहने वाले चमड़े के बैग को न्यूक्लियर फुटबॉल कहते हैं। इसमें न्यूक्लियर कोड होता है।

ब्रिटेन का परमाणु बम

प्रधानमंत्री अथवा उनकी ओर से नामित ही ब्रिटेन के परमाणु हथियारों को दागने की इजाजत दे सकता है। इसके लिए ट्राइडेंट प्रोग्राम बना हुआ है। इससे जुड़ी क्लाइड बेस की परमाणु पनडुब्बी हमेशा गश्ती रहती है। बताया जाता है कि सेन्ट्रल लंदन के व्हाइट हॉल में स्थित पिंडार बंकर से परमाणु हथियारों की लॉचिंग का क मांड ट्राइडेंट को दे सकते हैं।

इजराइल का परमाणु बम

अमरीका: 4,760 पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1945 में किया था। अब तक कुल 1054 परीक्षण कर चुका है। वर्ष 1992 में आखिरी बार परीक्षण किया था।
रूस: 4,300 पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1949 में किया था। अब तक कुल 715 परीक्षण कर चुका है। वर्ष 1990 में आखिरी बार परीक्षण किया था।
फ्रांस: 300 पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1960 में किया था। अब तक कुल 210 परीक्षण कर चुका है। वर्ष 1996 में आखिरी बार परीक्षण किया था।
चीन: 250 पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1964 में किया था। अब तक कुल 45 परीक्षण कर चुका है। वर्ष 1996 में आखिरी बार परीक्षण किया था।
ब्रिटेन: 225 पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1952 में किया था। अब तक कुल 45 परीक्षण कर चुका है। वर्ष 1991 में आखिरी बार परीक्षण किया था।

भारत का परमाणु बम

भारत : भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1974 में किया था। अब तक कुल 6 परीक्षण कर चुका है। आखिरी बार वर्ष 1998 में परीक्षण किया। कुल हथियार: 90-110
पाकिस्तान : पाकिस्तान ने पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1998 में किया था। अब तक कुल 6 परीक्षण कर चुका है। पाक ने वर्ष 1998 के बाद टेस्ट नहीं किया। कुल हथियार: 90-120
इजरायल : इजरायल ने अब तक परमाणु परीक्षण की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं की है। माना जाता है कि वर्ष 1979 में पहला परीक्षण किया था। कुल हथियार: 80-400
उत्तर कोरिया : पहला परीक्षण वर्ष 2006 में किया था। अब तक कुल 3 परीक्षण कर चुका है। आखिरी बार वर्ष 2013 में परमाणु परीक्षण किया था। कुल हथियार: 10

अमरीका के पेंटागन में रखा परमाणु बम

इन्होंने खत्म किए परमाणु हथियार- दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, यूक्रेन और कजाकिस्तान। ईरान पर आशंका- ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम चला रहा था। नई संधि से आशंका टली। वर्ष 2020 तक भारत के पास है परिष्कृत यूरेनियम 0.9 टन से 2.4 टन, वेपन ग्रेड प्लूटोनियम 0.18 टन से 0.54 टन। पाकिस्तान के पास है परिष्कृत यूरेनियम 1.2 टन से 3.0 टन, वेपन ग्रेड प्लूटोनियम 0.05 टन से 0.15 टन।

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