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वर्टिगो के बारे में जानेंगे तभी उससे बच पाएंगे

इस बीमारी के मरीजों में बीमारी के लक्षण खत्‍म होना तो दूर सालों तक दबते तक नहीं हैं
भारत में करीब डेढ़ करोड़ लोग वर्टिगो नामक बीमारी से पीड़‍ित हैं मगर फ‍िर भी इस बीमारी के बारे में आप अपने आस-पास किसी से भी जानकारी लेंगे तो वो आपको शायद ही कुछ बता पाए। ये उन चुनिंदा बीमारियों में शामिल है जिसके बारे में आम लोगों की जानकारी का स्‍तर नगण्‍य है और लोग इसे आनुवांशिक बीमारी ही मानते हैं। जानकारी के अभाव की ही वजह से देश में वर्टिगो के रोगियों में से करीब 52 फीसदी डॉक्‍टर द्वारा मना किए जाने के बावजूद गाड़ी चलाना नहीं बंद करते ज‍बकि गाड़ी चलाना इनके लिए खतरनाक हो सकता है।क्‍या है वर्टिगो हमारे शरीर को संतुलित बनाए रखने की एक प्रक्रिया होती है और ये प्रक्रिया हमारे ठीक प्रकार से चलने के लिए लिए जिम्‍मेदार होती है। वर्टिगो की समस्‍या दरअसल इस संतुलन की प्रक्रिया में आने वाली खराबी को कहते हैं और इसके शिकार मरीज को किसी भी तरह के मूवमेंट का भ्रम होने लगता है और खासकर चक्‍कर आने जैसा महसूस होने लगता है। ये स्थिति मरीजों में सिर चकराने और शरीर के असंतुलित होने को बढ़ावा देती है।

 

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल कहते हैं कि वर्टिगो अपने आप में कोई बीमारी की स्थिति नहीं बल्कि एक लक्षण मात्र है। इसमें ऐसा महसूस होता है कि या तो आप खुद या आपके आस-पास का वातावरण तेजी से घूम रहा है। कई बार इसके बारे में बहुत मुश्किल से लोगों को पता चल पाता है और कई बार ये इतना गंभीर होता है कि लोग अपने रोजाना के काम भी मुश्किल से कर पाते हैं। वर्टिगो का आक्रमण कई बार अचानक होता है और ये कुछ सेकेंडों तक रहता है और कई बार ये बहुत अधिक देर तक परेशान करता है। यदि किसी को वर्टिगो की गंभीर समस्‍या है तो उसे इसके लक्षण कई दिन तक बने रह सकते हैं और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को कठिन बना सकते हैं। डॉक्‍टर अग्रवाल कहते हैं कि आमतौर पर वर्टिगो की समस्‍या कान के अंदरूनी हिस्‍से में संतुलन की प्रक्रिया गड़बड़ होने से होती है मगर कई बार मस्तिष्‍क के किसी हिस्‍से में परेशानी होने पर भी ये समस्‍या होती है। वर्टिगो किस वजह से हुआ है इसी पर इसके अन्‍य लक्षण निर्भर करते हैं। इसके अन्‍य लक्षणों में शरीर का बढ़ा तापमान, कान में सनसनाहट और सुनने में परेशानी आदि शामिल हैं। इसके अलावा चलने या खड़े होने में परेशानी, सिर चक्‍कर खाते रहना, बीमार महसूस करना आदि भी इसके कुछ लक्षण हैं।इलाज डॉक्‍टर अग्रवाल कहते हैं कि वर्टिगो के कुछ मामले समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं और इलाज की जरूरत भी नहीं पड़ती मगर कुछ लोगों में महीनों या सालों तक इसका अटैक होता रहता है। वर्टिगो किस कारण से हुआ है

 

इसका पता लगाकर इलाज किया जाता है क्‍योंकि कुछ कारणों का सटीक इलाज मौजूद है।कुछ सुझाव डॉक्‍टर अग्रवाल सलाह देते हैं कि वर्टिगो के मरीजों को अपने लक्षणों को ठीक करने के लिए कुछ सामान्‍य व्‍यायाम करना चाहिए। इसके अलावा सोते समय अपने सिर को एक या दो तकिया लगाकर बाकी शरीर से थोड़ा ऊपर रखना चाहिए। उठते समय झटके से नहीं उठना चाहिए बल्कि पहले थोड़ी देर बिस्‍तर के किनारे बैठना चाहिए और फ‍िर धीरे से उठना चाहिए। नीचे के सामान को उठाने के लिए झुकने से बचना चाहिए। अपनी गर्दन को ज्‍यादा तानने से बचना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी ऊंची सेल्‍फ से सामान उतारने के लिए गले को ज्‍यादा ऊंचा नहीं करना चाहिए। अपने सिर को सामान्‍य गतिविधि‍यों के दौरान धीरे-धीरे मूव करना चाहिए।

 

खासबात ये है कि ऐसे व्‍यायाम करने चाहिए जिससे आपके वर्टिगो को बढ़ावा मिलता है, इससे आपका मस्तिष्‍क इस स्थिति के लिए तैयार होगा और इसके कारण बीमारी के लक्षण कम होते जाएंगे। हालांकि ऐसा सिर्फ तभी करना चाहिए जब आप ये सुनिश्चित कर लें कि ऐसा करने के दौरान आप गिरेंगे नहीं और आपको किसी न किसी का सपोर्ट मिलेगा।

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