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Indian Railways: ट्रेन में सफर करना होगा आसान, रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर पर बनाया बड़ा प्लान

भारत सरकार (indian government) की ओर से रेलवे की दिशा में कई सकारात्मक फैसले सालाना लिए जाते हैं. सरकार का मकसद लोगों को कम समय में आरामदायक सफर उपलब्ध कराना...

: भारत सरकार (indian government) की ओर से रेलवे की दिशा में कई सकारात्मक फैसले सालाना लिए जाते हैं. सरकार का मकसद लोगों को कम समय में आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है. देशभर में अब बड़ी संख्या में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों () को दौड़ाने पर काम चल रहा है. अभी गुवाहाटी -हावड़ा रूट पर एक ही वंदे भारत स्लीपर चल रही है.

इस ट्रेन का टिकट लेकर यात्री कम समय में अपनी नियत दूरी तय कर लेते हैं. इंडियन रेलवे अगले कुछ ही सालों में 250 से नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने का प्लान बना रहा है. इन सभी का मकसद लंबे सफर को कम समय में पूरा कराना है. यात्रियों को भी विश्व-स्तीरय सेवा भी अनुभव देना होगा.

शुरू हो चुकी पहली वंदे भारत स्लीपर

पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस साल की शुरुआत में संचालित की गई थी. इसे गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर शुरू किया गया था, जिसमें 16 कोच शामिल हैं. इससे सफर जहां आरामदायक हुआ, वहीं समय की भी बचत होने लगी. यह उन कई ट्रेनों में से पहली थी जिन्हें भारतीय रेलवे ने लाइन में लगाया है. इस नई ट्रेन की स्पीड की बात करें तो 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक है.

अगर अनुमति हो तो इसकी रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक चलाई जा सकती है. इस प्रोजेक्ट में कई बार देरी हुई है, और पहले दस ट्रेन सेट अपने तय समय से काफ़ी पीछे चल रहे हैं. भारतीय रेलवे की मानें तो नई टेक्नोलॉजी के लिए काफ़ी ज़्यादा टेस्टिंग की आवश्यकता पड़ी है. इसके प्रोटोटाइप से मिले फीडबैक का भी इस्तेमाल ट्रेन सेट में सुधार करने के लिए किया जा रहा है.

गेम चेंजर साबित होगा रेलवे का प्रेजेक्ट

क्या आपको पता है कि इंडियन रेलवे में यात्रियों के सफर के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रोजेक्ट का अलग ही मायने हैं. सरकार का यह कदम एकदम गेम-चेंजर साबित होने की संभावना है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रोजेक्ट है. वंदे भारत स्लीपर स्टाइल की कुल 260 ट्रेनें चलाने की तैयारी है. इनमें पहली दस ट्रेनें BEML द्वारा चेन्नई के ICF के सहयोग से बनाने का काम किया जा रहा है.

ट्रेन सेट के लिए हज़ारों करोड़ का एक प्रोजेक्ट दो कंसोर्टियम को भी दिया गया है. इनमें से 120 ट्रेनें Kinet बनाएगा, जो एक भारत-रूस संयुक्त उद्यम है, और बाकी 80 ट्रेनें Titagarh-BHEL कंसोर्टियम बनाने का काम करेगा. सूत्रों की मानें तो Kinet का पहला प्रोटोटाइप रेक 2027 की पहली तिमाही तक तैयार होने की उम्मीद है. प्रथम वर्ष मं Kinet को 16 कोच वाले 12 ट्रेन सेट बनाने की संभावना बनी हुई है.

हर साल 25 ट्रेन सेट बनाने का लक्ष्य

इंडियन रेलवे दूसरे साल में 18 ट्रेन सेट, और तीसरे साल से आगे हर साल 25 ट्रेन सेट बनाने का लक्ष्य बनाया गया है. ये ट्रेनें आम तौर पर BEML वंदे भारत स्लीपर वेरिएंट जैसी ही नज़र आएंगी. हालांकि, Kinet ने इसमें डिज़ाइन से जुड़े कई सुधार करने का काम किया है. आपको हमारी जानकारी कैसी लगी, कमेंट सेक्शन में अपनी राय दे सकते हैं.

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Vipin Kumar is an experienced journalist with 8 years in the media industry, having worked with prominent news platforms including Dainik Jagran and News24. Currently serving at Timesbull.com for almost four years, dedicated to delivering truthful, transparent, and people-centric news...

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