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जानें, भारत में बनी दवाओं को अमेरिकी बाजार से क्‍यों हटाना पड़ा

फाइजर इंक ने अमेरिकी बाजार से पाइपेरासिलिन और टाजोबैक्टम एंटी-बायोटिक की 18 लाख से ज्यादा शीशियां वापस मंगा ली हैं
भारत पूरी दुनिया की दवा कंपनियों के लिए एक बड़े उत्‍पादन स्‍थल के रूप में उभरा है। दुनिया के कम विकसित या विकासशील देशों में भारत सबसे बड़े दवा निर्यातक के रूप में अपनी जगह बना चुका है। दवा उत्‍पादन की भारत की क्षमताओं को देखते हुए ही दुनिया की बड़ी बड़ी दवा कंपनियों ने यहां अपना उत्‍पादन संयंत्र लगाया है और अमेरिका जैसे विकसित देश में भी भारत से कई दवाओं का निर्यात किया जाता है। मगर इस बार भारत की साख पर बट्टा लग गया है।

दरअसल दुनिया की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में शामिल फाइजर इंक ने अमेरिकी बाजार से पाइपेरासिलिन और टाजोबैक्टम एंटी-बायोटिक की 18 लाख से ज्यादा शीशियां वापस मंगा ली हैं। इन सभी शीशियों का निर्माण भारत में हुआ है। दरअसल इन दवाओं में अशुद्ध‍ि की मात्रा ज्‍यादा पाई गई है। गौरतलब है कि अमेरिका में दवाओं और खाद्य पदार्थों को लेकर नियम बेहद सख्‍त हैं और वहां की नियामक एजेंसियों नियमों का सख्‍ती से पालन सुनिश्चित भी करती हैं। अमेरिका के खाद्य एवं दवा नियामक (यूएसएफडीए) ने एक अधिसूचना जारी करके कहा कि यह दवाएं फाइजर की सहयोगी होसपिरा हेल्थकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बनायी हैं और इनमें अशुद्धि की मात्रा अधिक पायी गई है जिससे लोगों की शक्ति में कमी आ सकती है। ये दवाएं चेन्नई स्थित इरुंगट्टूकोटई संयंत्र में बनी हैं जिन्हें अमेरिका में बेचने के लिए अपोटेक्स कारप्टो के लिए बनाया गया था। जाहिर है कि दवाएं वापस लेने से कंपनी की साख के साथ-साथ भारत के नाम पर भी धब्‍बा लगा है और इसे सही करने के लिए कंपनी को ही कदम उठाना होगा।

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