नई दिल्ली: जब एक बार यूजर ‘अपडेट क्रोम’ या ‘अपडेट एज’ बटन पर क्लिक कर देता है, तो पेज .appx प्रकार का एक ब्राउजर एक्सटेंशन को डाउनलोड करना होता है।

ये एक्सटेंशन बैकग्राउंड में एक्टिव होने लगता है। जिसके बाद आपके विंडोज की फाइल को नुकसान पहुंचाना शुरू हो जाता है। इस बारे में यूजर को कोई जानकारी नहीं मिलती है।

जब ये आपके सिस्टम में पहुंच जाता है तब बैकग्राउंड में जाकर एक्टिव होना शुरु हो जाता है। ये आपके सिस्टम में मौजूद सभी फाइल्स का एन्क्रिप्शन शुरू कर दिया जाता है।

जब एन्क्रिप्शन प्रोसेस खत्म होने लगता है, तब आप सिस्टम की कोई भी फाइल ओपन नहीं कर सकते हैं।

इस दौरान हैकर्स आपको फिरौती का नोट पैड भेज देता है। जब आप उसको पेमेंट कर देते हैं, तभी वापस फाइल का एक्सेस मिलता है। इतना ही नहीं  रैंसमवेयर टोर ब्राउजर डाउनलोड करने के लिए भी कहना शुरु कर देता है।

मैग्नीबर रैंसमवेयर से कैसे बचा जा सकता है

अपने क्रोम ब्राउजर या एज ब्राउजर को फिलहाल अपडेट करने की जरुरत नहीं है। ये ऑटोमैटिक अपडेट होने लगता है, तब घबराने की जरूरत नहीं होती है। मैनुअल अपडेट नहीं करना होता है। मैनुअल डाउनलोड में हैकर्स आपको फेक पेज पर लाता है।

अपने डेटा का बैकअप जरूर रखना होगा। इसके लिए क्लाउड स्टोरेज या फिजिकल एक्सटर्नल स्टोरेज हार्ड ड्राइव का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि किसी वजह से PC इन्फेक्टेड हो जाता है, तब अपने सिस्टम को रीसेट करना अहम हो जाता है।

अपने PC और लैपटॉप में एक एंटीवायरस का इस्तेमाल जरूर कर सकते हैं। एंटीवायरस को अपडेट करते रहना होगा। हो सके तो फ्री एंटीवायरस से बचने की कोशिश करें। इसका पेड वर्जन ही इस्तेमाल करने की नसीहत दी जाती है।

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