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बीमारियां ही दूर नहीं करता योग, यौन शक्ति भी बढ़ाता है

yoga benefits – भारत में जन्मे और दुनिया भर में प्रचलित हुए योग की लोकप्रियता और इसके नियमित अभ्यास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक फायदे हैं जो पूरी दुनिया को इस प्राचीन भारतीय विधा का दीवाना बना रही है। आइए आज हम जानते हैं कि आखिर योग करने के ऐसे 10 क्या लाभ हैं जो दुनिया को नई राह दिखा रहे हैं….

योग करने से शरीर लचीला होता है। शरीर में सुन्दरता, कोमलता, गति, शक्ति तथा फुर्ति आती है जिससे आम जीवन में बहुत फायदा होता है। यह सभी गुण न केवल स्त्रियों वरन पुरुषों को भी नई शक्ति और स्फूर्ति का अहसास कराती है। उदाहरण के तौर पर सूर्य नमस्कार से शरीर लचीला और कर्मठ बनकर शक्तिशाली बनता है और व्यक्ति कठिन से कठिन कार्य करने में सक्षम बनता है।

नियमित रूप से योग करने से शरीर की ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह करती हैं जिससे व्यक्ति की यौन शक्ति आश्चर्यजनक रूप से बढ़ती है। वह आजीवन युवा बना रहता है और वीर्य रक्षा होती है। केवल योग करने मात्र से ही बिना दवाईयों के वैवाहिक जीवन का आनंद उठाया जा सकता है। योगाचार्यों के अनुसार वज्रोली, प्राणायाम तथा मूलबंध जैसे कुछ खास योगासनों को अपनाकर सभी तरह की सेक्स समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

मयूरासन, त्रिकोणासन, कपालभाति जैसी योग क्रियाओं का नियमित रूप से अभ्यास करने से पेट तथा पाचन संस्थान की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है। फलस्वरूप शरीर कब्ज, अपच अन्य बीमारियों से मुक्त होता है।

शवासन, प्राणायाम तथा बालासन जैसे कुछ योग आसनों का नियमित रूप से अभ्यास करना चिंता और डिप्रेशन को खत्म करता है। इससे व्यक्ति में सकारात्मकता आती है और वह नए जोश के साथ समस्याओं को परास्त करने में जुट जाता है।

योग करने पर शरीर के किसी अंग विशेष का नहीं वरन पूरे शरीर का व्यायाम होता है। पूरे शरीर की देखभाल होती है, जिससे शरीर में कान्ति और सौन्दर्य जाग उठता है।

प्राणायाम जैसी क्रियाओं के द्वारा श्वास तथा दिमागी हलचल का नियमन होता है। इससे व्यक्ति की संकल्प शक्ति मजबूत होती है और उसमें मानसिक स्थिरता आती है।

विभिन्न योग आसन शरीर को निरोग, स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए रखते हैं। वस्ति, नेती, शंख प्रक्षालण तथा अनुलोम विलोम प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास करने वालों को साधारण बीमारियां यथा सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी, कमर दर्द, माइग्रेन, हाथ-पैर में दर्द आदि कभी परेशान नहीं करती।

जिन्हें स्लिप डिस्क तथा कमर दर्द की शिकायत हैं, उन्हें मयूरासन, शवासन, ताड़ासन तथा पद्मासन का नियमित रूप से अभ्यास करने पर इन बीमारियों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।

नियमित रूप से योग की त्राटक क्रिया का अभ्यास करने वालों की नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। उन्हें चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही आंखों की थकान, दर्द, आंखों में पानी आना आदि समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है।

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