क्या RTI के जरिए पत्नी को है पति की सैलरी जानने का हक, हाई कोर्ट सुनाया ये फैसला

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया है, जिसमें एक पत्नी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन को खारिज कर दिया गया था। पत्नी ने अपने पति की सैलरी से संबंधित जानकारी उस सरकारी विभाग से मांगी थी, जहां वे कार्यरत हैं। अदालत ने साफ किया कि वेतन, सर्विस रिकॉर्ड और परफॉर्मेंस से जुड़ी जानकारी पर्सनल होती है और इसे बिना ठोस  कारण के सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की जानकारी को तीसरे पक्ष से जुड़ी हुई मानी जाती है। इसलिए आरटीआई कानून के तहत इसे साझा करने से पहले निजता के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Girish Ramchandra Deshpande v. CIC का हवाला दिया। इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि किसी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका, पदोन्नति, वेतन और अन्य सेवा संबंधी विवरण पर्सनल इन्फॉर्मेंशन की कैटेगरी में आते हैं।

अदालत ने दोहराया कि ऐसी जानकारी कर्मचारी और नियोक्ता के बीच का विषय है। जब तक कोई व्यापक जनहित इससे जुड़ा न हो, तब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

क्या था पूरा मामला

मामला पति-पत्नी के बीच वेतन संबंधी जानकारी मांगने को लेकर पैदा हुआ। कांता कुमावत ने अपने पति ओमप्रकाश कुमावत की जनवरी से मार्च 2024 तक की सैलरी स्लिप की फोटोकॉपी आरटीआई के जरिए मांगी थी। उनके पति पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। विभाग ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि यह तीसरे पक्ष की पर्सनल है और आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत इससे छूट प्राप्त है।

इसके बाद अक्टूबर 2024 में पत्नी ने इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने विभाग के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

किन परिस्थितियों में मिल सकती है जानकारी

कानूनी एक्सपर्ट के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में पत्नी को आरटीआई RTI ) के माध्यम से पति की सैलरी स्लिप नहीं मिल सकती। आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) निजी जानकारी की सुरक्षा करती है।

हालांकि, अगर पति-पत्नी के बीच मेंटेनेंस या एलिमनी का मामला अदालत में विचाराधीन हो, तो स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में अदालत आय से संबंधित दस्तावेज दिखने करने का निर्देश दे सकती है, ताकि गुजारा भत्ता तय करने में पारदर्शिता बनी रहे। उस स्थिति में पत्नी को तीसरे पक्ष के रूप में नहीं देखा जाता, क्योंकि मामला सीधे उसके अधिकारों से जुड़ा होता है।

क्या इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़ी जानकारी मिल सकती है

आयकर रिटर्न भी व्यक्तिगत और गोपनीय दस्तावेज माना जाता है। सामान्य हालात में इसे भी आरटीआई के तहत नहीं पाया जा सकता। अगर कोई वैवाहिक विवाद या मेंटेनेंस का मामला अदालत में लंबित हो, तो कोर्ट जरूरत के अनुसार इनकम की जानकारी देने का आदेश दे सकता है।

अलग-अलग अदालतों के फैसले

देश की अलग-अलग अदालतों ने परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग निर्णय दिए हैं। हाई कोर्ट ने यह साफ किया है कि मेंटेनेंस मामलों में दोनों पक्षों को अपनी आय, संपत्ति, देनदारियों और खर्च की जानकारी हलफनामे के माध्यम से देनी चाहिए। इससे न्यायालय को सही मेंटनेस तय करने में मदद मिलती है।

कुछ मामलों में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने यह माना कि अगर पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा हो, तो पत्नी को पति की आय जानने का अधिकार हो सकता है, खासतौर पर जब मेंटिनेंस तय किया जाना हो।

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