Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान! अब प्राइवेट स्कूलों में नहीं ली जाएगी मनमानी फीस, जानें पूरी खबर

Sanjay mehrolliya4 min read

Delhi News:  राजधानी के निजी स्कूलों की अनियंत्रित फीस वृद्धि को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली फीस एक्ट को मंजूरी दे दी है। इस कानून के पारित होते ही सभी निजी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए फीस तय करने की सख्त और पारदर्शी प्रक्रिया लागू हो जाएगी। अब इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां से पारित होने के बाद यह कानून का रूप ले सकेगा।

कैबिनेट ने विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी

इस फैसले की जानकारी देते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “यह दिल्ली के इतिहास का ऐतिहासिक और साहसिक फैसला है। कैबिनेट ने आज इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है।” उन्होंने कहा कि दिल्ली के सभी 1677 स्कूल – चाहे वे सरकारी सहायता प्राप्त हों, निजी हों या गैर सहायता प्राप्त हों – इस कानून के दायरे में आएंगे।

पहली बार पूरी तरह से फुलप्रूफ फीस कानून लागू होगा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, यह पहली बार है जब दिल्ली सरकार ऐसा विधेयक लेकर आई है जो पूरी तरह से फुलप्रूफ है और स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकेगा। बिल में हर स्कूल के लिए स्पष्ट फीस निर्धारण प्रक्रिया और दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। इस महीने की शुरुआत में सीएम गुप्ता ने फीस बढ़ोतरी की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि कई स्कूलों को नोटिस भेजे गए हैं।

उन्होंने दोहराया कि सरकार बच्चों

उन्होंने दोहराया कि सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार और पारदर्शिता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फीस बढ़ोतरी से अभिभावक परेशान, किया विरोध पिछले कुछ महीनों से फीस बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली में कई जगहों पर अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया। 42 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि पिछले तीन सालों में स्कूलों ने फीस में 50 से 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।

इस मुद्दे पर बढ़ रहे जनाक्रोश

इस मुद्दे पर बढ़ रहे जनाक्रोश को देखते हुए सरकार के इस कदम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। अब हर स्कूल को फीस संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा, निगरानी होगी बिल के लागू होने के बाद दिल्ली के हर निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले राज्य सरकार की दिशा-निर्देशों और प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके साथ ही स्कूलों की निगरानी के लिए एक नियामक तंत्र भी लागू किया जाएगा, ताकि छात्रों और उनके अभिभावकों के हितों की रक्षा हो सके।

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Sanjay mehrolliya

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