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नवरात्रि 2018 : मां दुर्गा के इस एक मंत्र के दूर होती हैं सारी समस्याएं, करना होता है केवल 11 बार जप

Navratri 2018 : Powerful ma durga mantra to get good luck and success

Navratri 2018 : जीवन में जब भी कोई बड़ी समस्या आती है तो ज्योतिष के जानकार विद्वान उस समय मां भगवती की आराधना करने की सलाह देते हैं। इसमें दुर्गासप्तशती का पाठ करना और उसके कई उपाय भी शामिल होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुर्गासप्तशती का पाठ या अनुष्ठान करने की आवश्यकता नहीं है वरन एक श्लोकी दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान करना ही काफी होता है।

एक श्लोकी दुर्गासप्तशती मंत्र इस प्रकार है-

“या अंबा मधुकैटभ प्रमथिनी,या माहिषोन्मूलिनी,
या धूम्रेक्षण चन्ड मुंड मथिनी,या रक्तबीजाशिनी,
शक्तिः शुंभ निशुंभ दैत्य दलिनी,या सिद्धलक्ष्मी:
परा, सादुर्गा नवकोटि विश्व सहिता,माम् पातु विश्वेश्वरी”

मां दुर्गा की पूजा शक्ति उपासना का पर्व है और माना जाता है कि नवरात्रि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं। कई बार इन ग्रहों का दुष्‍प्रभाव मावन जीवन पर भी पड़ता है। इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। मां की पूजा करने का विधि-विधान होता है और इस दौरान मां के विशेष मंत्रों का जप करने नवग्रह शांत होते हैं।

कौन-कौन से होते हैं यह मंत्र और कब, कैसे किया जाए इनका जाप जानें यहां:

मां की शक्तियों का जाग्रत करने का मंत्र

दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है, इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नौ शक्तियां जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। मां की इन नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए ‘नवार्ण मंत्र’ का जाप किया जाता है। नव का अर्थ ‘नौ’ तथा अर्ण का अर्थ ‘अक्षर’ होता है।
नवार्ण मंत्र: ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’

कैसे करता है नवग्रहों पर प्रभाव

1. नवार्ण मंत्र का संबंध दुर्गा मां की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है।
2. नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ऐं है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है जिनकी उपासना ‘प्रथम नवरात्रि’ को की जाती है।
3. दूसरा अक्षर ह्रीं है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा मां की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है जिनकी पूजा दूसरे दिन होती है।
4. तीसरा अक्षर क्लीं है, चौथा अक्षर चा, पांचवां अक्षर मुं, छठा अक्षर डा, सातवां अक्षर यै, आठवां अक्षर वि तथा नौवा अक्षर चै है जो मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों को नियंत्रित करते हैं।
5. इन अक्षरों से संबंधित दुर्गा की शक्तियां क्रमशः चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री हैं, जिनकी आराधना क्रमश : तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, आठवें तथा नौवें नवरात्रि को की जाती है।
6. इस नवार्ण मंत्र के तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं और इसकी तीन देवियां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती हैं।
7. नवार्ण मंत्र का जाप 108 दाने की माला पर कम से कम तीन बार अवश्य करना चाहिए।

नवरात्रि पूजन विधि

नवरात्रि की प्रतिपदा के दिन प्रातः स्नान करके घट स्थापन के बाद संकल्प लेकर दुर्गा की मूर्ति या चित्र की षोडशोपचार या पंचोपचार से गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि निवेदित कर पूजा करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

शुद्ध पवित्र आसन ग्रहण कर ऊं दुं दुर्गाये नमः मंत्र का रुद्राक्ष या चंदन की माला से पांच या कम से कम एक माला जप कर अपना मनोरथ निवेदित करें। पूरी नवरात्रि प्रतिदिन जप करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूरी होती है।

वर्ष में चार नवरात्रों का वर्णन मिलता है – दो गुप्त एवं दो प्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष नवरात्रों में एक को शारदीय व दूसरे को वासन्तिक नवरात्र कहा जाता है। नवरात्र की पूर्व संध्या में साधक को मन में यह संकल्प लेना चाहिए कि मुझे शक्ति की उपासना करनी है।

उसे चाहिए कि वह रात्रि में शयन ध्यानपूर्वक करे। प्रातःकाल उठकर भगवती का स्मरण कर ही नित्य क्रिया प्रारंभ करनी चाहिए। नीतिगत कार्यों से जुड़कर अनीतिगत कार्यों की उपेक्षा करनी चाहिए। आहार सात्विक लेना चाहिए और आचरण पवित्र रखना चाहिए।

नवरात्रि में सम्यक् प्रकार से सत्याचरण करते हुए साधक शक्ति का अर्जन कर सकता है। पूजन मन को एकाग्रचित्त करके करना चाहिए। यदि संभव हो तो नित्य श्रीमद्भागवत, गीता, देवी भागवत आदि ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए, इससे मां दुर्गा की पूजा में मन अच्छी तरह लगेगा। जिनके परिवार में शारीरिक, मानसिक या आर्थिक किसी भी प्रकार की समस्या हो, वे मां दुर्गा से रक्षा की कामना करें। इससे उन्हें चिंता से मुक्ति भी मिलेगी और मन भी उत्साहित रहेगा।

नवरात्र आराधना के समय निम्नोक्त बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होंगी और साधक को वांछित फल की प्राप्ति होगी।

कई बार ऐसा होता है कि मां दुर्गा की पूजा विधि-विधानपूर्वक करने पर भी वांछित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती। भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि दुर्गा जी की पूजा में दूर्वा, तुलसी, आंवला आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करें। लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करें।

लाल फूल नवरात्र के हर दिन मां दुर्गा को अर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार घर में मां दुर्गा की दो या तीन मूर्तियां रखना अशुभ है।

मां दुर्गा की पूजा सूखे वस्त्र पहनकर ही करनी चाहिए, गीले कपड़े पहनकर नहीं। अक्सर देखने में आता है कि महिलाएं बाल खुले रखकर पूजन करती हैं, जो निषिद्ध है। विशेष कर दुर्गा पूजा या नवरात्रि में हवन, पूजन और जप आदि के समय उन्हें बाल खुले नहीं रखने चाहिए।

दुर्गा सप्तशती की महिमा

मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्माजी ने मनुष्यों की रक्षा के लिए परमगोपनीय, कल्याणकारी देवी कवच के पाठ आर देवी के नौ रूपों की आराधना का विधान बताया है, जिन्हें नव दुर्गा कहा जाता है। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी तक देवी के इन रूपों की साधना उपासना से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है, क्योंकि यह कर्म, भक्ति एवं ज्ञान की त्रिवेणी है। यह श्री मार्कण्डेय पुराण का अंश है। यह देवी माहात्म्य धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत् पाठ से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

सर्वकल्याण के लिए

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।

बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।

आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
विघ्ननाशक मंत्र सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम्।।

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