Income Tax Return: विदेशी संपत्ति की जानकारी अब AIS में
क्या आपके पास विदेश में कोई बैंक अकाउंट है? या फिर किसी विदेशी कंपनी के शेयर या RSU (Restricted Stock Units) हैं? शायद आपको किसी विदेशी सोर्स से इनकम होती है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
अब आपको अपनी विदेशी संपत्ति और इनकम की जानकारी के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक नई सुविधा शुरू की है, जिससे अब टैक्सपेयर्स अपने एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में विदेशों में मौजूद संपत्तियों और विदेशी आय से जुड़ी जानकारी आसानी से देख सकते हैं ।
100 से ज्यादा देशों से मिलती है वित्तीय जानकारी
भारत ने दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के साथ ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन (AEOI) व्यवस्था के तहत समझौते किए हैं । इसके जरिए दूसरे देश भारतीय टैक्स रेजिडेंट्स की विदेशी संपत्तियों और इनकम से जुड़ी जानकारी भारत सरकार को देते हैं । यह व्यवस्था कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) और FATCA जैसी अंतरराष्ट्रीय पहलों के तहत काम करती है ।
दरअसल, विदेशी वित्तीय संस्थान हर साल अपने यहां भारतीय नागरिकों के खातों, निवेशों और इनकम की रिपोर्ट अपने देश के टैक्स विभाग को भेजते हैं, और फिर वह देश यह जानकारी भारत के साथ शेयर करता है । इसमें विदेशी बैंक अकाउंट, निवेश, ब्याज, डिविडेंड और अन्य वित्तीय लेन-देन जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं । फिलहाल AIS में साल 2022, 2023 और 2024 से जुड़ी विदेशी जानकारी दिखाई जा रही है । साल 2025 की जानकारी सितंबर/अक्टूबर 2026 में आने की उम्मीद है ।
कैसे देखें विदेशी संपत्ति की जानकारी?
CBDT ने इस सुविधा को इस्तेमाल करने के लिए एक यूजर गाइड भी जारी किया है । आप इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी विदेशी संपत्ति की जानकारी देख सकते हैं:
सबसे पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/) पर लॉगिन करें ।
इसके बाद 'e-File' मेनू में जाएं और 'Income Tax Returns' के तहत 'View Annual Information Statement (AIS)' पर क्लिक करें। या फिर होम पेज पर दिए गए AIS टैब पर क्लिक करें ।
AIS कंप्लायंस पोर्टल खुलने के बाद, 'Reports' ऑप्शन पर क्लिक करें ।
यहां 'Foreign Assets Information (FAI)' विकल्प चुनें ।
संबंधित कैलेंडर ईयर (जैसे 2022, 2023, या 2024) का चयन करें और PDF रिपोर्ट डाउनलोड करें ।
पीडीएफ खोलने के लिए पासवर्ड डालें। यह पासवर्ड आपका PAN (लोअरकेस में) + जन्मतिथि (DDMMYYYY फॉर्मेट में) होता है ।
इस रिपोर्ट में आपको विदेशी बैंक अकाउंट, खाते की पीक बैलेंस, डिविडेंड, ब्याज और अन्य वित्तीय जानकारियां दिखेंगी । अगर आपको कोई जानकारी गलत लगती है, तो आप 'Submit Feedback' के जरिए ऑनलाइन अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं ।
टैक्स रिटर्न भरते समय रखें ध्यान
CBDT का साफ कहना है कि AIS में दिखाई गई जानकारी विदेशों से मिली रिपोर्ट के आधार पर होती है। इसे टैक्सपेयर्स की पूरी विदेशी संपत्ति का संपूर्ण रिकॉर्ड नहीं माना जाएगा । सूत्रों के अनुसार, यह सुविधा टैक्सपेयर्स पर नज़र रखने के लिए नहीं, बल्कि टैक्स के नियमों को आसान बनाने और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है ।
हालांकि, अगर आपके पास विदेश में संपत्ति या आय है, तो आपको ITR में शेड्यूल FA (Foreign Assets) और शेड्यूल FSI (Foreign Source Income) में पूरी और सही जानकारी देना अनिवार्य है, भले ही वह AIS में दिखाई दे या नहीं । बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर जानकारी AIS में नहीं है, तो उसे ITR में रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है। लेकिन असल में यह गलतफहमी है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
विदेशी आय और संपत्ति किसे रिपोर्ट करनी है?
अगर आप 'Resident and Ordinarily Resident' (ROR) हैं, तो आपको अपनी सभी वैश्विक आय (Global Income) पर भारत में टैक्स देना होता है और विदेशी संपत्तियों की जानकारी देनी होती है । यह जरूरी नहीं है कि आपने वह संपत्ति इसी साल खरीदी हो। अगर आपके पास वह संपत्ति किसी भी समय कैलेंडर ईयर (जनवरी से दिसंबर) के दौरान थी, तो आपको उसे रिपोर्ट करना होगा ।
विदेशी संपत्ति की परिभाषा बहुत व्यापक है और इसमें शामिल हैं
विदेशी बैंक खाते (चाहे वह डॉर्मेंट हो या बहुत छोटी बैलेंस हो)
विदेशी ब्रोकरेज या कस्टोडियल खाते (जैसे कि US स्टॉक ट्रेडिंग अकाउंट)
विदेशी कंपनियों के शेयर, RSU, ESOP (वेस्ट होने के बाद)
विदेशी म्यूचुअल फंड या ETF
विदेशी अचल संपत्ति (मकान, जमीन)
विदेशी बीमा या एन्युइटी कॉन्ट्रैक्ट
विदेशी ट्रस्ट में बेनिफिशियरी या ट्रस्टी का हित
विदेशी खाते पर सिग्निंग अथॉरिटी (जैसे कि ऑफिस का अकाउंट)
विदेशी सोर्स से कोई भी अन्य इनकम
शेड्यूल FA, FSI और Form 67: क्या है इनका काम?
ITR भरते समय आपको तीन चीजों पर खास ध्यान देना होगा :
शेड्यूल FA (Foreign Assets): इसमें आपको ऊपर बताई गई सभी विदेशी संपत्तियों की जानकारी देनी होती है। इसके लिए रिपोर्टिंग पीरियड कैलेंडर ईयर (1 जनवरी से 31 दिसंबर) होता है, न कि भारतीय वित्तीय वर्ष । ध्यान रखें, शेड्यूल FA ITR-1 और ITR-4 में नहीं होता है, इसलिए अगर आपके पास विदेशी संपत्ति है, तो आपको ITR-2 या ITR-3 फाइल करना होगा ।
शेड्यूल FSI (Foreign Source Income): इसमें आपको विदेशी सोर्स से हुई आय (जैसे विदेशी कंपनी से मिला डिविडेंड, ब्याज, या फ्रीलांसिंग से मिली राशि) को रिपोर्ट करना होता है। यह रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के हिसाब से होती है ।
Form 67: अगर आपने विदेश में अपनी इनकम पर टैक्स चुकाया है, तो आप डबल टैक्सेशन से बचाव (DTAA Relief) के लिए Form 67 फाइल कर सकते हैं। यह फॉर्म शेड्यूल TR के साथ फाइल किया जाता है ।
गैर-अनुपालन पर क्या होगा?
यह सोचना कि "मेरी विदेशी संपत्ति छोटी है, इसलिए उसे रिपोर्ट न करने पर कोई सवाल नहीं उठेगा", एक बड़ी भूल हो सकती है। ब्लैक मनी (Undisclosed Foreign Income and Assets) Act, 2015 के तहत, शेड्यूल FA में विदेशी संपत्ति की जानकारी न देने पर 10 लाख रुपये प्रति कर वर्ष का जुर्माना लग सकता है, और गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है ।
हालांकि, इस नियम में एक छूट भी है। अगर आपकी सभी विदेशी संपत्तियों (अचल संपत्ति के अलावा) की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है, तो इस जुर्माने से बचा जा सकता है । लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है, बल्कि जुर्माने से बचाव के लिए रिपोर्ट करना ही सही तरीका है ।
अगर AIS और आपके रिकॉर्ड में अंतर है?
अगर आपको AIS में दिखाई गई जानकारी और अपने रिकॉर्ड में कोई अंतर दिखता है, तो घबराएं नहीं। AIS में गलतियां हो सकती हैं, क्योंकि यह जानकारी विदेशी वित्तीय संस्थानों से आती है, जिनमें रिपोर्टिंग की गलतियां हो सकती हैं । ऐसे में आप AIS पोर्टल पर फीडबैक दे सकते हैं और अपने ITR में सही जानकारी भर सकते हैं । इसके अलावा, अपने दावे के समर्थन में सभी दस्तावेज (बैंक स्टेटमेंट, ब्रोकर स्टेटमेंट, विदेशी टैक्स रिटर्न) सुरक्षित रखें ।
क्या पुराने सालों की गलती सुधार सकते हैं?
अगर आपने पिछले सालों में शेड्यूल FA में कोई विदेशी संपत्ति रिपोर्ट नहीं की है, तो आप रिवाइज्ड रिटर्न (ITR-U) फाइल करके अपनी गलती सुधार सकते हैं । यह कदम आपको भविष्य में नोटिस और जुर्माने से बचा सकता है।
निष्कर्ष
CBDT की यह नई सुविधा टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब वे जान सकते हैं कि विदेशी टैक्स अथॉरिटीज ने उनके बारे में क्या जानकारी भारत सरकार को भेजी है । लेकिन याद रखें, AIS एक हेल्पिंग टूल है, टैक्स रिटर्न भरने का विकल्प नहीं । आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपनी सभी विदेशी संपत्तियों और आय को शेड्यूल FA और FSI में सही-सही भरें। ऐसा न करने पर आपको 10 लाख रुपये का जुर्माना और कानूनी परेशानी उठानी पड़ सकती है ।
विदेशी संपत्ति की रिपोर्टिंग अब कोई ऐच्छिक (Optional) काम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनिवार्य कर दायित्व है। इसलिए, ITR भरने से पहले अपना AIS जरूर चेक करें और सभी जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाकर सही ITR फाइल करें। यह छोटी-सी सावधानी आपको बड़े जुर्माने और कानूनी झंझटों से बचा सकती है। अगर आपको इस प्रक्रिया में कोई संदेह हो, तो किसी कर विशेषज्ञ (Chartered Accountant) की सलाह जरूर लें।
अपने टैक्स से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए timesbull.com पर बने रहें।
