DA HIKE UPDATE: केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़ने के बाद से अब राज्य सरकारें भी अपने कर्मियों के डीए बढ़ोतरी पर काम कर रही हैं. राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने-अपने हिसाब से गुड न्यूज़ दे रही है. क्या आपको पता है कि एक राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए खजाने का पिटारा खोल दिया है, जिससे चेहरे पर पर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है.
पूर्वोत्तर राज्य की त्रिपुरा सरकार ने अपने कर्मचारियों का 5 फीसदी डीए बढ़ाने का फैसला किया है, जो किसी गुड न्यूज की तरह साबित होगी. इससे सैलरी में बंपर इजाफा होगा. इसकी दरें नए साल साल के पहले दिन से लागू मानी जाएंगी.
डीए बढ़कर हो गया कितना फीसदी?
त्रिपुरा सरकार ने डीए में 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद यह अब 41 फीसदी पहुंच गया है. इससे पहले कर्मचारियों को 36 फीसदी डीए का फायदा मिल रहा था. इसकी दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, जिसके बाद सैलरी भी बढ़कर आएगी. सरकार के इस फैसले का लाभ राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला है. सरकार के अनुसार, इससे कर्मचारियों पर बढ़ती महंगाई का बोझ थोड़ा कम होने की उम्मीद है.
कितने कर्मचारी होंगे लाभांवित?
त्रिपुरा सरकार के इस फैसले से करीब 1,02,563 सरकारी कर्मचारी लाभांवित होंगे. इसके अलावा 81,019 पेंशनर्स को सीधा फायदा मिल सकेगा. इस बढ़ोतरी के चलते राज्य सरकार के खजाने पर हर साल करीब 500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा. सीएम साहा ने कहा कि सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि राज्य के कर्मचारियों का डीए केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर लाया जा सके.
सरकार पर बढ़ेगा बोझ
सरकार के इस फैसले से वित्तीय भंडार पर बोझ बढ़ जाएगा. राज्य के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा राय के अनुसार, वित्त साल 2026-27 में त्रिपुरा सरकार अपने कुल 34,212.31 करोड़ रुपये के बजट में से लगभग 15,000 करोड़ रुपये सिर्फ वेतन और पेंशन पर खर्च हो सकेंगे. इससे साफ है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स पर राज्य सरकार का खर्च लगातार बढ़ता दिख रहा है.
विपक्ष ने फैसले पर भी उठाए सवाल
जानकारी के लिए बता दें कि सरकार द्वारा बढ़ाए गए डीए पर विपक्ष ने भी सवाल उठा हैं. कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि कर्मचारियों के लिए DA बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन इसकी घोषणा बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री को करने की जरूरत थी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अलग से इसकी घोषणा करना विधानसभा की परंपरा के अनुरूप नहीं माना जा सकता.










