Mutual Fund Rules: म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन में आया बड़ा बदलाव
अगर आपने या आपके परिवार में किसी ने म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है । अब निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को क्लेम लेने के लिए छोटी-छोटी गलतियों की वजह से परेशान नहीं होना पड़ेगा । SEBI के निर्देश के बाद AMFI ने म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन की प्रक्रिया को पहले से आसान बना दिया है । अब नाम, पता या सिग्नेचर में मामूली अंतर होने पर क्लेम आसानी से आगे बढ़ सकेगा और परिवारों को कागजी कार्रवाई के चक्कर में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा ।
AMFI ने SOP में किए ये बदलाव
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने निवेशक की मृत्यु के बाद म्यूचुअल फंड यूनिट्स या रकम नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अपने SOP में बदलाव किया है । SEBI ने AMFI को निर्देश दिया था कि "Procedure to Claim Units/Proceeds upon Death of a Unit Holder" को और सरल बनाया जाए, ताकि परिवारों को क्लेम के दौरान आने वाली दिक्कतें कम हों । इसके बाद AMFI ने नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और ये तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं । यानी अगर आपके परिवार में किसी की मृत्यु हो गई है और आप म्यूचुअल फंड का क्लेम कर रहे हैं, तो नए नियम आप पर लागू होंगे और आपको पहले की तुलना में कम परेशानी होगी ।
नाम-पते की छोटी गलती से नहीं रुकेगा क्लेम
अब तक कई मामलों में केवल डॉक्यूमेंट्स में नाम या पते के अंतर की वजह से क्लेम प्रक्रिया लंबी खिंच जाती थी । नए नियमों के बाद ऐसी छोटी-छोटी गलतियों के कारण क्लेम रोकने की जरूरत नहीं होगी । इसका मकसद यह है कि नॉमिनी या परिवार को सिर्फ इन कारणों से बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें । उदाहरण के लिए, अगर म्यूचुअल फंड के रिकॉर्ड में नाम "Rajesh Kumar" है और नॉमिनी के आधार कार्ड में "Rajesh" है, तो अब इस छोटे से अंतर के लिए क्लेम नहीं रोका जाएगा ।
पते में अंतर होने पर भी मिलेगी राहत
अगर म्यूचुअल फंड के रिकॉर्ड में दर्ज एड्रेस और नॉमिनी द्वारा दिए गए डॉक्यूमेंट्स का एड्रेस अलग है, तो केवल इसी वजह से क्लेम नहीं रोका जाएगा । ऐसे मामलों में एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMC) उपलब्ध लेटेस्ट एड्रेस को स्वीकार कर सकती हैं, बशर्ते उसके समर्थन में जरूरी डॉक्यूमेंट्स मौजूद हों । इससे एड्रेस मिसमैच की वजह से होने वाली देरी कम होगी और नॉमिनी को बार-बार एड्रेस प्रूफ जमा करने की परेशानी नहीं होगी । हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब नॉमिनी के पास अपने दावे के समर्थन में वैध दस्तावेज हों ।
नाम की स्पेलिंग अलग है तो ऐसे मिलेगा क्लेम
SEBI ने नाम से जुड़े मामलों के लिए भी एक आसान प्रक्रिया तैयार की है । अब अगर नाम की स्पेलिंग में अंतर है, तो दावेदार आधार, पासपोर्ट या अन्य वैलिड ID प्रूफ जैसे सेल्फ-सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट देकर इस समस्या का समाधान कर सकेंगे । इससे केवल नाम के मामूली अंतर के कारण क्लेम अटकने की संभावना कम होगी । नॉमिनी को इन दस्तावेजों के साथ एक सेल्फ-सर्टिफिकेशन देना होगा, जिसमें वह पुष्टि करेगा कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं । यह प्रक्रिया पहले से काफी आसान है, क्योंकि पहले नॉमिनी को गजट नोटिफिकेशन या कोर्ट का आदेश लाना पड़ता था, जो बहुत लंबी और महंगी प्रक्रिया थी ।
सिग्नेचर मैच नहीं होने पर भी आसान प्रक्रिया
अगर डॉक्यूमेंट्स में सिग्नेचर मैच नहीं करते हैं, तो उसके लिए भी आसान प्रक्रिया अपनाई जाएगी । AMCs अब रजिस्ट्रार टू एन इश्यू और शेयर ट्रांसफर एजेंट (RTA) के लिए तय किए गए नियमों के मुताबिक सिग्नेचर मिसमैच के मामलों का निपटारा कर सकेंगी । इसका मतलब है कि अब सिग्नेचर में अंतर होने पर भी AMC क्लेम को आगे बढ़ा सकती है, बजाय उसे रोकने या अस्वीकार करने के । हालांकि, इसके लिए RTA के तय मानदंडों का पालन करना होगा, जैसे कि नॉमिनी की पहचान स्थापित करने के लिए बैंक अकाउंट या पासपोर्ट जैसे अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा ।
