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एनीमिया से बचना है तो क्रेश डाइटिंग से बनाएं दूरी

एनीमिया इन दिनों गंभीर समस्या बनती जा रही है। देश में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं व बच्चे इससे ग्रस्त हैं। बेहतर भविष्य के लिए इससे बचाव बेहद जरूरी है। खानपान में फॉलिक एसिड, आयरन, विटामिंस और प्रोटीन की कमी से शरीर में लाल रुधिर कोशिकाओं की संख्या घट जाती हैं। इसी अवस्था को चिकित्सकीय भाषा में एनीमिया कहते हैं।

इसलिए होती समस्या
लाल रुधिर कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो पूरे शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। यदि किसी कारण हीमोग्लोबिन का स्तर घटने लगे तो शरीर की सभी कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिलती। इससे व्यक्ति को थकान महसूस होती है जो एनीमिया का मुख्य लक्षण है। सिरदर्द, चक्कर आना, एकाग्रता में कमी, त्वचा व नाखूनों पर सफेद दाग होना, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैरों में ठंड ज्यादा लगना आदि लक्षण हैं।

कारण
अक्सर देखा गया है कि महिलाएं खुद की सेहत के मामले में अवेयर नहीं रहती और लापरवाही बरतती हैं। महिलाओं में इसकी कमी का मुख्य कारण खानपान में पौष्टिक चीजों के प्रति अरुचि होना है। जैसे वे दूध, पनीर, पालक आदि ज्यादा पसंद नहीं करती हैं। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग से भी शरीर में खून की कमी आ जाती है। कुछ मामलों में इसका कारण आनुवांशिक भी है। इसमें जन्म से ही शरीर में ब्लड सेल्स की कमी रहती है। ऐसे में इससे भविष्य में थैलेसीमिया हो सकता है। कई बार हड्डियों के बोन मैरो में ब्लड सेल्स की संरचना में जन्मजात विकृति होने से ल्यूकीमिया यानी ब्लड कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

इलाज
सबसे पहले मरीज को खानपान के जरिए ही आयरन और फॉलिक एसिड तत्त्व लेने की सलाह देते हैं। यदि मरीज में गंभीर एनीमिया की शिकायत है तो सप्लीमेंट्स भी कुछ समय के लिए दिए जाते हैं। गर्भधारण से ३ या ६ माह पहले आयरन और फॉलिक एसिड सप्लीमेंट्स की डोज शुरू हो जाती है।

ये करें
खानपान में खजूर, चुकंदर, सेब, अनार, मूंगफली, गुड़, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, बथुआ, मूली आदि लें।
गर्भधारण से पहले हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य रखें।
अंकुरित अनाज, आंवला, विभिन्न तरह की दालें, चने और मौसमी फल खाएं। सर्दी में पालक, टमाटर, चुकंदर, आांवला आदि से बना जूस नियमित पीएं।
शरीर में फॉलिक एसिड की पूर्ति के लिए डाइट में कुट्टू का आटा, ओटमील, गोभी, मशरूम, ब्रॉकली, शहद आदि लें।
सूखे मेवे भी पोषक तत्त्वों का अनुपात बनाए रखते हैं।

ये न करें
क्रेश डाइटिंग या उपवास करने से बचें।
थकान यदि लगातार महसूस हो तो डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
हरी सब्जियों को ज्यादा देर न तो धोएं और न ही ज्यादा उबालें।
कुछ खास फल जैसे सेब, नाशपाती, खीरा और अमरूद को बिना छिलका उतारे खाएं। क्योंकि इन फलों का जरूरी तत्त्व इनके छिलके में होता है।

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