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Muharram 2017 : मोहर्रम के बारे में ये पांच बातें शायद ही जानते हों आप

मोहर्रम 2017 : क्या है ताज़िया का जुलूस, क्यों मनाया जाता है मुहर्रम

2017 : हमने गैंग्स आॅफ वासेपुर, पीके और रईस जैसी ​फिल्मों में मोहर्रम का त्योहार देखा है, लेकिन ज्यादातर लोग मोहर्रम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते। आम लोगों में यही धारणा है कि यह मुस्लिम्स का त्योहार है, जिसमें वे खुद को जंजीरों आदि से मार कर घायल करते हैं। हम आपको बता दें कि असल में मोहर्रम इस्लामिक नव वर्ष की शुरुआत है, लेकिन शिया मुस्लिम कम्यूनिटी के लिए यह शोक मनाने का भी समय होता है। वे इस दिन को प्रॉफेट मोहम्मद के पड़ पोते इमाम हुसैन की शहादत को सलाम करने के लिए मनाते हैं।

क्यों मनाया जाता है

इस साल मोहर्रम 1 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। 14 शताब्दियां पहले, अशुरा के दिन इमाम हुस्सैन को न्याय और समानता के पक्ष में खड़े होेने के कारण टैरांट के राजा ने मार दिया था। इमाम हुस्सैन करबला की जंग में शहीद हुए थे, लेकिन उनका मैसेज आज भी जीवित है और इस जंग में उनकी जीत ही मानी गई है।

करबला में हुई यह घटना बेहद दर्दनाक थी। इमाम हुस्सैन अपने दोेस्तों और परिवार के साथ जा रहे थे जब दुश्मन की सेना ने उन्हें घेर लिया। उनके काफिले में महिलाएं और बच्चे भी थे, लेकिन दुश्मनों की सेना ने किसी को नहीं बख्शा। उन्होंने रेगिस्तान की तपती गर्मी में लगातार तीन दिन तक इमाम हुस्सैन और उनके साथियों को भूखा और प्यासा रखा। इतना ही नहीं हुस्सैन के छह माह के बच्चे को भी प्यासा रखा गया और मजलिस के दौरान उसकी हत्या कर दी गई।

क्या है ताज़िया का जुलूस

के दिनों में मुसलमान/ शिया लोग अपने के पोते हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है। ताज़िया बाँस की कमाचिय़ों पर रंग-बिरंगे कागज, पन्नी आदि चिपका कर बनाया जाता है यह मकबरे के आकार का वह मंडप जिसके आगे बैठकर मुसलमान लोगो द्वारा मातम करते और मर्सिये पढ़ते हैं। ग्यारहवें दिन जलूस के साथ ले जाकर इसे ताज़िया को दफन किया जाता है।

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