Times Bull
News in Hindi

इसलिए दिवालिया हुआ सिकन्दर महान का देश, जानिए इस से जुड़ी बातें

11 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा के कर्ज में डूबे सिकन्दर महान के देश को दिवालिया घोषित (Greece Bailout) कर दिया गया। ग्रीस दुनिया का पहला विकसित देश बन गया है जिसे दिवालिया घोषित किया गया है। ग्रीस की मदद के लिए यूरोपियन कमीशन ने हाथ बढ़ाया लेकिन ग्रीस ने उसे ठुकरा दिया। ग्रीस को आईएमएफ को 12 हजार करोड़ रुपए की पहली किस्त चुकानी थी जिसको चुकाने में यह देश नाकामयाब रहा जिसके कारण इसे दिवालिया करार दे दिया गया। आज हम आपको ग्रीस के दिवालिया होने के 10 कारण बताने जा रहे हैं..

1999 में आए विनाशकारी भूकंप में ग्रीस का ज्यादातर हिस्सा तबाह हो गया था जिसके कारण 50,000 इमारतों का सरकारी खर्चे पर दुबारा निर्माण कराना पड़ा था। जिससे ग्रीस के आर्थिक व्यवस्था की नींव डगमगाने लगी थी।

2001 में ग्रीस का यूरो जोन से जुड़ना भी भारी भूल मानी जा रही है। हालांकि ग्रीस यूरो जोन से जुड़ने वाला पहला देश नहीं था। ग्रीस यूरो जोन से इस लिए जुड़ा जिससे उसे कर्ज मिलने में आसानी हो सके। लेकिन उसका यह फैसला उसके लिए भारी पड़ता दिखा।

ग्रीस ने 2004 के ओलंपिक खेलों के लिए यूरो जोन बड़ी मात्रा में कर्ज लिया। ऐसा माना जाता है कि लिए गए कर्ज को सरकार ने सही तरीके से नहीं खर्च किया जिससे यह संकट आ गया। ग्रीस ने ओलंपिक के लिए सात सालों में लगभग 12 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए।

ग्रीस को दिवालिया होने से बचाने के लिए यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मई 2010 में 10 अरब यूरो का राहत पैकेज भी दिया। इसके अलावा जून 2013 तक उसकी वित्तीय जरुरतें भी पूरी की। ग्रीस के सामने सुधारों को लागू करने की शर्तें भी रखी गई थीं। सख्त आर्थिक सुधारों को देखते हुए उसे दूसरा राहत पैकेज दिया गया जिसमें 130 अरब यूरो दिए गए। इसमें भी सुधारों की शर्तें जुड़ी हुई थीं।

राजकोषीय घाटा बढ़ जाने के बावजूद तत्कालीन सरकार ने खातों में हेराफेरी कर आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। जिसका खुलासा 2009 में नई सरकार के सत्ता में आने पर हुआ। उस समय ग्रीस पर जीडीपी की तुलना में 113 फीसदी कर्ज था जो यूरो जोन में सबसे ज्यादा था। एथेंस ओलिंपिक के समापन के कुछ महीनों के भीतर ही यूरो जोन को यह पता चल गया कि ग्रीस सरकार ने अपने खातों में फेर बदल कर उनसे कर्ज लिया था। इसके कारण इस देश को कर्ज देने वाले देशों ने अपना हाथ खींच लिया और इस दौरान ब्याज दरें 30 फिसदी के स्तर पर पहुंच गई।

राहत पैकेज की शर्तों को लागू करने में देरी के कारण दिसंबर 2012 में ऋणदाताओं ने ग्रीस को आखिरी चरण में कर्ज राहत देने की घोषणा की। इसके लिए आईएमएफ ने भी उसे सहयोग दिया और जनवरी 2015 से मार्च 2016 तक ग्रीस को 8.2 अरब यूरो का कर्ज सहयोग मिला।

ग्रीस की अर्थव्यवस्था कुछ रफ्तार पकड़ रही थी कि संसदीय चुनाव के बाद वामपंथी सिरिजा पार्टी इन वादों के साथ सत्ता में आ गई कि सरकार बनते ही बेलआउट की शर्तों को ठुकरा दिया जाएगा। इससे जनता की मुश्किलें और बढ़ गईं। यूरो जोन के देशों ने एक बार फिर ग्रीस को राहत देते हुए टेक्निकल एक्सटेंशन दिया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जिससे ग्रीस के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट गया और कर्ज न चुका पाने के कारण उसे दिवालिया घोषित कर दिया गया।

हाल ही में दिवालिया घोषित हुआ ग्रीस घरेलू उत्पाद के लिहाज से दुनिया की 43वीं और क्रय शक्ति के मामले में 51वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। विश्वबैंक की 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक 28 सदस्यों वाले यूरोपीय यूनियन में ग्रीस की अर्थव्यवस्था 13वें नंबर पर है।

जीडीपी के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में ग्रीस का दुनिया में 37वां और खर्च करने की क्षमता के अनुसार प्रति व्यक्ति आय में ग्रीस का 40वां स्थान है। ग्रीस को एक विकसित अर्थव्यवस्था माना जाता है और 2012 के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार यह 80 फीसदी से ज्यादा सेवा क्षेत्र व करीब 16 फीसदी उद्योगों पर निर्भर है।

ग्रीस में पर्यटन और शिपिंग को यहां उद्योग में शामिल किया गया है। 1 जनवरी 2013 की रिपोर्ट के अनुसार ग्रीस के पास दुनिया की सबसे बड़ी मर्चेंट नेवी है व दुनिया के 15.17 फीसदी जहाजों का हकदार अकेले ग्रीस है। ग्रीस को देखने के लिए 2013 में 17.9 मिलियन यानी 1 करोड़ 79 लाख पर्यटकों पहुंचे थे। पर्यटकों को लुभाने में ग्रीस का यूरोपियन यूनियन में छठा व दुनिया में 16वां स्थान है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.