OLD Age Pension: वृद्धा पेंशन के लिए नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, आवेदन से पहले जानें नया नियम

अगर वृद्धा पेंशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो पहले नए नियम जान लें. प्रशासन की ओर से आवेदन के लिए नियमों में कुछ बदलाव किया गया है. उम्र को सत्यापित कराने के लिए आधार कार्ड के अलावा भी आपको कोई और भी दस्तावेज दिखाना होगा.
vipin kumar

Old Age Pension Rules Changed: अगर आप उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेते हैं तो फिर अब कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा. वृ्द्धा पेंशन प्राप्त करने वालों के लिए कुछ जरूरी नियमों में बदलाव कर दिया गया है. अभी तक लोग आधार कार्ड के माध्यम से पेंशन के लिए अप्लाई करते थे, लेकिन अब सरकार की ओर से नियमों को थोड़ा सख्त कर दिया है.

अब नए नियम लागू होने के बाद आधार कार्ड के आधार पर ही आपकी उम्र नहीं मानी जाएगी. परिवार में कोई शख्स वृद्धा पेंशन लेना चाहता है तो उम्र से जुड़े दूसरे जरूरी दस्तावेज भी देने की जरूरत पड़ेगी. प्रशासन के अनुसार, यह फैसला फर्जी लाभार्थियों को रोकने और योजनाओं में पारदर्शिता लाने के मकसद से लिया गया है.

आधार कार्ड से नहीं बनेगी बात

मथुरा प्रशासन की ओर से जारी नए दिशा-निर्देश में स्पष्ट कर दिया गया कि अब वृद्धा पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए केवल आधार कार्ड ही काफी नहीं होगा. मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर पूजा गुप्ता के मुताबिक, अब आवेदकों को जन्मतिथि से जुड़े दूसरे वैध दस्तावेज दमा करने की जरूरत पड़ेगी.

वहीं, नए नियमों के अनुसार, अब आवेदकों को अपनी सही जन्मतिथि साबित करने के लिए दो मुख्य दस्तावेजों में से एक देना पड़ेगा. इसके लिए आपको परिवार रजिस्टर (कुटुंब रजिस्टर) की प्रमाणित प्रति भी दे सकते हैं. इसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण होता है. इसके अलावा अगर परिवार में बुजुर्ग पढ़े-लिखे हैं, तो उनकी मार्कशीट या सर्टिफिकेट जिसमें जन्मतिथि लिखी हो, उसे मान्य होगा.

जानिए क्यों बदले नियम

क्या आपको पता है कि अब तक आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को ही उम्र का प्रमाण मान लिया जाता था. लेकिन प्रशासन के अनुसार, कई मामलों में आधार कार्ड में अनुमानित उम्र दर्ज रहती थी. इसकी वजह से कुछ ऐसे लोग भी योजनाओं का लाभ लेने लगे, जो वास्तव में पात्र नहीं थे. अधिकारियों की मानें तो नए नियम लागू होने के बाद फर्जी या गलत तरीके से लाभ लेने वाले लोगों पर रोक लगाई जा सकती है.

बुजुर्गों की बढ़ सकती परेशानी

मथुरा प्रशासन का यह कड़ा फैसला माना जा रहा है, जो पारदर्शिता के लिहाज़ से लिया गया है. इससे कई बुजुर्गों की मुश्किलें भी बढ़ती दिखाई दे सकती हैं. ग्रामीण इलाकों में ऐसे कई बुजुर्ग हैं जिन्होंने कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की. ऐसे लोगों के पास शैक्षिक प्रमाणपत्र मौजूद नहीं हैं.