ITR: आप को ₹60000 टैक्स छूट का लाभ मिलेगा या नहीं,जानिए क्या कहता है नियम
Kumar Ajeet•4 min read
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देश में इस समय आईटीआर रिटर्न दाखिल करने की प्रकिया चल रही है,इस समय करोड़ों टैक्स पेयर ने अपना आईटीआर भर दिया है। हालांकि कुछ लोगों को बड़ी परेशानी सामने आ रही है,जैसे फॉर्म,नियम और कटौती से जुड़ी कई समास्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तो वही इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A (Section 87A) के तहत मिलने वाली छूट का निमय भी टैक्सपेयर्स को परेशान कर रहा है।
ऐसे में आप भी अपने आईटीआर रिटर्न को सही तरिके से कर पाएं तो यहां पर जरुरी जानकारी से इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A (Section 87A) के बारे में सारे भ्रम दूर हो जाएगें।
जानिए क्या है सेक्शन 87A?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A (Section 87A) में लोगों को कुल टैक्स योग्य आय एक निश्चित सीमा से कम होने पर टैक्स में छूट मिलती है। हालांकि यह छूट टैक्स के कुल कैलकुलेशन के बाद मिलती है जिससे टैक्स देनदारी पर घटाई जाती है।
हालांकि टैक्स पेयर को बड़ी परेशानी आ रही है,बता दें कि मोदी सरकार ने बजट 2025 में नई टैक्स रीजीम को आकर्षक बना दिया है,जिससे सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली छूट को बढ़ाकर ₹60, 000 कर दी,जो इस वित्त वर्ष 2025-26 (आय वर्ष 2026-27) से लागू होगा। इससे पहले की टैक्सपेयर्स मौजूदा रिटर्न (AY 2025-26) में ही इस छूट के बारे में समझ नहीं पा रहे है। जिससे आप से कोई गलती न हो जाए तो जरुरी जानकारी को ध्यान में रखें।
सरकार ने पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ₹5 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर ₹12, 500 की अधिकतम छूट प्रदान की है,तो वही नई टैक्स व्यवस्था में यह ₹7 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर ₹25, 000 की अधिकतम छूट मिल जाती है।
जिससे यदि किसी ने नया टैक्स सिस्टम चुना है और आपकी टैक्से देनदारी कमाई कम ₹7 लाख या उससे कम है,तो आपको ₹25, 000 तक की छूट मिलेगी। यहां पर इस कॉडिशन में आपका पूरा टैक्स शून्य हो सकता है। हालांकि पुराने सिस्टम में यह छूट सिर्फ ₹5 लाख इनकम तक है,जिससे अधिकतम सीमा ₹12, 500 मिली हुई है।
सरकार ने बजट 2025 में ऐलान किया था कि वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) से नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर ₹60, 000 तक की छूट मिलेगी। ध्यान रहें कि अभी जो ITR फाइल हो रही है,वह वित्त वर्ष 2024-25 (असेसमेंट ईयर 2025-26) के लिए है। इसमें पहले की टैक्स नियम लागू है,ऐसे में नई टैक्स व्यवस्था में ₹7 लाख तक और पुरानी में ₹5 लाख तक की आय पर ही छूट हासिल कर सकते हैं।