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साथी की यह आदतें आप नहीं बदल सकते, कोशिश भी न करें

प्यार इंसान से वह सब भी करवा देता है, जिसकी उसने जीवन में कल्पना भी नहीं की होती, लेकिन ऎसी कुछ चीजें हैं जिसे प्यार भी नहीं बदल सकता। पढ़ें ऎसी ही कुछ आदतों के बारे में जिन्हें आप अपने साथी में चाह कर भी नहीं बदल सकते, फिर चाहे आपकी बॉन्डिंग कितनी ही अच्छी क्यों न हो –

भारत में शादी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार से होती है, यह बात 100 फीसदी सच है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल पिलेमर कहते हैं, “लोगों का उनके परिवार के साथ जुड़ाव हमेशा गहरा होता है, इसलिए यह न सोचें कि आप से शादी करने के बाद वे परिवार की चिंता छोड़ देंगे। यहां समझौता करना ही बेहतर होता है, लेकिन इस समझौते का असर अपने साथी के साथ रिश्ते पर न पड़ने दें ।”

ऑपोजिट एट्रैक्ट्स, लेकिन यह भी एक हद तक ही अच्छा लगता है। कई मामलों में आप भी चाहते हैं कि आपका साथी भी आप ही की तरह सोचे। साइकोलॉजिस्ट समांथा रोडमैन के मुताबिक, “आपनके अपने पार्टनर का टेम्प्रामेंट नहीं बदल सकते। इसका एक उदाहरण है कि एक्ट्रोवर्ट लोग गैदरिंग में सहज रहते हैं और लोगों से मिलना पसंद करते हैं, वहीं इंट्रोवर्ट लोग अपने आप में ही मग्न अकेले रहना पसंद करते हैं।”

हॉबीज वह एक्टिविटी है जिसे वे बचपन से करते आ रहे हैं और बेशक उन्हें वह करना बहुत पसंद है इसलिए ही तो वह उनकी हॉबी है। रिलेशनशिप कोच क्रिस आर्मस्ट्रॉन्ग के मुताबिक अपने साथी की हॉबी को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उदाहरण के लिए अगर आपको अपनी पत्नी का शॉपिंग जाना पसंद नहीं है तो इस भावना को अपने तक ही रखें, क्योंकि अगर यह उनकी हॉबी है और आप इ से बदलने की कोशिश करते हैं तो आपके रिश्ते में खटास आ सकती है।

ज्यादातर लोग यह सोचकर एक रिलेशनशिप में आ जाते हैं कि वे सामने वाले की कुछ आदतों को बदल कर उन्हें अपने मुताबिक ढाल लेंगे, लेकिन जरूरी नहीं है कि यह हर बार संभव हो। पिलेमर कहते हैं, “ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों से सावधान रहना ही सही है, क्योंकि गुस्सा करना ऎसे लोगों की पर्सनेलिटी में शुमार होता है और इस आदत को बदलना लगभग नामुमकिन है।”

रॉडमैन के मुताबिक जिन लोगों ने बचपन से ही धार्मिक कार्यक्रमों में रूचि ली हो और इससे जुड़े रहे हों, वे जीवन के हर पड़ाव पर ऎसा करते रहना चाहेंगे। वहीं अगर आपका साथी ईश्वर या धर्म में शुरू से ही विश्वास नहीं रखता है तो यह सोचना गलत होगा कि आपकी संगति में रहकर वह धार्मिक बन सकता है।

आप अपना हर लम्हा साथी के साथ बिताना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पर्सनल स्पेस चाहिए। यकीन मानिए उनकी इस आदत को बदलने की काशिश करेंगे तो आप उन्हें खो देंगे। आर्मस्ट्रॉन्ग कहते हैं, “आज कल लोग साथ तो रहना चाहते हैं, लेकिन वे यह भी चहते हैं कि उनके साथ के साथ उनका कनेक्शन अर्थपूर्ण हो और उसमें दोनों के लिए जगह हो, ताकि रिश्ते की ताजगी बनी रहे।”

हो सकता है आपके साथी को जीवन के हर छोटे बड़े इवेंट को प्लान कर चलने की आदत हो, जैसे आप अगली बार छुटि्टयों पर कब जाएंगे, या फैमिली प्लानिंग, और आप इसके बिलकुल विपरीत बेफिक्र जीवन जीने वालों में से हैं। साइकोलॉजिस्ट जिल वीबर के मुताबिक, “किस तरह बच्चों को पाला जाएगा, खर्चे, बचत और यहां तक कि वीकएंड्स आदि तक प्लान करने वाले साथी के साथ कुछ चीजों को ले कर मतभेत हो सकते हैं, लेकिन इन्हें बैठ कर सुलझाएं, न कि साथी की इस आदत को बदलने की कोशिश करें।”

कुछ लोग साफ कहते हैं कि उन्हें बच्चे नहीं चाहिए। इसके लिए वे कारण कुछ भी क्यों न बताते हों, लेकिन यहां आपको पहले ही सोच लेने की जरूरत है। जरूरी नहीं है कि आपसे शादी के बाद उनकी इस बारे में सोच बदल ही जाए।

आपका और आपके साथी का सेंस ऑफ ह्यूमर एक जैसा होना जरूरी है। पिलेमर बताते हैं, “यह बहुत जरूरी है कि आप और आपके साथी को एक ही चीज फनी लगे। अगर कोई बात आपको फनी लगती है और उन्हें नहीं, तो यह तकरार का मुद्दा बन सकता है। सेंस ऑफ ह्यूमर कंपैटिबिलिटी दर्शाता है और इसका न होना रिश्तों में दूरी ला सकता है।

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