Home Loan: कई लोग होम लोन लेने के बाद अपनी EMI बाउंस कर देते हैं। इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि लगातार EMI बाउंस होने पर बैंक कार्रवाई करता है, जो आपके लिए महंगा साबित हो सकता है।

जब होम लोन की EMI नहीं चुकाई जाती है, तो बैंक कार्रवाई करता है, लेकिन लोन लेने वालों को इस बात की पूरी जानकारी नहीं होती है कि यह कब हो गई है। बैंक कई मौके देता है, ताकि ग्राहक EMI चुका सके। अगर कर्जदार को बार-बार मौका देने के बावजूद EMI नहीं चुकाई जाती है, तो बैंक कार्रवाई करता है।

जब कर्जदार होम लोन की EMI नहीं चुकाता है, तो बैंक पांच अलग-अलग तरह की कार्रवाई करता है। यह एक बार में नहीं होता है, बल्कि ग्राहक को कई मौके दिए जाते हैं। पहली बार EMI नहीं चुकाने पर ग्राहक बैंक की नजर में आ जाता है।

अगर दूसरी EMI छूट जाती है, तो बैंक कर्जदार को भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजता है। अगर तीसरी EMI भी छूट जाती है, तो बैंक ग्राहक को लीगल नोटिस भेजकर बकाया राशि चुकाने के लिए कहता है।

चौथी बार दिया जाता है यह नोटिस:

अगर ग्राहक लगातार पांचवीं EMI नहीं भरता है तो बैंक कर्जदार को घर की नीलामी का नोटिस भेजता है, जिसमें बकाया राशि जमा करने के लिए कहते हुए घर बेचने की बात साफ तौर पर लिखी होती है।

पांचवीं बार नीलाम होती है प्रॉपर्टी:

अगर लगातार लोन की EMI नहीं भरी जाती है तो बैंक प्रॉपर्टी की नीलामी कर देता है। यह कदम तब उठाया जाता है जब प्रॉपर्टी की नीलामी के नोटिस के बाद भी लोन का पैसा नहीं चुकाया जाता है। इसके लिए बैंक नीलामी की रकम से कोर्ट में सिविल केस दायर करके ग्राहक से बकाया लोन की रकम वसूलता है।

ऐसे मिल सकती है राहत:

अगर आप होम लोन की किस्त न भरने पर बैंक की कार्रवाई से बचना चाहते हैं तो बैंक मैनेजर से मिलकर पहले किए गए सभी क्रेडिट पेमेंट का सबूत दिखा सकते हैं। अगर आपने पहले समय पर भुगतान किया है तो आपको राहत मिल सकती है। अगर बैंक किसी निवेश के कागजात के लिए कोलैटरल मांगता है तो उसे गिरवी रखने पर भी आपको राहत मिल सकती है।

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