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Home Loan हुआ सस्ता, क्या अब घर खरीदना सही या किराए पर रहना है फायदेमंद?

Home Loan

Home Loan: हर किसी का सपना होता है कि उसका खुद का घर हो। ऐसे में अगर आप घर खरीदने का सपना देख रहे हैं तो ये खबर आपके लिए खास हो सकती है। बता दें पिछले एक साल में RBI ने अपने ब्याज दरों में 1.25% की कटौती कर दी है। इसके बाद बैंकों ने होम लोन के इंटरेस्ट रेट्स कम कर दिए हैं। जिससे बाद घर खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। लेकिन कोरोना काल के बाद बड़े शहरों में घरों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, कई जगह सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है घर खरीदना सही है या किराए पर रहना? चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

होम लोन में EMI बनती है सरदर्द

बता दें अगर आप घर खरीदने पर होम लोन लेते हैं तो आम तौर पर आपको 15-20 साल तक हर महीने EMI चुकानी होती है यानि कि ईएमआई लोन प्राप्तकर्ता के लिए सरदर्द बन जाती है। इस दौरान घर धीरे-धीरे आपका एसेट बन जाता है। जरूरत पड़ने पर आप इसे बेच सकते हैं, किराए पर दे सकते हैं या खुद रह सकते हैं। इसके अलावा, इनकम टैक्स के पुराने नियमों का लाभ लेने वाले टैक्सपेयर होम लोन पर टैक्स बेनिफिट्स भी पा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अपना घर आपको आजादी और अपनी पसंद के अनुसार घर बदलने का मौका देता है।

किराए के घर में रहने के फायदे

वहीं किराए के घर में रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप किसी लंबी अवधि की EMI की जिम्मेदारी से फ्री रहते हैं। प्रॉपर्टी के मेंटेनेंस की चिंता भी नहीं होती। नौकरी में ट्रांसफर अक्सर होता है, ऐसे में किराए के घर में रहना ज्यादा सुविधाजनक होता है। नए शहर में आसानी से किराए का घर ले सकते हैं और दूसरी जगह घर की EMI नहीं चुकानी पड़ती।

EMI का रेंट होना जरूरी नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद घरों की कीमतें जितनी तेजी से बढ़ी हैं, किराए उतनी तेजी से नहीं बढ़े हैं। इसलिए घर खरीदने के बाद EMI का पूरा हिस्सा रेंट से कवर नहीं होता। अगर आपको ट्रांसफर हो जाता है तो EMI और किराए दोनों का भुगतान करना पड़ सकता है। इससे वित्तीय दबाव बढ़ता है और अन्य जरूरतों पर असर पड़ सकता है।

जानें किस प्रकार लें फैसला

फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि घर खरीदना या किराए पर रहना आपके वित्तीय हालात पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र कम है और नौकरी ट्रांसफर-फ्री है तो होम लोन लेकर घर खरीदना सही हो सकता है। 30 साल का व्यक्ति 15 साल का लोन ले सकता है और 45 साल की उम्र तक EMI खत्म कर सकता है।

40 प्लस उम्र वालों के लिए सलाह

अगर उम्र 40 साल से ऊपर है, तो होम लोन लेने का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। इस उम्र में जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं – बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, बच्चों की उच्च शिक्षा, मेडिकल खर्च आदि। अगर 45-50 साल का व्यक्ति लोन लेता है तो उसे रिटायरमेंट तक EMI चुकानी पड़ सकती है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ता है। ऐसे में किराए के घर में रहना ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

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Adarsh P

Adarsh ​​Pal is a content writer at Timesbull Media. He specializes in writing news related to industry updates, the automotive sector, banking, telecommunications, the travel sector, and personal finance. Adarsh ​​has previously worked with several digital media channels. He is skilled at presenting news accurately and disseminating information based on facts. Adarsh ​​holds a Master's degree in Journalism from Kanpur University and enjoys reading books and writing poetry.