PM-RAHAT Yojana:  सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत, मिलेगा 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज

Adarsh P6 min read

PM-RAHAT Yojana: केंद्र सरकार के द्वारा लोगों के लिए खास स्कीम को संचालित किया जा रहा है। बता दें सरकार के द्वारा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के लिए खास स्कीम को संचालित किया है। दरअसल कैशलेस इलाज देने वाली योजना का नाम बदल दिया है। पहले यह योजना कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम के नाम से जानी जाती थी, लेकिन अब इसे नया नाम दिया गया है – प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट यानी PM-RAHAT योजना। इस संबंध में सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में किए गए संशोधन के तहत लागू किया गया है।

जानें क्या है योजना का उद्देश्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन केवल योजना के नाम से जुड़ा है। संशोधित प्रावधान को कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स (अमेंडमेंट) स्कीम, 2026 कहा जाएगा। राजपत्र में प्रकाशित होते ही नया नाम प्रभावी हो गया है। हालांकि योजना का मूल उद्देश्य वही है, यानी सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत और बिना भुगतान के इलाज उपलब्ध कराना।

किसे मिलेगा लाभ

यह योजना केवल राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं है। यदि दुर्घटना किसी राज्य मार्ग, शहर की सड़क या गली में भी होती है, तब भी पीड़ित को इसका लाभ मिलेगा। सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक लागू रहेगी। इसका मकसद यह है कि शुरुआती गंभीर इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक दबाव का सामना न करना पड़े।

गोल्डन आवर का महत्व

मंत्रालय के अनुसार सड़क हादसे के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है। इस समय के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए योजना में त्वरित इलाज और एम्बुलेंस सुविधा पर जोर दिया गया है।

आपातकालीन सहायता कैसे मिलेगी

यदि कहीं सड़क दुर्घटना होती है, तो कोई भी व्यक्ति 112 आपातकालीन हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है। यह कॉल सीधे इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम से जुड़ती है। इसके जरिए नजदीकी एम्बुलेंस और अस्पताल की व्यवस्था तुरंत की जाती है, ताकि इलाज में देरी न हो।

इलाज में क्या शामिल है

योजना के तहत 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध है। मरीज को स्थिर करने के लिए अलग-अलग समय सीमा तय की गई है। सामान्य स्थिति में 24 घंटे तक का स्टेबलाइजेशन उपचार दिया जा सकता है। यदि हालत गंभीर है और जान को खतरा है, तो 48 घंटे तक प्राथमिक और आपातकालीन उपचार कवर होगा। इलाज शुरू करने से पहले पुलिस द्वारा दुर्घटना की पुष्टि जरूरी है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाती है।

क्लेम प्रक्रिया और भुगतान

हादसे की रिपोर्ट से लेकर अस्पताल को भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर की जाती है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट और ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 का उपयोग होता है। पुलिस को 24 से 48 घंटे के भीतर दुर्घटना की पुष्टि करनी होती है। इसके बाद भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से सीधे अस्पताल को किया जाता है।

शिकायत करने का क्या है सिस्टम

यदि किसी पीड़ित या उसके परिवार को योजना से संबंधित कोई समस्या आती है, तो वे जिला रोड सेफ्टी कमेटी से संपर्क कर सकते हैं। यह समिति जिला कलेक्टर या मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में कार्य करती है और शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारी नियुक्त होते हैं।

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