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मुसलमानों को आंख उठाके देखा तो खैर नहीं, इस CM ने दी चुनौती, सांप्रदायिक हिंसा भड़क रही

Zohaib Naseem1 min read
March 22, 2025 at 4:44 PM IST

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार (Deputy CM Ajit Pawar) ने खुद द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में मुसलमानों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत अनेकता में एकता का प्रतीक है. वहीं हमें किसी भी विभाजनकारी ताकतों के जाल में नहीं फंसना चाहिए. हमने अभी होली मनाई है, गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है, हमें ये सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाने हैं क्योंकि एकता ही हमारी असली ताकत है.

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अजित पवार आपके साथ है

अजित पवार ने आगे कहा कि “मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपका भाई अजित पवार आपके साथ खड़ा है, जो भी हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को आंख दिखाने की हिम्मत करेगा, अगर कोई भी दो समूहों के बीच लड़ाई पैदा करके शांति भंग करता है और कानून को अपने हाथ में लेता है, तो वह कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा, उसे माफ नहीं किया जाएगा. रमजान के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “रमजान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, यह मानवता, त्याग और आत्मनिरीक्षण का प्रतीक है। यह आत्मसंयम सिखाता है और जरूरतमंदों के दुख-दर्द को समझने की प्रेरणा देता है। रोजा रखने से न केवल शरीर, बल्कि मन और आत्मा भी शुद्ध होती है।

चर्चाओं को तेज कर दिया

भारत वास्तव में अनेकता में एकता की मिसाल है।” आपको बता दें कि पवार की इस प्रतिक्रिया को सहयोगी पार्टी भाजपा नेता नितेश राणे के बयान का करारा जवाब माना जा रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। खासकर तब जब महाराष्ट्र में कई जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क रही है। औरंगजेब की कब्र पर विवाद के बाद नागपुर में इसने भीषण हिंसा का रूप ले लिया। भाजपा नेता नितेश राणे ने हाल ही में कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में एक भी मुसलमान नहीं था। राणे की टिप्पणी के बारे में जब अजित पवार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नेताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि सार्वजनिक रूप से उनके द्वारा दिए गए बयानों से सांप्रदायिक तनाव पैदा न हो।

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भूमिका निभानी होती है

अजित पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में माहौल गरम है। नागपुर शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में शुक्रवार को 14 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। पवार की इस अपील को सामाजिक सौहार्द की दिशा में एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी कुछ दिन पहले नेताओं को भाषा पर संयम बरतने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था, “एक मंत्री के तौर पर हमें एक निश्चित भूमिका निभानी होती है।

(पूर्व प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहीं उल्लेख किया था कि एक मंत्री के तौर पर हमें राजधर्म का पालन करना होता है। इसलिए हमें अपनी निजी राय, पसंद-नापसंद को किनारे रखना होगा। हमने संविधान की शपथ ली है और संविधान ने हमें किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय न करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

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Zohaib Naseem

I am an experienced anchor, producer, and content writer with a strong background in the media industry. Having worked with…

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