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CGHS के तहत मुफ्त इलाज सीमा 10 लाख रुपये बढ़ी, कर्मचारियों को बढ़ी राहत

CGHS Treatment Payment Limit

केंद्र सरकार ने लाखों कर्मचारियों को राहत पहुंचाने वाला जरूरी फैसला लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Central Government Health Scheme के तहत चिकित्सा भुगतान की सीमा को दोगुना कर दिया है। अब गंभीर बीमारी या बड़ी सर्जरी की स्थिति में केंद्रीय कर्मचारी 10 लाख रुपये तक के इलाज का खर्च अपने विभाग प्रमुख की मंजूरी से ही प्राप्त कर सकेंगे।

Key Takeaways

Quick Read
  • महंगे अस्पतालों में इलाज होगा आसान
  • प्रशासनिक प्रक्रिया में आएगी तेजी

यह बदलाव उन कर्मचारियों के लिए खास तौर से उपयोगी साबित होगा, जिन्हें अब तक महंगे इलाज के भुगतान के लिए फंड की मंजूरी के काफी लंबे समय तक कागजी करवाई से गुजरना पड़ता था। नए सिस्टम से यह प्रोसेस तेज होगा और इलाज में देरी नहीं होगी।

10 साल बाद बढ़ाई गई विभाग प्रमुखों की शक्तियां

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभाग प्रमुखों की वित्तीय स्वीकृति सीमा में यह बड़ा संशोधन लगभग दस साल बाद किया गया है। इससे पहले नवंबर 2016 में सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई थी। अब इसे बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अगर किसी कर्मचारी के इलाज का कुल खर्च 10 लाख रुपये तक है, तो उसे मंत्रालय स्तर की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि इलाज खर्च इस सीमा से ज्यादा होता है, तो संबंधित मामले को केंद्र सरकार द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति के लिए भेजना जरूरी रहेगा।

महंगे अस्पतालों में इलाज होगा आसान

सीजीएचएस से जुड़े वेलनेस सेंटर कई बार मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े निजी अस्पतालों में रेफर करते हैं। उदाहरण के तौर पर Apollo Hospitals, Max Healthcare और Fortis Healthcare जैसे मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है।

इन अस्पतालों में सर्जरी या लंबी अवधि के इलाज का खर्च अक्सर पांच लाख रुपये से ज्यादा हो जाता था। पुरानी सीमा के कारण कर्मचारियों को अतिरिक्त स्वीकृति के लिए समय और कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब सीमा बढ़ने से अस्पताल में भर्ती होने और भुगतान सुनिश्चित कराने की प्रक्रिया ज्यादा सहज हो जाएगी।

पेंशनभोगियों के लिए साफ दिशा-निर्देश का इंतजार

हालांकि यह आदेश फिलहाल कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू माना जा रहा है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अभी अलग से कोई साफ दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है।

बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ती हैं और इलाज का खर्च पेंशनभोगियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही उनके लिए भी समान राहत की घोषणा कर सकती है।

प्रशासनिक प्रक्रिया में आएगी तेजी

इस फैसला का एक जरूरी पहलू यह है कि विभाग प्रमुखों को अधिक वित्तीय अधिकार मिलने से फाइलों का लंबा प्रोसेस कम होगा। पहले जहां मामलों को मंत्रालय स्तर तक भेजना पड़ता था, अब अधिकांश गंभीर मामलों का निपटारा विभाग स्तर पर ही हो सकेगा। इससे कर्मचारियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी और इलाज में देरी की आशंका घटेगी।

सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि भविष्य में भी कर्मचारी हितों से जुड़े निर्णयों में सुधार की गुंजाइश बनी रहेगी।

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Rohit P

My name is Rohit Pal, and I have been working in the field of journalism for the past five years. During this time, I have written on a variety of topics, including business, automobiles, technology, and politics. I have worked with several major organizations and am currently working with Timesbull.