अगर पोर्ट करने जा रहे हैं हेल्थ इंश्योरेंस, तो इन बातों पर जरूर गौर करें

आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि आने वाले समय में इलाज के भारी-भरकम खर्चों में यही मदद करता है। पर कई बार ऐसा होता है कि मौजूदा पॉलिसी आपके लिए पूरी तरह सही नहीं होती है। इसे देखते हुए अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को दूसरी बीमा कंपनी में पोर्ट कर दिया है तो आपको ध्यान देना होगा, क्योकि इससे आपको नुकसान हो सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट करने का क्या मतलब है?

मौजूदा पॉलिसी को किसी दूसरी बीमा कंपनी में ट्रांसफर कर लिया है। नई पॉलिसी में मौजूदा पॉलिसी में कुछ सेवाएं और वोटिंग पीरियड के फायदे मिल सकते हैं। हालांकि इसमें कई तरह की मुश्किलें आती हैं।

इसे भी पढ़ें- Got an Old ₹5 Tractor Note? You Can Sell It Online for ₹4-5 Lakh – Check If Yours Is Valuable

डॉक्युमेंट और टाइमिंग की मुश्किल

पॉलिसी को पोर्ट करने के लिए मौजूदा पॉलिसी की जानकारी, क्लेम हिस्ट्री और मेडिकल डिक्लेरेशन आदि डॉक्यूमेंट देने होते हैं। बता दें कि पोर्ट करने की रिक्वेस्ट पॉलिसी के रिन्यूअल से कम से कम 45 दिन पहले और 60 दिन से पहले देनी चाहिए। अगर इस समय में नहीं किया तो रिक्वेस्ट को रिजेक्ट किया जा सकता है।

प्रीमियम को लेकर परेशानी

जब पॉलिसी पोर्ट कराते हैं तो पुरानी पॉलिसी के जैसे लॉयल्टी डिस्काउंट या खास कवरेज जैसे घर पर इलाज की सर्विस नई पॉलिसी में ट्रांसफर नहीं  होते हैं।

दोबारा शुरू हो सकता है वेटिंग पीरियड

नियमों के अनुसार पुरानी वेटिंग पीरियड की क्रेडिट दी जाती है, लेकिन कुछ बीमा कंपनियां नई बिमारियों के लिए दोबारा वोटिंग पीरियड लागू कर सकती हैं। ऐसे में पॉलिसी के नियमों से अच्छे से पढ़ लें।

इसे भी पढ़ें- बेटियों नहीं पा रही हैं लाडली योजना का फायदा, सामने आई हैरान करने वाली बात!

पोर्ट करने की रिक्वेस्ट हो सकती है रिजेक्शन

नई बीमा कंपनी ग्राहक के मेडिकल हिस्ट्री को देखकर पॉलिसी देगी या नहीं ये तय करती है। वहीं बुजुर्ग या गंभीर बीमारी वाले ग्राहकों को ज्यादा प्रीमियम भरना पड़ सकता है। साथ ही पोर्टिंग की रिक्वेस्ट रिजेक्ट की जा सकती है।

कवरेज का खतरा

सभी पॉलिसी एक तरह की नहीं होती हैं। मतलब अगर किसी ग्राहक ने कोरोना से पहले  3 लाख रुपये की बेसिक पॉलिसी ले रखी थी तो ऐसे में ज्यादा कवरेज की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए नई पॉलिसी के साथ टॉप-अप या सुपर टॉप-अप प्लान जोड़ देना चाहिए, जिससे कम कीमत में अधिक सुरक्षा मिलती है।

Related Stories

Latest
1
अब चेहरा दिखाकर करें ट्रांजैक्शन, जानिए IPPB ने शुरू की नई जबरदस्त सुविधाBiz
2
InvITs vs Mutual Funds: निवेश करने के लिए कौन बेहतर, किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा, एक्सपर्ट से जानेंBiz
3
37 खास दवाइयां होंगी सस्ती! सरकार ने तय कर दी डायबिटीज, हार्ट की दवाओं की नई कीमतBiz
4
आपके PF अकाउंट में कंपनी कैसे करती है अंशदान, जरूर जान लें फायदे में रहेंगेBiz
5
EPFO कहां निवेश करता है PF का पैसा, यहां जानें डिटेल सेBiz
6
अभी तक नहीं मिला इनकम टैक्स रिफंड, हो सकती है बैंक डिटेल्स गलत! ऐसे करें चेकBiz
7
Personal Loan: पर्सनल लोन से जुड़ी जरूरी बातें, अक्सर लोग इनपर करते हैं भरोसा!Biz
8
रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैश बैक क्रेडिट कार्ड कहां मिल रहा जबरदस्त फायदा, जानिएBiz
9
SIP : 30 की उम्र में कर दिया म्युचुअल फंड्स में निवेश, तो सुख चैन के साथ कटेगा बुढ़ापा!Biz
10
SBI और HDFC नहीं ये बैंक दे रहे 8.25% मोटा ब्याज! FD पर कमाई करने के लिए देखें डीटेल्सBiz