LPG Crisis: भारत में कभी नहीं आएगी LPG की कमी! सरकार उठाने जा रही यह बड़ा कदम

मिडिल ईस्ट (middle East) में संघर्ष के चलते दुनियाभर के देशों में इन दिनों कच्चे तेल (Crude Oil) व गैस की किल्लत पनपने लगी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग बाधित होने से कई देशों पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है.

LPG Crisis Update: मिडिल ईस्ट (middle East) में संघर्ष के चलते दुनियाभर के देशों में इन दिनों कच्चे तेल (Crude Oil) व गैस की किल्लत पनपने लगी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग बाधित होने से कई देशों पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है. हालांकि, भारत सरकार (Indian Government) की मानें तो उसके पास अभी काफी दिनों तक पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) और एलपीजी (LPG) का स्टॉक है. लेकिन भारत सरकार ने भविष्य में ऐसी किसी दिक्कत से निपटने के लिए काम शुरू कर दिया है.

केंद्र सरकार ने अपनी सुरक्षा को महत्व देते हुए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू किया है. सरकार अब खाड़ी देशों से गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनश्चित करने के लिए समुद्र के नीचे एक सीधी पाइप लाइन बिछाने की योजना पर काम कर रही है. इस परियोजना को पूरा होने में कुछ समय लगेगा, लेकिन भविष्य में फिर गैसकी  कमी जैसी दिक्कतें नहीं होंगी.

पाइपलाइन में कितना आएगा खर्च?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों की मानें तो ओमान से भारत क प्रस्तावित इस मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप वाटर पाइपलाइन की अनुमानित लागत करीब 40000 करोड़ रुपये तक आने की संभावना है. अगर इसे जल्द मंजूरी मिली तो इसका निर्माण कार्य पूरा होने में पांच से सात साल का समय लग सकता है. यह पाइपलाइन सागर के नीचे 2000 किलोमीटर लंबी बिछाई जाएगी.

इसके जरिए ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ने का काम करेगी. एक अनुमान के अनुसार, यह पाइपलाइन समुद्री में करीब 3450 मीटर की गहराई में बिछाई जा सकती है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन में से एक बन जाएगी. इसके जरिे करीब 31 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने का काम भी किया जा सकेगा.

जानिए क्यों पड़ी इस पाइपलाइन की आवश्यकता?

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. वर्तमान में इसकी खपत 190 से 195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर तक है. इसके 2030 तक बढ़कर 290-300 होने की संभावना है. वर्ष 2025 में भारत के एलएनजी आयात का करीब दो तिहाई हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आयातित हुआ.

फरवरी में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के संघर्ष के चलते यह मार्ग बाधित हो गया. इससे एलएनजी आपूर्ति में 20 फीसदी तक की गिरावट आई. इससे कीमतें आसमान छूने लगीं.सामान्य समय में जो गैस 10 से 12 प्रति MMBtu मिलती थी.

वैश्विक संकट के दौरान उसकी कीमत 24 से 25 तक पहुंच गई. इस बीच एक अधिकारी की मानें तो भारत को अब एलएनजी स्पॉट मार्केट की निर्भरता से आगे बढ़ना है. एक समर्पित पाइपलाइन हमें किसी भी मध्यस्थ देश या समुद्री चोक प्वाइंट जैसे कि होर्मुज पर निर्भर हुए बिना स्थिर और सस्ती गैस प्रदान कर सकेगी.

FAQs: People Also Ask

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Vipin Kumar
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Vipin Kumar is an experienced journalist with 8 years in the media industry, having worked with prominent news platforms including Dainik Jagran and News24. Currently serving at Timesbull.com for almost four years, dedicated to delivering truthful, transparent, and people-centric news that informs and empowers readers. Committed to transparent, ethical, and accurate journalism.

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