रात के समय सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जरूरी बरतें ये सावधानियां, वरना हो सकते हैं हादसे का शिकार

आज के समय सड़कों का तेजी से विकास हो चुका है, जिसकी वजह से लोग दिन और रात दोनों समय यात्रा करते हैं। खासकर हाईवे और एक्सप्रेसवे के बेहतर नेटवर्क के कारण अब रात में भी लंबी दूरी तय करना आसान हो गया है। हालांकि, रात का सफर जितना सुविधाजनक लगता है, उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है। कम रोशनी, थकान और अचानक सामने आने वाली बाधाएं हादसों का कारण बन सकती हैं। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर रात की यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सकता है।

गाड़ी की लाइट्स सही हो

रात में ड्राइविंग के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वाहन की लाइट्स निभाती हैं। हेडलाइट, टेललाइट, इंडिकेटर और फॉग लाइट पूरी तरह से कार्यरत हों, यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। कई बार लापरवाही के कारण लाइट्स कमजोर हो जाती हैं या ठीक से काम नहीं करतीं। इससे न केवल सामने का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देता बल्कि अन्य वाहन चालकों को भी आपकी कार का अंदाजा लगाने में परेशानी होती है। खराब लाइट्स के साथ वाहन चलाना दुर्घटना के जोखिम को बढ़ाता है और यातायात नियमों का उल्लंघन भी माना जाता है। इसलिए रात में सफर से पहले लाइट्स की जांच अवश्य कर लें।

विंडशील्ड और शीशों की सफाई रखें

रात में सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी अक्सर आंखों पर असर डालती है। यदि विंडशील्ड पर धूल, धब्बे या गंदगी जमी हो तो यह समस्या और बढ़ सकती है। गंदी विंडशील्ड रोशनी को फैलाती है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और चालक को सड़क स्पष्ट नहीं दिखती। इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले विंडशील्ड, रियर व्यू मिरर और साइड मिरर की अच्छी तरह सफाई कर लें। वाइपर और वॉशर फ्लूइड भी सही स्थिति में होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।

संगीत सुनें, लेकिन सतर्कता बनाए रखें

रात के लंबे सफर के दौरान हल्का संगीत मन को ताजगी देता है और थकान को कम करता है। अपनी पसंद के गाने सुनना यात्रा को आनंददायक बना सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि आवाज बहुत तेज न हो। तेज संगीत के कारण आसपास के वाहनों के हॉर्न या किसी संभावित खतरे की आवाज सुनाई नहीं देती। इसलिए मध्यम या धीमी आवाज में संगीत सुनते हुए पूरी एकाग्रता से वाहन चलाना ही समझदारी है।

बीच-बीच में ब्रेक जरूर लें

रात के समय लगातार ड्राइविंग करना शरीर और दिमाग दोनों के लिए थकान भरा हो सकता है। नींद आने की संभावना भी बढ़ जाती है, जो दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर दो से तीन घंटे में कुछ समय के लिए वाहन रोककर विश्राम किया जाए। थोड़ी देर टहलना, पानी पीना या हल्का नाश्ता करना सतर्कता बनाए रखने में मदद करता है। इससे इंजन को भी थोड़ी राहत मिलती है और वाहन की कार्यक्षमता बनी रहती है।

गति और दूरी का रखें विशेष ध्यान

रात में दृश्यता सीमित होती है, इसलिए तेज गति से वाहन चलाना खतरनाक साबित हो सकता है। सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में पर्याप्त समय मिल सके। हाई बीम का उपयोग सोच-समझकर करें और सामने से वाहन आने पर तुरंत लो बीम पर स्विच करें। इससे सामने वाले चालक को असुविधा नहीं होगी और सड़क पर संतुलन बना रहेगा।

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