LPG News: फरवरी के युद्ध के बाद सरकार ने बनाई नई रणनीति
फरवरी से शुरू हुए ईरान और यूएस के बीच युद्ध का असर भारत में भी देखने को मिला था, जिसके चलते देश में आम जनता को तेल और गैस की किल्लतों का सामना करना पड़ा था । ऐसी स्थिति आने वाले समय में दोबारा न बने, इसको लेकर सरकार रणनीति बना रही है । जैसे पेट्रोल-डीजल में मिलावट कर घरेलू ईंधन बनाया जा रहा है, वैसे ही अब घरेलू गैस को लेकर भी सरकार ने नया प्लान बना लिया है ।
सरकार का नया प्लान: एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में
केंद्र सरकार जल्द ही एथेनॉल को रसोई गैस के साथ एक ऑप्शनल कुकिंग फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है । पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसके लिए नई नीति तैयार कर रहा है, जिसका मकसद घरों में खाना बनाने के लिए लोगों को एक और ईंधन का विकल्प देना है । इससे एलपीजी की कीमतों में भी काफी फर्क पड़ने वाला है, क्योंकि एथेनॉल एक सस्ता और घरेलू स्तर पर उत्पादित होने वाला ईंधन है, जो आयातित एलपीजी की तुलना में किफायती हो सकता है ।
क्या एथेनॉल LPG की जगह लेगा?
देश में लगातार बढ़ते एथेनॉल के उत्पादन को देखते हुए ही यह रणनीति तैयार की जा रही है, लेकिन एथेनॉल एलपीजी की जगह पूरी तरह नहीं लेगा । शुरुआत में इसे एलपीजी के साथ एक एक्स्ट्रा ऑप्शन की तरह ही पेश किया जाएगा – यानी आप चाहें तो पारंपरिक LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करें या फिर एथेनॉल-आधारित कुकिंग फ्यूल को चुनें । सरकार को इसके लिए सब्सिडी, सप्लाई चेन और स्पेशल स्टोव जैसी व्यवस्थाओं पर भी फैसला करना होगा, क्योंकि एथेनॉल को जलाने के लिए पारंपरिक LPG स्टोव काम नहीं करते हैं, इसलिए विशेष स्टोव की जरूरत होगी ।
एथेनॉल ब्लेंडेड LPG से क्या फायदा होगा?
फिलहाल सरकार पेट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल कर रही है, जिससे प्रदूषण नियंत्रित रहेगा और आयात होने वाले ईंधन पर निर्भरता कम होगी । वैसे ही एथेनॉल ब्लेंडेड एलपीजी से भी भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है, जो देश के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है । इसके अलावा, गन्ना और अन्य फसलों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों और एथेनॉल उद्योग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा ।
भारत में एथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग टारगेट
भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2025-26 तक हासिल कर लिया है, और अब एथेनॉल को रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल करना अगला बड़ा कदम हो सकता है । भारत में एथेनॉल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, और सरकार ने गन्ने के अलावा मक्का और अन्य अनाजों से एथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है, जिससे पूरे साल एथेनॉल की उपलब्धता बनी रहे । अगर कुकिंग फ्यूल के तौर पर एथेनॉल को अपनाया जाता है, तो इसकी मांग कई गुना बढ़ सकती है, जिससे आगे की योजनाओं को भी बल मिलेगा ।
क्या एथेनॉल कुकिंग फ्यूल सुरक्षित है?
एथेनॉल एक जैव ईंधन है जो नवीकरणीय स्रोतों से बनता है, और यह पर्यावरण के लिए LPG से भी अधिक सुरक्षित माना जाता है – इसमें कम कार्बन उत्सर्जन होता है, जो ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में सहायक है । हालांकि, एथेनॉल की लौ का रंग हल्का नीला होता है और यह कभी-कभी आंखों से दिखाई नहीं देता, इसलिए विशेष सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी, जिन्हें नई नीति में शामिल किया जाएगा ।
केंद्र सरकार इस पर भी काम कर रही है कि कैसे एथेनॉल स्टोव को सुरक्षित, सस्ता और आम आदमी के लिए उपयोग में आसान बनाया जाए, ताकि इसका व्यापक उपयोग हो सके ।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है । एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में लाने से एलपीजी की मांग कम होगी, आयात बिल घटेगा, किसानों को नया बाजार मिलेगा और प्रदूषण में कमी आएगी ।
हालांकि, अभी यह शुरुआती चरण में है और इसे लागू करने के लिए सरकार को बुनियादी ढांचा, स्टोव डिजाइन, सब्सिडी और वितरण तंत्र जैसे कई मुद्दों पर काम करना होगा, लेकिन अगर यह योजना सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव होगा । सरकारी योजनाओं और ऊर्जा नीतियों की ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए timesbull.com पर बने रहें ।
