रवि प्रदोष पर आषाढ़ शिवरात्रि का शुभ संयोग
12 जुलाई, रविवार को रवि प्रदोष व्रत और आषाढ़ शिवरात्रि एक साथ हैं । पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई को सुबह 2:04 बजे से लेकर रात 10:29 बजे तक है । उसके बाद से आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 13 जुलाई, सोमवार को शाम 6:49 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर प्रदोष रविवार को है, वहीं शिवरात्रि के लिए निशिता मुहूर्त की गणना की जाती है । इस आधार पर आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी तिथि में निशिता मुहूर्त 12 जुलाई को ही प्राप्त हो रहा है । इसलिए 12 जुलाई को रवि प्रदोष और आषाढ़ शिवरात्रि का व्रत एक साथ रखा जाएगा।
एक व्रत से मिलेगा 3 गुना लाभ
12 जुलाई को आप एक उपवास रखकर तीन गुना लाभ प्राप्त कर सकते हैं । प्रदोष व्रत, शिवरात्रि व्रत के अलावा रविवार व्रत का भी लाभ मिलेगा । इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा के साथ-साथ सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करता है।
इस दिन व्रत और पूजा की विधि विशेष है । प्रातःकाल में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं और साफ कपड़े पहनें । इसके बाद सबसे पहले व्रत और पूजा का संकल्प करें । फिर सूर्योदय के समय भगवान सूर्य की पूजा करें और उन्हें जल से अर्घ्य दें । सूर्य मंत्र का जाप करें । उसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवजी का जलाभिषेक करें । बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत, चंदन, शहद, फूल, माला आदि से शिवरात्रि पूजन करें।
इसके बाद शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष व्रत की पूजा करें । इसमें भी महादेव की पूजा विधिपूर्वक करें । प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय ही करते हैं, लेकिन शिवरात्रि व्रत में ऐसा नहीं है—आप जब चाहें तब शिव पूजा कर लें । इस प्रकार आप एक उपवास से तीन व्रतों का पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।
रवि प्रदोष और आषाढ़ शिवरात्रि का मुहूर्त
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त:
आज शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक — प्रदोष काल में शिव पूजा का यह सबसे उत्तम समय है। इस समय भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और जल चढ़ाने से विशेष फल मिलता है।
शिवरात्रि पूजा मुहूर्त:
सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक — इस समय शिवरात्रि पूजा का विधान है। आप इसी समय में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
12 जुलाई के अन्य शुभ मुहूर्त
इस दिन कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं, जिनमें पूजा, जप, दान और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:10 बजे से 4:51 बजे तक — योग, ध्यान और जप के लिए सर्वोत्तम समय।
अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:59 बजे से 12:54 बजे तक — किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए।
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 8:59 बजे से 10:43 बजे तक — व्यापार और नए कार्यों के लिए।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक — पूजा और दान के लिए।
शुभ-उत्तम मुहूर्त: शाम 7:22 बजे से 8:38 बजे तक — शाम की पूजा के लिए।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: रात 8:38 बजे से 9:54 बजे तक — रात्रि जागरण और मंत्र जाप के लिए।
दो शुभ योगों में व्रत
12 जुलाई को ये तीनों ही व्रत 2 शुभ योग में हैं । उस दिन वृद्धि योग प्रातःकाल से लेकर रात 8:06 बजे तक रहेगा, उसके बाद से ध्रुव योग होगा । वृद्धि योग में किए गए कार्यों में बढ़ोत्तरी होती है, वहीं ध्रुव योग में स्थिर या स्थायी कार्य करने चाहिए।
इन योगों में किया गया कोई भी शुभ कार्य या व्रत-पूजा कई गुना फलदायी होता है । वृद्धि योग में शुरू किया गया कार्य बढ़ता है, इसलिए इस समय में पूजा, जप, दान और व्रत का संकल्प करना विशेष लाभकारी होता है । ध्रुव योग में स्थायित्व का गुण होता है, इसलिए इस समय में दीर्घकालिक सुख-शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से पहले शुरू करनी चाहिए । सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें । शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी से अभिषेक करें । इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, फूल और अक्षत चढ़ाएं । ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें । फिर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें । अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।
इस दिन विशेष रूप से रुद्राभिषेक का बहुत महत्व है । यदि संभव हो तो शिव मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक करवाएं । यदि घर पर ही पूजा कर रहे हैं, तो शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें — इससे सभी प्रकार के कष्ट, भय और रोगों से मुक्ति मिलती है।
शिवरात्रि पूजा की विशेषता
शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव का सबसे प्रिय व्रत माना जाता है । मान्यता है कि आषाढ़ शिवरात्रि पर भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है । इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिवरात्रि पर निशिता काल (रात का मध्य भाग) में पूजा करने का विशेष विधान है । इस बार निशिता मुहूर्त 12 जुलाई की रात को प्राप्त हो रहा है, इसलिए रात्रि जागरण करके भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए । आप चाहें तो पूरी रात जागकर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या शिव स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
इस विशेष दिन पर क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान सूर्य को जल अर्पित करें और सूर्य मंत्र का जाप करें।
शिव मंदिर जाकर या घर पर शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और फूल चढ़ाएं।
शाम को प्रदोष काल में शिव पूजा करें।
मंत्र जाप और ध्यान करें।
क्या न करें
व्रत के दौरान अन्न ग्रहण न करें—आप फल, दूध या जल का सेवन कर सकते हैं।
किसी से झगड़ा या गुस्सा न करें—मौन रहना श्रेयस्कर है।
तामसिक भोजन या नशीली चीजों का सेवन न करें।
बिना स्नान के पूजा न करें और अपवित्र वस्त्र न पहनें।
किसी को दुखी या निराश न करें—दान और सेवा का विशेष महत्व है।
निष्कर्ष
12 जुलाई, 2026 का दिन भक्तों के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली है । रवि प्रदोष, आषाढ़ शिवरात्रि और रविवार व्रत का दुर्लभ संयोग इस दिन को तीन गुना पुण्यदायी बना रहा है । इस दिन एक उपवास रखकर आप प्रदोष व्रत, शिवरात्रि व्रत और रविवार व्रत — तीनों का पुण्य एक साथ प्राप्त कर सकते हैं ।
सही मुहूर्त और विधि के साथ की गई पूजा जीवन के सभी कष्टों, दुखों और बाधाओं को दूर करती है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति करती है।
इस दिन वृद्धि और ध्रुव योग भी बन रहे हैं, जो व्रत और पूजा के फल को और अधिक बढ़ा देते हैं । प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम 7:22 से रात 9:24 तक है, जबकि शिवरात्रि पूजा का शुभ समय सुबह 7:15 से दोपहर 12:27 तक है ।
इस पवित्र अवसर पर भगवान शिव और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन को सुखमय, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाएं। ऐसी ही धार्मिक जानकारियों, व्रत त्योहारों और शुभ मुहूर्तों के लिए बने रहें timesbull.com पर।
