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Credit Card होल्डर की मौत के बाद कौन चुकाएगा क्रेडिट कार्ड का बकाया बिल, यहां जानें जरूरी नियम

Article Highlights

Key Takeaways
  • आज के दौर में डेबिट कार्ड के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग और रोजमर्रा के खर्चों
Credit Card Dues After Death

आज के दौर में डेबिट कार्ड के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग और रोजमर्रा के खर्चों में क्रेडिट कार्ड लोगों की पहली पसंद बन चुका है। रिवॉर्ड प्वाइंट, कैशबैक और बिल भुगतान के लिए अतिरिक्त समय जैसी सुविधाएं इसे और आकर्षक बनाती हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि किसी क्रेडिट कार्ड धारक की अचानक मृत्यु हो जाए तो उसके बकाया बिल का भुगतान कौन करेगा। क्या परिवार को यह राशि चुकानी होगी या बैंक खुद इसका समाधान करता है।

मौत के बाद कौन भरेगा बकाया रकम

कानूनी रूप से क्रेडिट कार्ड का बकाया व्यक्तिगत देनदारी माना जाता है। इसका मतलब है कि कार्डधारक के जीवनकाल में जो भी खर्च हुआ है, उसकी जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है। अगर कार्ड होल्डर की मौत हो जाती है, तो बैंक सबसे पहले उसके नाम पर मौजूद संपत्ति, निवेश या अन्य कमाई का आकलन करता है। इन्हीं संपत्तियों के माध्यम से बकाया राशि की वसूली की जाती है।

बता दें कि परिवार के सदस्यों पर यह कर्ज सीधे तौर पर नहीं डाला जाता, जब तक कि वे उस खाते में सह-आवेदक या गारंटर न हों। अगर मृतक के नाम पर मौजूद संपत्ति की कीमत बकाया रकम से कम होती है, तो बाकी की रकम को बैंक अपनी बैलेंस शीट में खराब कर्ज यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट के रूप में दर्ज कर सकता है।

कब पड़ता है परिवार पर असर

यदि क्रेडिट कार्ड संयुक्त नाम से जारी किया गया है या किसी परिजन ने गारंटी दी है, तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी साझा हो सकती है। इसी तरह यदि किसी ने मृतक की संपत्ति विरासत में स्वीकार की है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति से देनदारियां भी जोड़ी जा सकती हैं। हालांकि बैंक सीधे परिवार को परेशान नहीं कर सकता, बल्कि वह कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है।

क्रेडिट कार्ड लिमिट कैसे तय होती है

क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करने से पहले बैंक कई वित्तीय पहलुओं की जांच करता है। सबसे पहले आवेदक की मासिक आय और नौकरी की स्थिरता देखी जाती है। स्थायी नौकरी, नियमित आय और मजबूत पेशेवर प्रोफाइल वाले लोगों को आमतौर पर अधिक लिमिट मिलती है।

इसके अलावा बैंक क्रेडिट स्कोर की भी समीक्षा करता है। क्रेडिट स्कोर इस बात का संकेत देता है कि व्यक्ति ने पहले लिए गए कर्ज या क्रेडिट का भुगतान समय पर किया है या नहीं। बेहतर स्कोर यह दर्शाता है कि आवेदक जिम्मेदार उधारकर्ता है, जिससे अधिक क्रेडिट लिमिट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

खर्च की आदतों का भी होती है जांच

बैंक केवल आय और स्कोर पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि ग्राहक के खर्च करने के तरीके का भी विश्लेषण करता है। अगर कार्डधारक समय पर बिल चुकाता है और अपनी सीमा के भीतर खर्च करता है, तो भविष्य में लिमिट बढ़ाई जा सकती है। वहीं बार-बार भुगतान में देरी या अत्यधिक उपयोग से लिमिट सीमित रखी जा सकती है।

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Rohit P

My name is Rohit Pal, and I have been working in the field of journalism for the past five years. During this time, I have written on a variety of topics, including business, automobiles, technology, and politics. I have worked with several major organizations and am currently working with Timesbull.