Hydrogen Train: जींद-सोनीपत रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
भारतीय रेलवे ने 16 जुलाई 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन का शुभारंभ किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । 'NaMo Green Rail' के नाम से जानी जाने वाली यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी तय करती है । इस ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि यह बिना डीजल के चलती है और पर्यावरण के लिए पूरी तरह जीरो-एमिशन है ।
किराया: 5 रुपये से 25 रुपये के बीच
इस हाइड्रोजन ट्रेन का किराया 5 रुपये से शुरू होकर 25 रुपये तक है, जो इसे आम यात्रियों के लिए बहुत किफायती बनाता है :
बारवासनी, मोहना, स्टिक, रबदा या गोहना से सफर करने पर ₹10 किराया है।
खंडराई या बुताना से बोर्डिंग पर ₹15 किराया है।
ईशापुर खेड़ी, भांभेवा या लालित खेड़ा से ₹20 किराया है।
पांडु पिंडारा, जींद सिटी या जींद जंक्शन से ₹25 किराया है ।
क्यों नहीं बढ़ पा रहे यात्री?
पहले दिन जींद जंक्शन से लगभग 20 यात्रियों ने इस ट्रेन से सफर किया और दूसरे दिन भी यही संख्या रही । इसकी मुख्य वजह यह है कि जींद-सोनीपत रूट पर पहले से ही कई ट्रेनें चल रही हैं, जिससे यात्रियों के पास कई विकल्प मौजूद हैं । रेलवे को उम्मीद है कि जैसे-जैसे ट्रेन से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचेगी, आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है ।
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है?
हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है, जिसमें हाइड्रोजन और हवा के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली बनाई जाती है । यह ट्रेन सिर्फ पानी की भाप (वॉटर वेपर) छोड़ती है और कोई प्रदूषण नहीं फैलाती । इस ट्रेन को 1200 किलोवाट की हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली से लैस किया गया है और इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किमी/घंटा है ।
हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत
मेट्रो की तरह दरवाजे दिए गए हैं।
सभी जरूरी जानकारियों के लिए डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम मौजूद है।
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी है।
10 कोच वाली इस ट्रेन में एक बार में 2600 यात्री सफर कर सकते हैं ।
धुआं नहीं छोड़ती – सिर्फ पानी की भाप निकलती है ।
ट्रेन दिन में दो बार (सुबह 7:40 बजे जींद से और सुबह 10:30 बजे सोनीपत से) चलती है ।
निष्कर्ष
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ 5 से 25 रुपये में सफर का अवसर देती है । हालांकि शुरुआती दिनों में यात्रियों की कम संख्या एक चिंता का विषय है, लेकिन उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों को इसकी सुविधाओं और किफायती किराए के बारे में पता चलेगा, ट्रेन में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी ।
यह भारत को जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ उन चुनिंदा देशों में शामिल करता है जो हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनें चला रहे हैं ।
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