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How to invest money : उज्जवल भविष्य के लिए पैसा कहां और कैसे इन्वेस्ट करे

where to invest money for good returns in india

पूरा जीवन पैसा कामने में निकल जाता है पर पैसा का सदुपयोग कैसे और कहा किया जाना चाहिए ये समझ नहीं आता है। और हम हमारे मेहनत के पैसे का सही जगह इन्वेस्ट नहीं हो पाता।इस लिए हम कुछ ऐसे टिप्स लाये है जिनको पढ़ कर आप सही जगह पैसे इन्वेस्ट और अच्छे रिटर्न्स पा सकते हो। और अपना भविष्य और आज बिना किसी पेरशानी के गुजर सकते हो।

रिटायरमेंट के लिए ऐसे करें निवेश

जीवन के सुनहरे दिनों का मतलब है, सेवानिवृत्ति के बाद की जिंदगी, जिसमें आराम ही आराम है, शरीर के लिए आराम तथा मन व आत्मा के लिए शांति। अब, सवाल उठता है कि ये होगा कैसे तो इसके लिए वित्तीय प्लानिंग करनी होगी। आप अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार किसी भी उपकरण में नियमित से कोष-निर्माण किया जा सकता है। इक्विटी से लेकर पीपीएफ तक का विकल्प इसके लिए उपयुक्त है। किस विकल्प का चुनाव किया जाना चाहिए यह व्यक्ति की उम्र और उसके जोखिम उठाने की क्षमता पर ज्यादा निर्भर करता है।

जोखिम न उठाने वाले लोग ऋण उपकरणों का चयन करते हैं जबकि ऋण उपकरणों का रिटर्न महंगाई दर कुछ ही अधिक होता है और इस वजह से बचत में वृद्धि धीमी गति से होती है। अगर समय सीमा 20-25 वर्षों की है तो निवेश उपकरण के रुप में इक्विटी सबसे बेहतर है। 20-25 वर्ष की अवधि में इक्विटी या ऐसे ही जोखिम वाले अन्य परिसंपत्ति वर्ग जितना रिटर्न देते हैं, उससे जोखिम उठाने की क्षतिपूर्ति हो जाती है। नियमित निवेश के लिए सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट योजना में निवेश करना ज्यादा फलदाई सिद्ध हो सकता है। एक सावधानी यहां निश्चित तौर पर बरती जानी चाहिए कि जैसे-जैसे सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आता जाए अपने निवेश को धीरे-धीरे ऋण उपकरणों में लगाना शुरु कर दें। सेवानिवृत्ति में केवल 5 वर्ष हैं तो इक्विटी में निवेश से बचें।

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जल्द निवेश कर लंबे समय तक रखें जारी

मेडिकल विज्ञान और तकनीक में तरक्की के कारण इंसान के जीवनकाल में सुधार हुआ है। जीवन प्रत्याशा में सुधार होने के बावजूद पर्याप्त धन और नकद प्रवाह उत्पन्न करने को लेकर काफी प्रयास नहीं हुए हैं, ताकि हम इस लंबी आयु का लुत्फ उठाने में समर्थ हो पाएं। धन संबंधी चुनौती का हल करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि हम बचत की आदत बदलें।

किसी भी निवेशक के लिए अनिवार्य है कि वे निवेश के बड़े तालाब से बाहर निकलकर लक्ष्य आधारित निवेश अपनाएं। इसमें म्युचुअल फंड जैसे बाजार से जुड़े उत्पादों का विवेकपूर्ण मिश्रण भी शामिल है। कोई भी महज 500 रुपए के निवेश से आवर्ती जमा या एसआईपी के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकता है। इसे हम गुड ईएमआई कहना चाहेंगे,क्योंकि यह एक निवेश है, न कि किश्त। क्योंकि ज्यादातर भारतीय इस संभावित लाभप्रद परिसंपत्ति वर्ग से नदारद हैं। एक पल के लिए मानें कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में दस हजार रुपए प्रति महीने की एसआईपी से शुरुआत हुई। अगर सालाना 12त्न का चक्रवृद्धि लाभ होता है, तो यह मासिक निवेश 20 साल बाद एक करोड़ और 30 साल बाद 3.5 करोड़ रुपए की पूंजी होगी।

आमदनी बढऩे के साथ बढ़ाएं निवेश

बाजार में टॉप अप के रूप में और भी ज्यादा दिलचस्प चीज है। इसमें इन वर्षों तक समान रुपए मासिक जमा कराने की बजाय आप अपनी एसआईपी पूंजी कुछ प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं या अपनी आमदनी बढऩे के साथ हर साल पैसे बढ़ा सकते हैं।

इस तरह चुनें सही म्युचुअल फंड और निवेश पर पाएं शानदार रिटर्न

भारत में 40 से अधिक असेट प्रबंधन कंपनियां और करीब 2000 म्युच्युअल फंड स्कीमें है। इस में से एक स्कीम को चुनना आसान नहीं है। अगर, आप अपनी आयु, वित्तीय स्तर और लक्ष्यों के अनुकूल अच्छी स्कीम चुनना चाहते हैं, तो यह थकाऊ प्रक्रिया है। एसआईपी अथवा एक मुश्त निवेश करने के लिए जब एक फंड का चयन करते है, तब यहां कुछ बुनियादी पहलुओं पर विचार करना चाहिए। जोखिम उठाने की क्षमता उम्र के साथ कम होती है। एक 30 साल का निवेशक 50 साल के निवेशक की तुलना में अधिक जोखिम सहन कर सकता है। इसके अलावा बढ़ती उम्र के दौरान हमारे पास जो धन है, वह हमारी बुनियादी जीवन जरूरी खर्चो को पूरा करने के लिए होगा, इसलिए हम इसे दांव पर नहीं लगा सकते है। इसलिए निवेश हमेशा सोंच-समझ कर करनी चाहिए।

नया डेवलपमेंट

चीजों को आसान एवं पारदर्शी बनाने के लिए सेबी सदैव निवेशक के साथ है। हाल ही में सेबी ने उद्योग में फंडों की संख्या आधा करने और फंड श्रेणियों के लिए संदिग्धता कम करने का निर्णय लिया है तथा आसानी से पहचानयोग्य नाम और स्पष्ट लक्ष्यों का उपयोग किया जाए। इस संबंध में 6 अक्टूबर 2017 को एक परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें 5 प्रमुख श्रेणियों में फंड के व्यापक स्पेक्ट्रम वर्ग में रखा है, साथ ही इसमें सभी श्रेणियों के तहत स्कीम का वर्गीकरण और चित्रण किया गया है। इस कदम से एक आम निवेशक के लिए सही फंड का चयन आसान होगा।

फंड चुनाव का पहला कदम

सबसे पहले तो आपको ये तय करना है कि आपके निवेश का मकसद क्या है, आप कितना निवेश कर सकते हैं और कितने समय के लिए इसमें बने रह सकते हैं। सही म्युचुअल फंड का चुनाव इसी बात पर निर्भर करता है। अगर छोटी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो डेट फंड या लिक्विड फंड चुन सकते हैं। वहीं लंबी अवधि के लिए इक्विटी फंड सही रहेंगे।

फंड प्रकार

दोनों इक्विटी के साथ डेट फंड में जोखिम है, सिर्फ अवस्था भिन्न है। एक दीर्घ अवधि सरकारी प्रतिभूति फंड में कुछ समय निवेश जोखिम एक स्मॉल कैप फंड के बराबर हो सकता है, जब खोए असेट मूल्य को फिर से पाने में लगते समय पर विचार करें।

फंड श्रेणी

इक्विटी में पोर्टफोलियो बढऩे सेे कंपनियों का बाजार पूंजीकरण जोखिम घटता है। यह मुख्यतया तरलता के कारण है। एक लार्ज कैप या सर्वोच्च 100 कंपनियों के लिए प्रबंध करने वाला फंड मिड या स्मॉल फंड की तुलना में कम जोखिम होता है।

रिटर्न

यदि आप एक या दो वर्ष से कम अवधि के लिए निवेश करते है तो अच्छा है कि डेट फंड में जाएं, वह भी लिक्विड अथवा शार्ट टर्म स्कीम में। लोगों को फंड मैनेजरों के पिछले रिकॉर्ड को देखना चाहिए न कि फंड को। लाभ कमाने के लिए घैर्य चाहिए।

जोखिम पैरामीटर

हम जानते है कि जैसे जोखिम बढ़ता है, वैसे ही रिटर्न भी बढ़ता है। यह चाहे निवेश में हो अथवा जिंदगी संबंधित कोई इवेंट में। म्युच्युअल फंड पोर्टफोलियो में जोखिम अनुमान लगाने के उपाय के बतौर मानक मेजर अपनाने की वकालत की है।