Bank Merger Update: निर्मला सीतारमण ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा

Bank Merger Update: देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के संभावित विलय को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। बाजार और वित्तीय हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार निकट भविष्य में कुछ बड़े बैंकिंग एकीकरण का ऐलान कर सकती है। हालांकि, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की कोई ठोस रूपरेखा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव न तो बजट से पहले चर्चा में था और न ही अभी सरकार के एजेंडे में है।

उच्च स्तरीय समिति करेगा समीक्षा

वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह समिति विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग तंत्र की संरचना, कार्यप्रणाली और चुनौतियों की व्यापक समीक्षा करेगी।

बता दें वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि समिति का कार्यक्षेत्र तय होने के बाद वह बैंकिंग क्षेत्र के हर महत्वपूर्ण पहलू पर विचार करेगी। इसमें पूंजी प्रबंधन, जोखिम नियंत्रण, तकनीकी उन्नयन और ग्राहक सेवा जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। बहरहाल, इस समय बैंक विलय किसी प्राथमिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है।

आरबीआई बोर्ड बैठक के बाद क्या कहा गया

बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड को संबोधित करने के उपरांत मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें किसी भी प्रस्तावित विलय योजना की जानकारी नहीं है। बता दें इस मौके पर रिजर्व बैंक के गवर्नर Sanjay Malhotra ने बैंकिंग प्रणाली की मजबूती पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बैंक पर्याप्त रूप से पूंजीकृत हैं और अगले चार से पांच वर्षों तक ऋण वृद्धि की मांग को पूरा करने में सक्षम हैं।

डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार तेज

हाल के वर्षों में यह चिंता जताई जा रही थी कि क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार डिपॉजिट ग्रोथ से तेज है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अब जमा दर भी लोन बढ़ोतरी के अनुरूप बढ़ रही है। इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता और संसाधनों का संतुलन बेहतर हो रहा है। यदि यह रुझान जारी रहता है तो बैंकों की कर्ज देने की क्षमता पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ेगा।

आगे क्या हो सकता है

हालांकि फिलहाल बैंकों के विलय की कोई आधिकारिक योजना नहीं है, लेकिन प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति भविष्य में संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश कर सकती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य बैंकिंग क्षेत्र को देश की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

Related Stories

Latest
Follow on Google