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26/11 याद करके दहल उठता दिल, क्यों इस शख्स का कोर्ट में केस दर्ज नहीं किया जा सकता?

नई दिल्ली: 26/11 मुंबई हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा (Terrorist Tehvur Rana) को भारत लाया गया। हालांकि तहव्वुर राणा ने इस प्रत्यर्पण से बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन आखिरकार भारतीय एजेंसियों और भारत सरकार की कोशिशें कामयाब रहीं। अब तहव्वुर राणा के खिलाफ भारत में भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और उसे सजा दिलाई जाएगी।

कोर्ट के सामने दलील दी थी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तहव्वुर राणा ने अमेरिकी कोर्ट के सामने दलील दी थी कि एक बार जब उसका मामला अमेरिकी कोर्ट में सुना जा चुका है तो उसके खिलाफ भारतीय कोर्ट में केस दर्ज नहीं किया जा सकता, लेकिन भारत सरकार और भारत सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अमेरिकी कोर्ट के सामने दलील दी कि राणा की दलील मायने नहीं रखती, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक तहव्वुर राणा पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, ऐसे में राणा के खिलाफ भारत में भी केस दर्ज किया जा सकता है। ताकि 26/11 आतंकी हमले से जुड़ी जांच को आगे बढ़ाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक तहव्वुर के प्रत्यर्पण के लिए वैसे तो 2010 और 2012 में आवेदन दाखिल किए गए थे, लेकिन इस पर गंभीर चर्चा 2018 के बाद ही शुरू हुई।

मुकदमा कैसे चल सकता

दरअसल, 2018 के बाद भारत सरकार और एजेंसियों ने अमेरिकी कोर्ट के सामने दलीलें रखीं और साबित किया कि राणा का प्रत्यर्पण बेहद जरूरी है, ताकि उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तहव्वुर राणा भारत आ रहा है, लेकिन इसके साथ अमेरिकी कोर्ट का एक आदेश भी है, जिसमें कुछ शर्तों का भी जिक्र है। इन शर्तों में यह भी जिक्र है कि भारतीय कोर्ट में राणा के खिलाफ मुकदमा कैसे चल सकता है। हालांकि, इन शर्तों में क्या है, यह फिलहाल गोपनीय है।

एजेंसी ने सहमति जताई थी

उदाहरण के लिए, साल 2005 में जब अबू सलेम को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, तो उस पर कुछ शर्तें लगाई गई थीं, जिन पर भारत सरकार और एजेंसी ने सहमति जताई थी। इन शर्तों में कहा गया था कि अबू सलेम को 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं होगी और सलेम को मौत की सजा नहीं दी जाएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तहव्वुर राणा के भारत पहुंचने के बाद जांच एजेंसी उसे भारतीय धरती पर आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार करेगी और उसके बाद जांच एजेंसी के पास उसे कोर्ट में पेश करने के लिए 24 घंटे का समय होगा।

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