U19 World Cup: क्रिकेटर नहीं होते तो खेती करते राज लिम्बानी, बचपन में रेत पर करते थे अभ्यास, जानें पूरी कहानी

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Amit Mishra

कहते हैं कि जो व्यक्ति संघर्ष करता है अपने ऊपर अच्छे से काम करता है तकदीर उसकी कदम चूमती है जी हां मैं आपको बताने जा रहा हूं कैसी कहानी जिससे आप पढ़कर मोटिवेशन के साथ सीखेंगे ।


गुजरात के कच्छ में पले-बढ़े राज लिम्बानी के पिता किसान हैं। उन्होंने अपने पिता के सपने को पूरा किया है। अब उनका लक्ष्य सीनियर भारतीय टीम के लिए खेलना है।

अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में भारत के लिए राज लिम्बानी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के बेनोनी में 10 ओवर में 38 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने इस टूर्नामेंट के छह मैचों में 11 विकेट लिए। हालांकि, उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया खिताब नहीं जीत सकी। उसे ऑस्ट्रेलिया ने 89 रन से हरा दिया। लिम्बानी दाएं हाथ से तेज गेंदबाजी करते हैं। उन्होंने इस स्तर तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। गुजरात के कच्छ में पले-बढ़े लिम्बानी के पिता किसान हैं। उन्होंने अपने पिता के सपने को पूरा किया है। अब उनका लक्ष्य सीनियर भारतीय टीम के लिए खेलना है।

लिम्बानी अगर क्रिकेटर नहीं होते तो वह पिता के साथ खेती करते हैं। उनके पिता वसंत पटेल ने साफ कह दिया था कि वह अगर क्रिकेट में सफल नहीं होते हैं तो उन्हें भी खेती करना होगा। पिता ने बेटे के सपने को तरजीह दी और लिम्बानी को क्रिकेटर बनने के लिए भेजी।

ऐसे हुई लिम्बानी के करियर की शुरुआत

बड़ौदा से करीब 550 किलोमीटर दूर दयापार जिले में लिम्बानी का घर है। यह कच्छ क्षेत्र में हैं। पाकिस्तान का सीमा यहां से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर है। लिम्बानी का घर रेगिस्तानी क्षेत्र में है। वहां खेलने की सुविधा बिल्कुल नहीं है। पिता ने बचपन से ही लिम्बानी का ध्यान क्रिकेट पर देखा। उन्होंने पहले टेनिस और फिर कॉर्क की गेंद से गेंदबाजी की। कच्छा क्षेत्र में गर्मी काफी पड़ती है। लिम्बानी गर्मी के बावजूद रेत पर घंटों गेंदबाजी करते थे।

इन्होंने अपना पूरा लक्ष्य एक डायरी में लिखा है जिसको पढ़ाते हैं जिस पर काम करते हैं और खूब ढ़ेर सारी मेहनत करके अपने लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देते हैं।

अंडर-16 के कैंप में लिम्बानी को देखकर उनके कोच दिग्विजय सिंह काफी खुश हुए थे। लिम्बानी के एक पास डायरी है। इसमें उन्होंने अपने लक्ष्य के बारे में लिखा था। उन्हें पहले अंडर-16 में खेलना था। फिर अंडर-19 टीम में जगह बनानी थी और उसके बाद एनसीए जाना है। यहां से भारतीय टीम में जगह बनानी है।

 

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