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सांप काटने पर ये जानकारी बचाएगी जान

आम लोगों को नहीं पता चल पाता कि जिस सांप ने काटा है वो जहरीला है या नहीं इसलिए सांप काटने पर कोई जोखिम नहीं ले सकते

सांप का किसी को काट लेना आमतौर पर गंभीर समस्‍या खड़ी करता है क्‍योंकि इसमें तत्‍काल चिकित्‍सीय सहायता की जरूरत पड़ती है। हालांकि ये जानने की जरूरत है कि भारत में सांपों की 270 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और उनमें से सिर्फ 60 के आस पास ही जहरीली होती हैं। ये जरूर है कि आम लोगों को नहीं पता चल पाता कि जिस सांप ने काटा है वो जहरीला है या नहीं। इसलिए सांप के कांटने पर कोई भी ये सोचकर नहीं बैठ सकता कि काटने वाला सांप गैर जहरीला था। सांप काटने के बाद इसके लक्षण 15 से 30 मिनट के अंदर प्रकट हो जाते हैं। काटी हुई जगह पर दर्द के अलावा चक्‍कर आना, जी मिचलाना, आवाज लड़खड़ाना, पसीना आना, उन्‍माद, नींद आना जैसे लक्षण प्रकट हो सकते हैं।

नाग और करैत का जहर स्‍नायु तंत्र यानी नर्वस सिस्‍टम पर असर करता है जबकि वाइपर का जहर खून पर असर डालता है और उसे जमने से रोकता है। नाग और करैत के काटने पर रोगी ऊंघने लगता है। उसकी मांसपेशियों विशेष रूप से आंखों के आस-पास की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। रोगी को एक चीज दो दिखाई देने लग सकती है। उसे मांसपेशियों का लकवा भी मार सकता है और सांस रुकने के कारण मृत्‍यु भी हो सकती है। रसेल्‍स वाइपर या स्‍केल्‍ड वाइपर के काटने पर रोगी का सिर दर्द और चक्‍कर आ सकता है। उसकी जी मिचला सकता है और उल्‍टियां हो सकती है। खांसी के साथ खून आ सकती है, चमड़ी के नीचे से भी खून निकल निकल सकता है। अत्‍यधिक खून निकलने पर रोगी बेहोश हो सकता है।क्‍या करें सांप काटे व्‍यक्ति को सांत्‍वना दें और उसे खुली जगह पर रखें। संभव हो तो काटी हुई जगह को रोगी के हृदय से नीचे रखने का प्रयास करें। कोई व्‍यक्ति यदि सांप को पहचान सकता है तो सांप की पहचान करवाएं। तत्‍काल नजदीकी अस्‍पताल की इमरजेंसी में मरीज को पहुंचाने का प्रयास करें। जबतक रोगी को अस्‍पताल ले जाने का बंदोबस्‍त नहीं हो तब तक घर में ही रोगी की आपात चिकित्‍सा की जानी चाहिए।

आपात चिकित्‍सा रोगी के सांस और नब्‍ज की जांच करते रहें। यदि रोगी सांस नहीं ले रहा हो या उसकी नब्‍ज या हृदय की धड़कन महसूस नहीं हो रही हो तो रोगी को पीठ के बल लिटा दें, उसके मुंह को खोलकर अपने मुंह से उसके मुंह को सटाकर सांस छोड़ें और रोगी की छाती के ऊपर उठने की जांच करें। ऐसा बार-बार करें। यदि सांप ने हाथ या पैर में काटा है तो उस जगह से थोड़ा ऊपर एक बैंड बांध दें। बैंड इतना कस कर बांधें कि बांधी गई जगह में एक ऊंगली समा जाए। हर एक या दो मिनट के बाद बैंड को थोड़ा ढीला करें और फ‍िर से कस दें। ऐसा 15 से 30 मिनट तक करें। यदि सूजन बैंड तक पहुंच गई हो तो बैंड को वहां से खिसकाकर कुछ इंच और ऊपर बांध दें। हालांकि यदि आपको पता चल जाए कि कि कोरल यानी मूंगा सांप ने काटा है तो बैंड नहीं बांधे क्‍योंकि इसके जहर का असर स्‍नायु तंत्र पर होता है। यदि आपको पूरा विश्‍वास है कि काटने वाला सांप जहरीला था तो तो स्‍टेराइल रेजर या ब्‍लेड से सांप काटी हुए जगह को लंबाई में थोड़ा काट दें और सकिंग पंप या मुंह से विष को चूसने की कोशिश करें। थूक को किसी भी हालत में अपने शरीर में न जाने दें बल्कि तुरंत मुंह से बाहर कर दें। यदि सांप ने सिर, गले या धड़ में काटा हो तो उस जगह को लंबाई में काटने की गलती न करें। यह भी ध्‍यान रखें कि यदि किसी कोरल सांप ने काटा है तो विष को न चूसें। साथ ही यदि आपके मुंह में किसी तरह का घाव हो तब भी विष चूसने की कोशिश न करें क्‍योंकि तब जहर के आपके शरीर में फैलने का खतरा रहेगा। सांप काटी जगह को साबुन और पानी से हलके हाथों से धो दें और उस जगह को सूखा रखें। काटी हुई जगह से जेवर और कपड़े को हटा दें और साफ कपड़े की पट्टी बांद दें। वहां होने वाली एलर्जिक प्रतिक्रिया पर नजर रखें। रोगी को चलने न दें। उसे लिटाकर रखें मगर सोने भी न दें।

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