आज सुबह 9 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम सम्बोधन देते हुए कृषि कानून वापस लिए जाने की घोसणा की. जहा विपक्ष इसे चुनाव के भय से लिया गया निर्णय बता रहा है तो भाजपा इस लोकतंत्र का सम्मान किये जाने वाला निर्णय बता रही है. हलाकि इसके तुरंत बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा के लोकतंत्र का सम्मान किये जाने में सरकार ने इतना समय क्यों लगा दिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया आने लगी और लोग प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे.
इसी कड़ी में सोशल मीडिया ऐप कू पर भी लोगों ने अपने विचार रखते हुए #Jaijawanjaikisan ट्रेंड करवाया और अपने विचार रखे.एक यूजर सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते हुए कहते है- आज दूसरी बार भारत में लोकतंत्र की विजय हुई। इंदिरा सरकार के बाद मोदी सरकार ने भी जाना की किसान है तो हम है।

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#जयजवानजयकिसान

आज दूसरी बार भारत में लोकतंत्र की विजय हुई। इंदिरा सरकार के बाद मोदी सरकार ने भी जाना की किसान है तो हम है।

Anushka (@anushkaH0DQ3) 19 Nov 2021

तो वही एक यूजर लिखती है- किसानों की मेहनत रंग लाई। आज उनकी बात सुनी गई और मोदी सरकार ने फार्म बिल वापस ले लिए। ये बेहद जरूरी है क्योंकि किसानों ने इसको हटाने के लिए काफी संघर्ष किया है पिछले 2 सालों से।
आज भारत में फिर से किसानों की जीत हुई है आज भारत में फिर से लोकतंत्र की जीत हुई है

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किसानों की मेहनत रंग लाई।
आज उनकी बात सुनी गई और मोदी सरकार ने फार्म बिल वापस ले लिए। ये बेहद जरूरी है क्योंकि किसानों ने इसको हटाने के लिए काफी संघर्ष किया है पिछले 2 सालों से।
आज भारत में फिर से किसानों की जीत हुई है आज भारत में फिर से लोकतंत्र की जीत हुई है

Khushleen kaur (@khushi101) 19 Nov 2021

टिकैत के सामने पहली बार घुटने नहीं टेके किसी सरकार ने
फरवरी 2021 में एक समय ऐसा आया था जब किसान आंदोलन ख़त्म होने की तर्ज पर था लेकिन किसान आंदोलन के सबसे बड़े नेता ने जब मंच पर रोते हुए चैधरी महेंद्र सिंह टिकैत को याद किया तो किसान आंदोलन में एक नयी ऊर्जा आ गयी और कई किसान जो आंदोलन छोड़ कर जा रहे थे वे और भी अधिक संख्या में वापस आ गए. महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के पूर्व अध्क्षय व देश के सबसे बड़े किसान नेताओं में से एक थे. सन 1980 में उन्होंने किसानों की गन्ने की फसल पर अधिक दाम और इसके साथ 35 मांगों को लेकर करीब 5 लाख किसानों के साथ दिल्ली कूच किया था जिसके बाद उस समय केंद्र में तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार को घूटने टेकने पढ़े थे और महेंद्र टिकैत की सभी मांगों को मानना पढ़ा था . .

कई नेताओं ने भी दी प्रतिक्रियाएं-
प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय पर सोशल मीडिया ऐप कू के माध्यम से कई नेताओं ने भी इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाए दी जिसमें यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, मप्र सीएम शिवराज सिंह चौहान सहित कई अन्य नेता शामिल है .

अपनी बात रखते हुए योगी आदित्यनाथ समाचार न्यूज़ एजेंसी ANI के माध्यम से अपने विचार रखते हुए कहते है के- यह निर्णय किसानों के हित में था लेकिन मुझे लगता है के हम कही ना कही किसानों तक इसके फायदे के बारे में बताने में असफल रहे.

यूपी के दलित नेता और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद कू करते हुए लिखते है- आगामी चुनावों का डर ही सही लेकिन मोदी सरकार को झुकना पड़ा। सत्ता का अभिमान टूट गया और किसानों का संघर्ष जीत गया। संविधान की जीत हुई है। हालांकि इस जीत के लिए सैकड़ों किसानों ने अपनी शहादत दी है। उन्हें नमन।


मप्र कांग्रेस का आधिकारिक हैंडल कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की ट्रेक्टर पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखते है – कृषि क़ानूनों का वापस होना हिन्दुस्तान के लोकतंत्र की जीत और नरेंद्र मोदी की तानाशाही की हार है।

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