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New Education Minister – NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय

New Education Minister – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी। यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था।

NEET विवाद से शुरू हुआ छात्र आंदोलन

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई थी, जब NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए। छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। धीरे-धीरे यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन 35 दिनों तक चला। छात्रों की मुख्य मांग थी कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। प्रधान के इस्तीफे को ही उनका मुख्य मांग थी, जिसे अभिजीत दीपके (बोस्टन यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट) के नेतृत्व वाले समूह ने उठाया था।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने छात्रों के हित में और यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया कि चल रहे विरोध प्रदर्शनों का फायदा ‘अराष्ट्रीय ताकतों’ द्वारा न उठाया जाए।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “चार दशकों से अधिक समय से मैंने छात्रों, शिक्षकों और शैक्षिक सुधारों के लिए खुद को समर्पित किया है। मैंने हमेशा माना है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है।”

प्रह्लाद जोशी के सामने क्या चुनौतियां हैं?

प्रह्लाद जोशी ऐसे समय शिक्षा मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे हैं, जब देश की परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती है। कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा सांसद रहे जोशी को निम्नलिखित कार्यों का सामना करना होगा:

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन: सरकार ने पहले ही NTA में 47 अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की है।

परीक्षाओं में पारदर्शिता: NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाओं को कंप्यूटर-आधारित स्वरूप में लाने की तैयारी है।

NEP 2020 का क्रियान्वयन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह लागू करना, जिसमें नई पाठ्यचर्या और NCERT की नई किताबें शामिल हैं।

स्कूली शिक्षा में सुधार: दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार कराने का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाना है।

इस्तीफे के बाद क्या हुआ?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद, CJP के प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि उन्होंने सरकार की गारंटी के बाद ‘सद्भावना’ से प्रदर्शन समाप्त कर दिया है।

Conclusion

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के साथ ही NEET-UG पेपर लीक विवाद पर विराम लग गया है। प्रधान का इस्तीफा छात्रों की लगातार मांग के बाद आया, जबकि जोशी के सामने अब परीक्षा प्रणाली में सुधार, NEP 2020 का क्रियान्वयन और छात्रों का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौतियां हैं। नए शिक्षा मंत्री का कार्यकाल भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इस तरह की अन्य राजनीतिक और सरकारी खबरों के लिए बने रहें timesbull.com पर।